गहलोत बोले- लोग चाहते थे मुझे CM बनाना इसलिए राहुल ने भरी थी हामी

दरअसल वो कहना चाहते थे कि विधानसभा चुनाव उनके नाम पर ही लड़ा गया था. ऐसे में उन्हें अगले पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए

Sumit Pande | News18Hindi
Updated: July 11, 2019, 3:21 PM IST
गहलोत बोले- लोग चाहते थे मुझे CM बनाना इसलिए राहुल ने भरी थी हामी
राहुल गांधी के साथ अशोक गहलोत (फाइल फोटो)
Sumit Pande | News18Hindi
Updated: July 11, 2019, 3:21 PM IST
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कम बोलते हैं. वो चुपचाप अपने काम को अंजाम देते हैं. उन्होंने पिछले चार दशकों में राजनीति में कांग्रेस के उतार-चढ़ाव को करीब से देखा है. उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार की तीन पीढ़ियों के साथ काम किया है और पार्टी के प्रति उनकी वफादारी कभी कम नहीं हुई. यानी अगर सीधे और कम शब्दों में कहा जाए तो तीन बार के मुख्यमंत्री पार्टी की हर कामयाबी का श्रेय गांधी परिवार को देते हैं. जबकि हार के लिए वो संगठन को ज़िम्मेदार मानते हैं.

लोकसभा चुनाव में लगातार दूसरी हार के बाद राहुल गांधी के इस्तीफे ने पार्टी में कई लोगों को शर्मिंदा कर दिया. अब जबकि उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा से दिया है ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दूसरे लोग भी हार की जिम्मेदारी लेंगे? सच कहा जाए तो पिछले एक महीने में किसी ने भी हार की ज़िम्मेदारी नहीं ली है. बल्कि लोग राहुल गांधी को इस्तीफा न देने के लिए मनाते रहे. एक कांग्रेसी ने कहा, ''हाथी के पांव में सबका पांव'.

बुधवार को अशोक गहलोत ने बजट पेश करने के बाद बड़ी ही दिलचस्प बात कही. उन्होंने कहा ''लोग चाहते थे कि मैं राज्य का मुख्यमंत्री बनूं''. दरअसल वो कहना चाहते थे कि विधानसभा चुनाव उनके नाम पर ही लड़ा गया था. ऐसे में उन्हें अगले पांच साल तक मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए. उन्होंने कहा, ''लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए राहुल गांधी ने मुझे काम करने का मौका दिया.''

गहलोत की ये बातें हर किसी को हैरान करती है. ऐसे नेता जो जमीनी स्तर से उठ कर आए हैं उन्हें ये अच्छी तरह पता है कि ऐसी बातें कहने का अंजाम पार्टी में अच्छा नहीं होता है. देखा जाए तो गहलोत अपनी बातों से दो मुद्दों की तरफ इशारा कर रहे हैं. पहला ये कि वो दिल्ली आकर राष्ट्रीय राजनीति में दिलचस्पी दिखा रहे हैं. राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद अध्यक्ष पद के लिए कई नामों पर विचार किया जा रहा है. अध्यक्ष पद की रेस में गहलोत भी हैं.

चुनाव के बाद सचिन पायलट का खेमा चाहता है कि राजस्थान में नेतृत्व में बदलाव हो. लेकिन गहलोत ऐसे किसी भी सुझाव के पक्ष में नहीं हैं. वो नहीं चाहते हैं कि सचिन पायलट को कमान दी जाए. गहलोत बार-बार ये कहना चाहते हैं कि दिसंबर 2018 का चुनाव सिर्फ उनके नाम पर लड़ा गया था. मई 2019 के लोकसभा चुनाव में राजस्थान में कांग्रेस की करारी हार हुई. लेकिन गहलोत इन दोनों चुनावों को अलग-अलग देखते हैं.

ये भी पढ़ें: भारत के 1.5 करोड़ एंडरॉइड यूजर्स पर Agent Smith का अटैक

48 घंटे में उत्तर प्रदेश समेत यहां पर भारी बारिश की चेतावनी!

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 11, 2019, 2:49 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...