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OPINION: असम में मोदी को क्यों है दूसरी बार सरकार बनने का भरोसा?

असम के बोकाघाट में एक चुनावी रैली को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (BJP4India Twitter/21 March 2021)

असम के बोकाघाट में एक चुनावी रैली को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (BJP4India Twitter/21 March 2021)

Assam Assembly Election 2021: राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी बड़े नेता मोदी सरकार पर पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें आसमान पर ले जाने का आरोप लगाकर घेर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 21, 2021, 5:29 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी असम में दोबारा अपनी सरकार बनने का दावा कर रही है और इसके लिए पूरी पार्टी ने ताकत भी लगा रखी है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को असम के बोकाखाट में चुनावी रैली को संबोधित किया. पश्चिम बंगाल की चुनावी रैलियों में जिस तरह मोदी खास तौर पर तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी पर हमले करते हैं, वहीं असम में उनके निशाने पर कांग्रेस रहती है. एक अहम बात और समझ में आती है कि चुनावी मौसम में पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के केंद्रीय नेता उतनी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं, जितनी कि असम में लेते नजर आ रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ममता बनर्जी की सरकार को इस बात के लिए कोसते हैं कि उसने केंद्र की कई जन-कल्याणकारी योजनाएं लागू नहीं कीं, वहीं असम में वे केंद्र की योजनाएं लागू किए जाने के फायदे गिनाते हैं. डबल इंजन की सरकार के फायदे वे पश्चिम बंगाल की तरह असम में भी गिनाते हैं. मोदी ने कहा कि असम में दशकों तक हिंसक माहौल में लोग परेशान रहे, लेकिन जबसे एनडीए सरकार को काम करने का मौका मिला है, तबसे वहां शांति है. सीएए कानून और एनआरसी के मुद्दे पर पिछले दिनों बने हिंसक माहौल के इतर अगर देखें, तो प्रधानमंत्री का यह दावा सही लगता है.

हर घर जल पहुंचाने का वादा
बोकाखाट की रैली में प्रधानमंत्री ने मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन, मुफ्त इलाज, बिजली और शौचालय के साथ ही पीएम आवास का जिक्र तो किया ही, यह वादा भी किया कि एनडीए की सरकार दोबारा बनेगी, तो हर घर जल पहुंचाने का काम प्राथमिकता से किया जाएगा. उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की बात करते हुए ब्रह्मपुत्र नदी पर पुलों के निर्माण का उल्लेख किया. प्रधानमंत्री ने असम के लोगों के जीवन में खुशहाली लाने की बात तो की ही, काजीरंगा नेशनल पार्क में गैंडों की सुरक्षा का जिक्र भी खास तौर पर किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में काजीरंगा की शान वहां के गैंडों का काफी शिकार होता था, लेकिन एनडीए की सरकार ने शिकारियों पर शिकंजा कस कर उन्हें जेल में डाला है.
असम में बांस की बात


आम तौर पर चुनावी सभाओं में पर्यावरण जैसे आधारभूत मुद्दों पर चर्चा कम ही होती है, लेकिन मोदी ने बोकाखाट में एनडीए सरकार की पर्यावरण सुधारने के प्रति प्रतिबद्धता का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि देश के अभयारण्य और दूसरे वन क्षेत्र धरोहर तो हैं ही, रोजी-रोटी के साधन भी मुहैया कराते हैं. बीते पांच साल में असम में जंगलों में वृद्धि हुई है. मोदी ने जिस एक और बात का जिक्र किया, कम ही लोग उस बारे में जानते होंगे. उन्होंने बताया कि 90 साल पहले अंग्रेजों ने बाकायदा कानून बना कर बांस को वृक्ष घोषित कर दिया था. हम जानते हैं कि बांस एक तरह की घास होती है. लिहाजा जब कानूनन उसे वृक्ष घोषित कर दिया गया, तो निजी जमीन पर उगे बांसों को काटने और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में दिक्क़त होने लगी. मोदी ने कहा कि एनडीए की सरकार ने असम के लोगों की यह व्यावहारिक समस्या समझी और कानून बदल दिया. इससे बांस उगाने वाले और उनका व्यापार करने वाले लाखों लोगों को फायदा हुआ.

बिना नाम लिए राहुल पर निशाना
राहुल गांधी समेत कांग्रेस के सभी बड़े नेता मोदी सरकार पर पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें आसमान पर ले जाने का आरोप लगाकर घेर रहे हैं. मोदी ने बोकाखाट की रैली में बिना उनका नाम लिए उन्हें जवाब देने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय पेट्रोलियम और उससे जुड़े उद्योगों की तमाम संभावनाओं वाले असम में कांग्रेस सरकारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया. मोदी ने दावा किया कि गत छह साल के दौरान असम में सिर्फ तेल और गैस के क्षेत्र में 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया गया है. बात असम की हो और चाय बागानों का जिक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है. कांग्रेस नेता भी चाय बागानों में काम करने वालों के लिए लुभावने वादे कर रहे हैं, तो फिर मोदी कैसे पीछे रह सकते हैं.

'कांग्रेस को चाहिए हर कीमत पर सत्ता'
उन्होंने कहा कि चाय जनजाति के साथियों और इस जनजाति से निकली महान विभूतियों को स्वाभिमान भरा जीवन देने के लिए एनडीए प्रतिबद्ध है. उन्होंने वादा दोहराया कि चाय बागानों में काम करने वालों का मेहनताना बढ़ाया जाएगा. मोदी ने कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र को भी झूठ का पिटारा करार दिया. उनकी दलील थी कि बहुत दिनों से सत्ता से दूर रहने के कारण कांग्रेस का खजाना खाली हो गया है, लिहाजा पार्टी किसी भी कीमत पर सत्ता चाहती है, भले ही इसके लिए उसे झूठे वादों की झड़ी क्यों न लगानी पड़े.

असम में त्रिकोणीय मुकाबला
बीजेपी जिस तरह देश में अवैध घुसपैठ का जिक्र पश्चिम बंगाल में खुल कर करती है, वैसा असम की रैलियों में नहीं होता, लेकिन बोकाखाट की रैली में प्रधानमंत्री ने घुसपैठ का मुद्दा उठाया. साफ है कि उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर यही संदेश देने का प्रयास किया कि देशहित के मुद्दे उनके लिए सबसे पहले हैं. असम में इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं. एनडीए में बीजेपी, एजीपी और यूपीपीएल शामिल हैं.

गूंज रहा CAA का मुद्दा
कांग्रेस गठबंधन में मुस्लिम जनाधार के समर्थन का दावा करने वाली एआईयूडीएफ, बीपीएफ, आंचलिक गण परिषद, सीपीआई और सीपीएम शामिल हैं. बीपीएफ पहले बीजेपी के साथ थी, लेकिन अब उसने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है. इसके अलावा पिछले दिनों सीएए के विरोध के लिए बना गठबंधन भी चुनाव मैदान में है. इसमें रायजोर दल यानी आरडी और असम जातीय परिषद यानी एजेपी पार्टियां शामिल हैं.

हिंदुत्ववादी कार्ड का फायदा
असम में करीब 19 लाख विदेशी बसे हुए हैं, इनमें से ज्यादातर बांग्लादेश से घुसपैठ कर आए हैं. असम में बीजेपी को हिंदुत्ववादी कार्ड का फायदा मिला है. इस बार भी उसे जीत की उम्मीद इसी वजह से है. बीजेपी की पकड़ अगर दूसरी बार भी असम पर मजबूत होती है, तो इससे पूरे पूर्वोत्तर में उसका परचम लहराने में मदद मिलेगी. बीजेपी को वहां दो गठबंधनों को चुनौती देनी है. क्योंकि दोनों गठबंधनों के मुद्दे करीब-करीब एक जैसे हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को ही नुकसान पहुंचाएंगे. ऐसे में बीजेपी को बढ़त मिलने की पूरी संभावना है.

लेकिन अगर कांग्रेस मुस्लिम हितों की ही राजनीति करने वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट से पल्ला झाड़ लेती है, तो दोनों गठबंधन एक हो सकते हैं. ऐसी सूरत में भी असम में मुस्लिम वोट बंटने के ही आसार हैं, इस वजह से बीजेपी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है.

*ये लेखक के निजी विचार हैं.
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