PoK के मानवाधिकार कार्यकर्ता ने जो बाइडन को बताईं पाकिस्तान की करतूतें, कहा- हमें बचा लें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फ़ाइल फोटो)
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फ़ाइल फोटो)

कार्यकर्ता ने पीओके में रहने वाले लोगों पर पाकिस्तान के अत्याचारों को सूचीबद्ध करते हुए कहा कि सीमा पार से गोलीबारी के दौरान, क्षेत्र की महिलाएं बंकरों में शरण लेने से इनकार कर देती हैं क्योंकि वे पाकिस्तान सेना द्वारा छेड़छाड़ किए जाने की शिकायत करती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 10, 2020, 12:01 AM IST
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नई दिल्ली. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pakistan Occupied Kashmir) में पाकिस्तान (Paksitan) द्वारा किए जा रहे बेतहाशा जुल्म का हवाला देते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने सोमवार को नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन (American President Joe Biden) को चिट्ठी लिखी है. अयूब ने अपने पत्र में बाइडन से आग्रह किया है कि वह इस्लामाबाद (Islamabad) से अपनी सेना और गैर जरूरी लोगों को पीओके से वापस बुलाने के लिए कहें.

पीओके (POK) के मीरपुर के रहने वाले मिर्जा फिलहाल ब्रिटेन में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं. उन्होंने बाइडन को अपने पत्र में कहा कि पाकिस्तान ने पीओके को प्रशिक्षण शिविर में बदल दिया है, जहां पर वहां युवाओं और बाहरी लोगों को आतंकी बनने की ट्रेनिंग दी जाती है. ये आतंकी अक्सर भारतीय केंद्र शासित प्रदेश कश्मीर में हमले कर तबाही मचाते हैं.

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मिर्जा ने दी जीत की बधाई
मिर्जा ने बाइडन को राष्ट्रपति चुनाव में जीत पर बधाई देते हुए कहा है आपके आने से अमेरिकी वाइट हाउस में एक आशा की किरण जली है. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपको एक मरहम लगाने वाला और एकता में विश्वास रखने वाला माना जा रहा है. मिर्जा ने कहा इसी को ध्यान में रखते हुए मैंने इस संदर्भ में आपको पत्र लिखा है.

मिर्जा ने लिखा "आज हमारे क्षेत्र के 32,000 वर्ग मील से अधिक क्षेत्र अभी भी पाकिस्तानी राज्य के अवैध कब्जे में हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और चार विवादों के बावजूद जम्मू कश्मीर का मुद्दा अनसुलझा है. इस बीच, मेरे लोग पीड़ित हैं. स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कृषि, परिवहन और विभिन्न आवश्यक संस्थानों की कमी के कारण जिन्हें आधुनिक समाज के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा माना जाता है. पत्र में कहा गया कि हमारे लाखों युवा मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका यहां तक की सुदूर उत्तरी अमेरिका में प्रवास करने के लिए मजबूर हैं. ताकि वह वहां रह रहे अपने घरवालों की मदद कर सकें.

मिर्जा ने की ये अपील
मिर्जा ने बाइडन से अपील की कि वह उन्हें वाइट हाउस में आने का मौका दें ताकि वह पाकिस्तान के अवैध कब्जे के केस को सामने से उन्हें समझा सकें.

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मिर्जा ने आगे लिखा "मैं जम्मू कश्मीर के मुद्दे को युद्धस्तर पर हल करने में आपका समर्थन मांग रहा हूं और पीओके में जबरदस्ती तैनात पाकिस्तान की सेना और गैर-राज्य अभिनेताओं को हमारी जमीन से वापस लेने के लिए कह रहा हूं, एक मांग जो कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों में है. मैं आपसे अनुरोध करता हूं. हमें व्हाइट हाउस में एक दर्शक है ताकि हम अपने मामले को व्यक्तिगत रूप से आपके सामने पेश कर सकें."

कार्यकर्ता ने पीओके में रहने वाले लोगों पर पाकिस्तान के अत्याचारों को सूचीबद्ध करते हुए कहा कि सीमा पार से गोलीबारी के दौरान, क्षेत्र की महिलाएं बंकरों में शरण लेने से इनकार कर देती हैं क्योंकि वे पाकिस्तान सेना द्वारा छेड़छाड़ किए जाने की शिकायत करती हैं. उन्होंने बताया कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी जाती है.

पत्र में आगे कहा गया कि "चीनी हुक्मरानों के तहत मेगा-बांधों के निर्माण के लिए नदियों के मोड़ का विरोध करने वाले हमारे पर्यावरणविदों को 40, 60 और 90 साल के कारावास की सजा दी गई है. इसके अलावा दर्जनों मानवाधिकार कार्यकर्ता जेलों में कमी के लिए आवाज उठा रहे हैं. पत्र में कहा गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में रहने वाले हर 25 लोगों के लिए एक पाकिस्तानी सशस्त्र सैनिक तैनात किया गया है. इसलिए, हमारे लोगों को आधुनिक समय और उम्र में सबसे खराब तरह के आतंक का सामना करना पड़ता है."
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