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आसनसोल: TMC के ‘आसन’ से भाजपा के पूर्व बागी का नारा...‘खामोश’

शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल सीट पर संसदीय पर होने वाले उपचुनाव में टीएमसी के प्रत्याशी हैं. (फाइल फोटो)

शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल सीट पर संसदीय पर होने वाले उपचुनाव में टीएमसी के प्रत्याशी हैं. (फाइल फोटो)

Asansol Loksabha Byelection : आसनसोल में शत्रुघन सिन्हा (Shatrughan Sinha) की राह इतनी भी आसान न हो शायद. क्योंकि भाजपा ...अधिक पढ़ें

कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में एक चर्चित जगह है, आसनसोल (Asansol). इसमें दो शब्द हैं, ‘आसन’ और ‘सोल’. आसन, जो बंगाल में एक खास पेड़ होता है और सोल जिसका मललब मिट्‌टी या धरती. वैसे ‘आसन’ का अर्थ विभिन्न योग-मुद्राओं से भी लगाया जाता है. साथ ही, जमीन पर बैठने के काम आने वाली पीठ या चौकी भी ‘आसन’ कहलाती है. मतलब, ‘आसन’ और ‘सोल’ यानी जमीन का आपस में अटूट रिश्ता है, किसी भी रूप से लें. आसनसोल का ऐसा ही रिश्ता ‘बागी’ और ‘बगावत’ से भी है. क्योंकि इसी जमीन पर बंगाल के ख्यात कवि, लेखक और संगीतकार काजी नजरुल इस्लाम (Kazi Nazrul Islam) भी जन्मे हैं. बांग्लादेश (Bangladesh) में इन्हें ‘राष्ट्रकवि’ का दर्जा मिला हुआ है. इन काजी नजरुल इस्लाम ने 1920 के दशक में उस वक्त बड़े पैमाने पर ख्याति अर्जित की थी, उन्होंने अंग्रेज सरकार सहित अन्य तमाम कु-व्यवस्थाओं पर अपने लेखन के जरिए चोट की. इस लेखन ने युवाओं के मन में विद्रोह की लौ लगाने में अहम भूमिका निभाई. लिहाजा, नजरुल इस्लाम को ‘बागी कवि’ का तमगा दे दिया गया. और ‘बागी कवि’ की इस धरती आसनसोल पर इन दिनों सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आसन से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दो बागी नेता नारा बुलंद कर रहे हैं, ‘खामोश’.

दो बागियों की एक कहानी 

बिल्कुल, 2 नेताओं में पहले शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) ही हैं. फिल्मों में जिनके मुंह से लोगों ने कई बार ‘खामोश’ लफ्ज, डायलॉग की शक्ल में सुना है. फिल्मों से राजनीति में आए तो इन्हें भाजपा का आसन ही अपने उपयुक्त लगा. पार्टी ने भी इन्हें बिहार की राजधानी पटना से लोकसभा चुनाव लड़ाया. जीते तो केंद्र में मंत्री भी बनाया. लेकिन 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में मंत्री नहीं बनाए गए, तो खुली बगावत पर उतर आए. इससे 2019 में इन्हें टिकट भी नहीं मिला. लिहाजा, कांग्रेस में शामिल हो गए लेकिन वहां ज्यादा तवज्जो मिली नहीं तो अभी-अभी टीएमसी के आसन पर आ बैठे हैं. टीएमसी ने उन्हें आसनसोल से लोकसभा पहुंचने का एक मौका, रास्ता और टिकट दिया है. वहां 12 अप्रैल को उपचुनाव (Asansol Loksabha Byelection) के लिए मतदान होना है. ठीक इसी तरह तरह की कहानी दूसरे नेता बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo) की है. ये भी फिल्मों से राजनीति में आए. पहले-पहल भाजपा के आसन पर ही बैठे. पार्टी ने शत्रुघ्न सिन्हा (Shatrughan Sinha) की तरह इन्हें भी लोकसभा टिकट दिया. आसनसोल से सांसद चुने गए तो 2014 में ही पहली ही बार में मंत्री बना दिया. फिर 2019 में दोबारा चुने गए तो फिर मंत्री बनाए गए. लेकिन अक्टूबर 2021 में जब केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटाया गया तो ये भी बागी हो गए और टीएमसी के आसन पर जा बैठे. अब टीएमसी उन्हें सांसद से विधायक बनाने की कोशिश में है. उन्हें दक्षिण कोलकाता की बालीगंज विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में उतारा गया है. हालांकि वे आसनसोल भी पहुंच रहे हैं, शत्रुघन सिन्हा की मदद के लिए.   

आसनसोल में 1984 के बाद नहीं जीती कांग्रेस, टीएमसी अब तक नहीं

Tags: Asansol S25p40, Babul supriyo, Hindi news, Shatrughan Sinha, West bengal

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