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बाबरी विध्वंस की 28वीं बरसी पर असदुद्दीन ओवैसी बोले- इस नाइंसाफी को कभी मत भूलना

बाबरी मस्जिद विध्वंस की 28वीं बरसी पर ओवैसी ने ट्वीट किए हैं- (Photo-news18 English via PTI)
बाबरी मस्जिद विध्वंस की 28वीं बरसी पर ओवैसी ने ट्वीट किए हैं- (Photo-news18 English via PTI)

असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने लिखा '1992 में आज की इस तारीख पर हमारी मस्जिद को दुनिया के सामने ढहा दिया गया. इसके लिए जिम्मेदार लोगों ने एक दिन भी सजा नहीं भुगती. अयोध्या में 6 दिसंबर को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 6, 2020, 5:02 PM IST
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नई दिल्ली. बाबरी मस्जिद विध्वंस (Babri demolition) को आज 28 साल हो चुके हैं. इस मौके पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उस दिन को याद किया है. वहीं, उन्होंने ट्वीट के जरिए इस मस्जिद के बारे में आने वाली पीढ़ियों को बताए और सिखाए जाने की मांग की है. खास बात है कि सालों पुराने मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाया था. इसके अलावा अयोध्या में 6 दिसंबर को सुरक्षा के मजबूत इंतजाम किए गए हैं. रविवार को किसी भी समुदाय के लोगों को कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई है.

ओवैसी ने लिखा, 'अगली पीढ़ी को यह बताने और सिखाने का याद रखें कि 400 से ज्यादा सालों से हमारी बाबरी मस्जिद अयोध्या (Ayodhya) में खड़ी थी. हमारे बुजुर्गों ने इसके हॉल में नमाज पढ़ी हैं, इसके मैदान में अपने रोजे तोड़े हैं और जब उनका इंतकाल हुआ, तो उन्हें पास के कब्रिस्तान में दफनाया गया.' एक अन्य ट्वीट में ओवैसी ने लिखा '1949 में 22-23 दिसंबर की रात में हमारी बाबरी मस्जिद को अपवित्र किया गया और 42 सालों के लिए कब्जे में कर लिया गया.'

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उन्होंने लिखा '1992 में आज की इस तारीख पर हमारी मस्जिद को दुनिया के सामने ढहा दिया गया. इसके लिए जिम्मेदार लोगों ने एक दिन भी सजा नहीं भुगती.' खास बात है कि दोनों ट्वीट में ओवैसी ने आखिर में लिखा है 'इस नाइंसाफी को नहीं भूलना.' AIMIM के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से की गई एक पोस्ट में भी कहा गया है 'हमारी लड़ाई जमीन की नहीं बल्कि कानूनी अधिकार की थी, हमको भीख में कोई चीज नहीं चाहिए. हमारा जो हक है, हमें दे दो.'

अयोध्या फैसले पर भी जताया था विरोध
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में स्थित विवादित जमीन को लेकर मंदिर पक्ष में फैसला सुनाया था. कोर्ट ने मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने का आदेश दिया था. उस दौरान भी ओवैसी ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा था 'मैं अपनी पार्टी की तरफ से बोलता हूं, हमें यह खैरात नहीं चाहिए. हमारी लड़ाई बाबरी मस्जिद के कानूनी अधिकारों के लिए थी. हमारी लड़ाई जमीन के इस टुकड़े के लिए नहीं थी.'
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