श्मशान में 12 घंटे की ड्यूटी कर रहे पुलिसवाले ने बेटी की शादी टाली, कहा- मैं ऐसे वक्त में जश्न कैसे मना सकता

श्मशान के अधिकारी बताते हैं कि उनके पास हर रोज 60-100 शव पहुंच रहे हैं, जो कि एक दिन में 47 शवों की क्षमता से काफी ज्यादा हैं. (सांकेतिक फोटो)

Coronavirus Stories: 56 वर्षीय कुमार बीते एक महीने से राजधानी दिल्ली (Delhi) के श्मशान में हर रोज ड्यूटी निभा रहे हैं. 36 साल से पुलिस विभाग के साथ काम कर रहे कुमार हजरत निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में पदस्थ हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल श्मशान में तैनात किया गया है.

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    नई दिल्ली. पुलिस (Police) को जनता का सेवक कहा जाता है. खाकी वर्दी पहनने वाले सुरक्षा के लिए जिम्मेदार इस समुदाय को यह सम्मान ऐसे ही नहीं मिला है. दिल्ली पुलिस में सहायत उप निरीक्षक राकेश कुमार (Rakesh Kumar) जैसे पुलिसकर्मियों ने इस बात को साबित भी किया है. आज कोरोना काल से जूझ रहे देश में आंतरिक व्यवस्था को फ्रंटलाइन वर्कर अपनी जान जोखिम में डालकर मजबूत कर रहे हैं. सड़कों, अस्पतालों से लेकर श्मशान तक उनकी मौजूदगी है. इस मुश्किल दौर में अपनी ड्यूटी के लिए कुमार इस हद तक समर्पित हैं कि उन्होंने अपनी बेटी की शादी टालने का फैसला किया है.

    द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट बताती है कि 56 वर्षीय कुमार बीते एक महीने से राजधानी दिल्ली के श्मशान में हर रोज ड्यूटी निभा रहे हैं. 36 साल से पुलिस विभाग के साथ काम कर रहे कुमार हजरत निजामुद्दीन पुलिस स्टेशन में पदस्थ हैं, लेकिन उन्हें फिलहाल श्मशान में तैनात किया गया है. वे इस दौरान पुजारी और दुख में डूबे परिवारों की मदद करते हैं.

    वे बताते हैं 'मैं ग्राउंड पर सुबह 7 बजे के आसपास आता हूं और स्थान तैयार करने में पुजारी और कर्मचारियों की मदद करता हूं. दिनभर, मैं चिता जलाने, शव उठाने, पूजा के लिए सामान खरीदने और एंबुलेंस ड्राइवर के साथ समन्वय बनाने में मदद करता हूं.' उन्होंने कहा '13 अप्रैल से मैंने 1100 से ज्यादा दाहसंस्कार में मदद की है. इनमें से कई लोगों को कोविड था. उनके परिवार यहां नहीं आ सकते थे, ऐसे में यहां पहुंचने वाले एक व्यक्ति की मदद करते हैं. मैं ग्राउंड से शाम 7-8 बजे निकलता हूं.'



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    काम के चलते बेटी की शादी टाली
    कुमार की बेटी की शादी 7 मई को होनी थी, लेकिन काम में व्यस्त होने के चलते फिलहाल समारोह को टाला गया है. उन्होंने कहा 'चूंकी मैं पीपीई किट और डबल मास्क हर समय पहनता हूं, तो मैं अपने परिवार को जोखिम में नहीं डालना चाहता. और यहां ऐसे कई परिवार हैं, जिन्हें हमारी मदद की जरूरत है. अब यह मेरा कर्तव्य है. मैं यहां से कैसे जा सकता हूं और अपनी बेटी की शादी कर सकता हूं?'



    कुमार अगले चार सालों में रिटायर होने जा रहे हैं और वे ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद करना चाहते हैं. वे कहते हैं कि उन्हें महामारी और वायरस से डर नहीं लगता क्योंकि उनके सीनियर्स ने उन्हें सभी जरूरी सावधानियों के बारे में बताया है. साथ ही उन्होंने एक महीना पहले वैक्सीन के दोनों डोज ले लिए हैं. श्मशान के अधिकारी बताते हैं कि उनके पास हर रोज 60-100 शव पहुंच रहे हैं, जो कि एक दिन में 47 शवों की क्षमता से काफी ज्यादा हैं. अखबार से बातचीत में दक्षिण पूर्व के डीसीपी आरपी मीणा ने कहा है कि उनकी जिला टीम ने हर श्मशान में दो कानून व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की मदद के लिए दो जवान तैनात किए हैं.