Assembly Banner 2021

क्या असम में इस बार भी मजबूत रहेगा बीजेपी का किला या कांग्रेस करेगी वापसी, समझिए सियासी समीकरण

Assam Assembly ELection 2021 की तैयारियां हर दल ने शुरू कर दी है.

Assam Assembly ELection 2021 की तैयारियां हर दल ने शुरू कर दी है.

Assam Assembly Election 2021: असम में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने तैयारियां शुरू कर दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 1:35 PM IST
  • Share this:
दिसपुर. असम में आगामी विधानसभा चुनाव  (Assam Assembly Election 2021) के लिए भाजपा, कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने तैयारियां शुरू कर दी है. बीते कुछ दिनों के भीतर असम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह ने रैलियां की हैं. इसके साथ ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने भी कुछ रैलियां की हैं. फिलहाल राज्य में भाजपा की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA की सरकार है. साल 2016 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस नेता और सीएम तरुण गोगोई की अगुवाई में यूपीए की सरकार को हराकर राज्य में बीजेपी ने सरकार बनाई.

भाजपा की इस जीत में तब कांग्रेस के बागी रहे हिमंत बिस्व सरमा की भूमिका को अहम माना जाता है. तत्कालीन चुनाव में विधानसभा की 126 सीटों में से 86 (एनडीए), 26 (यूपीए) और 13 सीटें एआईयूडीएफ को मिलीं थी.

अगर आगामी विधानसभा चुनाव की बात करें तो राज्य में भाजपा के लिए कुछ मुद्दों पर मुश्किलें खड़ी होती नजर आ रही हैं. साल 2019 में केंद्र द्वारा शीतकालीन सत्र में पारित नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 का असम में काफी विरोध हुआ था. असम के लोगों का दावा था कि इससे उनकी सांस्कृतिक स्थितियां पलट सकती हैं. पूर्वोत्तर के इस अहम राज्य में बीजेपी के लिए उस वक्त मुश्किल और ज्यादा खड़ी हो गई जब कई पार्टी नेता ही कानून के खिलाफ चले गए.



Youtube Video

CAA विरोध में कई मुखर आवाजें आई सामने
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में कई मुखर आवाजें भी सामने आईं. इसमें से एक अखिल गोगोई हैं. बीते साल अक्टूबर में बनी पार्टी से पिछले दिनों असम जातीय परिषद ने गठबंधन का ऐलान किया है.  भाजपा के साथ सरकार में साथी असम गण परिषद ने भी CAA का विरोध किया लेकिन वह अब भी सरकार के साथ है. एनडीए में फिलहाल बोडोलैंड पीपुल फ्रंट, राभा जातीय एक्य मंच, तिवा जातीय एक्य मंच शामिल हैं.

CAA पर असम की जनता का विरोध झेल रही बीजेपी के सामने एनआरसी का मुद्दा भी है. साल 2019 में प्रकाशित हुए एनआरसी को खुद भाजपा के नेताओं ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया था.शीर्ष के कई नेताओं ने आरोप लगाया था कि गड़बड़ियों के चलते ऐसे लोगों के नाम लिस्ट में नहीं हैं जिन्हें होना चाहिए था. दावा यहां तक किया गया था कि फाइनल एनआरसी में ऐसे लोगों के भी नाम हैं जो इसके योग्य ही नहीं हैं.

तरुण गोगोई का निधन कांग्रेस के लिए झटका
वहीं बात विपक्षी दल कांग्रेस की करें तो बीते साल उसे भारी झटका लगा. कांग्रेस नेता और राज्य के पूर्व सीएम तरुण गोगोई ने कोरोनावायरस संक्रमण से उबरने के बाद खराब हुई तबीयत के चलते दुनिया को अलविदा कह दिया. राज्य में कांग्रेस की पहचान रहे गोगोई के निधन से कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ है.

राज्य में कांग्रेस CAA की विरोधी आवाजों को एकजुट करने पर काफी मेहनत कर रही है, ताकि साल 2016 में खिसका जनाधार उसे वापस मिल सके. गुरुवार को कांग्रेस नेता और असम इकाई के अध्यक्ष रिपुन बोरा ने दावा किया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के चलते असम संघर्ष और उग्रवाद के दिनों में वापस चला गया है. बोरा ने दावा किया कि जब केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार थी तो राज्य में शांति थी और उग्रवाद समाप्ति की ओर था.

NRC का मुद्दा भी उठा सकती है कांग्रेस
इस महीने की शुरुआत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी असम गए थे तो उन्होंने एक गमछा पहना हुआ था. उस पर CAA लिखा हुआ था जिस पर काटने का निशान लगाया था. राहुल गांधी की सीएए विरोधी आवाज को आगे बढ़ाने के लिए असम कांग्रेस के सदस्यों ने अब तक एक लाख से अधिक ‘गमछे’ एकत्र कर लिए हैं जिनपर संशोधित नागरिकता कानून विरोधी संदेश लिखे हैं. कांग्रेस ने कहा है कि अगर वह राज्य में सत्ता में आती है तो वह ‘शहीद स्मारक’ स्थापित करेगी जिसपर ये गमछे प्रदर्शित किए जाएंगे. पार्टी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर ‘गमछा’ (असम में सम्मान के रूप में दिया जाने वाला बुना हुआ पारंपरिक सफेद एवं लाल कपड़ा) एकत्र किए हैं.

इसके साथ ही कांग्रेस एनआरसी का भी मुद्दा भी इन चुनावों में उठा सकती है. एनआरसी को लेकर कांग्रेस, बीजेपी पर आरोप लगाती आई है कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक बना रही है. हाल ही में कांग्रेस ने चुनाव आयोग के उस फैसले का स्वागत किया था जिसमें कहा गया था कि आगामी विधानसभा चुनाव में वह लोग भी मतदान कर सकेंगे जिनके नाम एनआरसी में नहीं हैं.

AIUDF से कांग्रेस का गठबंधन दिखाएगा असर?
इन चुनावों में कांग्रेस को एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन से कुछ लाभ मिलने की संभावना है.  साल 2005 में गठित AIUDF अप्रवासी मूल के मुसलमानों के हितों की रक्षा के लिए बनाई गई. भाजपा अक्सर आरोप लगाती रही है कि AIUDF जिन मुस्लिमों की वकालत करती है वो कथित तौर पर बांग्लादेश से अवैध आए घुसपैठिये हैं. मुस्लिम वोटों के विभाजन ने 2014 के बाद से कई चुनावों में भाजपा और असोम गण परिषद के गठबंधन को फायदा पहुंचाया है. माना जा रहा है कि इस बार कांग्रेस और AIUDF के बीच गठबंधन इसलिए किया गया है ताकि मुस्लिम वोटों का बंटवारा ना हो.

हालांकि पार्टी के ही कई नेताओं ने ही एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन को गलत माना था जिस पर हाल ही में रिपुन बोरा ने स्पष्टीकरण दिया था. पीटीआई के अनुसार बोरा ने कहा था- विधानसभा चुनावों के लिए एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन करने में कुछ भी गलत नहीं, पार्टी सांप्रदायिक नहीं है.'

क्या कहते हैं आंकड़े?
इन सबके बीच अगर आंकड़ों की बात करें तो साल 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कुल 89 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से 60 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वही कांग्रेस ने 122 सीटों पर चुनाव लड़ा था और वह सिर्फ 26 सीटों तक सिमट कर रह गई. बीजेपी का वोट पर्सेंटेज साल 2016 के चुनाव में 42.12 फीसदी था जबकि कांग्रेस 32.06 तक ही सिमट गई थी. बात असम गम परिषद की करें तो उसने 30 सीटों पर चुनाव लड़कर 14 पर जीत हासिल की और 33.37 फीसदी वोट मिले. वहीं एआईयूडीएफ ने 74 सीटों पर चुनाव लड़कर 13 सीटें जीती और उनका वोट प्रतिशत 21.34 फीसदी था.

साल 2019 के लोकसभा चुनावों का संदर्भ लें तो राज्य में तो भाजपा ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की और 36.41 फीसदी वोट मिले. वहीं कांग्रेस को 3 सीट पर जीत मिली और उसके हिस्से कुल 35.79 फीसदी वोट आए. एआईयूडीएफ के खाते में 1 लोकसभा सीट आई और उसे 7.87 फीसदी वोट मिले. कांग्रेस को इस लोकसभा चुनाव में 5.84 फीसदी ज्यादा मिले थे. वहीं एआईयूडीएफ को वोट प्रतिशत में 7 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई थी. दूसरी ओर बीजेपी को वोट प्रतिशत में 0.45 फीसदी की कमी आई थी.

असम में तीन चरण में चुनाव
उत्तर-पूर्व के सबसे बड़े राज्य असम में तीन चरणों में विधानसभा चुनाव संपन्न कराए जाएंगे. राज्य में 27 मार्च को पहले चरण में 47 सीटों पर वोटिंग होगी. इसके बाद 1 अप्रैल को 39 सीटों पर दूसरे चरण और 6 अप्रैल को तीसरे चरण में 30 सीटों पर वोटिंग होगी. यहां भी काउंटिंग 2 मई को की जाएगी.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज