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Assam Election: कांग्रेस को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुंचा पाएगा लोअर असम? इतिहास में छुपी उम्मीद

 यहां से वरिष्ठ मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा, उनके पांच कैबिनेट सहयोगियों और राज्य भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास समेत 337 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं.

यहां से वरिष्ठ मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा, उनके पांच कैबिनेट सहयोगियों और राज्य भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास समेत 337 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं.

Assam assembly Election: लोअर असम एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले मुख्य विपक्षी गठबंधन (या महाजोत) को राज्य में हर चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से अधिक वोट मिले हैं, चाहे वह विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव.

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(आशीष रंजन)

गुवाहाटी. असम में विधानसभा चुनाव (Assam assembly Election) के अंतिम चरण में 40 सीटों के लिए आज वोट डाले जा रहे हैं. ये इलाके लोअर असम के हैं. यहां से वरिष्ठ मंत्री हेमंत बिस्वा सरमा, उनके पांच कैबिनेट सहयोगियों और राज्य भाजपा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास समेत 337 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं. यहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं. सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस की अगुआई वाले विपक्षी दलों के गठबंधन के लिए ये चरण बेहद अहम है. आईए एक नज़र डालते हैं कि यहां के चुनावी समीकरण किस तरह के हैं.

बोगंगईगांव में एक व्यापारी ने बताया कि वो पेट्रोल की कीमतों से परेशान हैं. इसके अलावा वो इस बात को लेकर भी नाराज़ हैं कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने GST को ठीक तरीके से लागू नहीं किया. लेकिन उनके पास कोई विकल्प नहीं है और वो बीजेपी समर्थित असम गण परिषद को ही वोट देंगे. जब उन्हें समझाने के लिए कहा जाता है तो वो कहते हैं. 'अगर कांग्रेस गठबंधन सत्ता में आता है, तो मुल्ला हम पर शासन करेंगे.'



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ध्रुवीकरण की राजनीति
अगर देखा जाए तो ये भाषा वोटों के ध्रुवीकरण की है. लोअर असम में इन दिनों हर तरफ ऐसे ही हालात हैं. मौजूदा सरकार ने कितना अच्छा या खराब काम किया है लोग ये नहीं देख रहे हैं. बल्कि लोग धर्म के आधार पर वोट देने की बात कर रहे हैं. हिंदू बीजेपी को वोट देने वाले हैं जबकि मुसलमान कांग्रेस गठबंधन के साथ हैं. यहां बहुत ही कम लोग चुनाव प्रचार और पार्टियों की वादों की बात कर रहे हैं.

लोअर असम में किसका पलड़ा भारी?
लोअर असम एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां कांग्रेस के नेतृत्व वाले मुख्य विपक्षी गठबंधन (या महाजोत) को राज्य में हर चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से अधिक वोट मिले हैं, चाहे वह विधानसभा हो या लोकसभा चुनाव. लोअर असम में मुस्लिम आबादी बहुत अधिक है, इसके बाद बोडो-कचारी जैसे जातीय समुदाय भी हैं. कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल के अखिल भारतीय यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) यहां अलग-अलग चुनाव लड़ रहे थे. तब भाजपा ने इस क्षेत्र में कुछ सीटें जीती थीं. उदाहरण के लिए, बिलासिपारा पूर्व में, भाजपा ने 2016 में 35 प्रतिशत वोटों के साथ सीट जीती थी, जबकि कांग्रेस और AIUDF का संयुक्त वोट प्रतिशत 58 था. एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि राज्य में भाजपा के वर्चस्व के बावजूद, 2016 के चुनाव में लोअर असम की 40 विधानसभा सीटों में से 15 पर एनडीए जीत नहीं सकी. इसी तरह, 2019 के लोकसभा चुनावों में, एनडीए सिर्फ 12 विधानसभा सीटों पर आगे थी.

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लोअर असम की राजनीति
इस विधानसभा चुनाव में, बोडोलैंड क्षेत्र, मुख्य रूप से उत्तरी असम में ब्रह्मपुत्र नदी के निचले इलाके में स्थित है, जिसमें कोकराझार, चिरांग, दारंग, बोंगाईगांव, बक्सा, नलबाड़ी और उदगुरु शामिल हैं, जो नई सरकार के गठन में निर्णायक भूमिका निभाएंगे. असम में सरकार इस चुनाव से पहले, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) इस क्षेत्र का एकमात्र राजनीतिक दल था. हालांकि, 2020 के बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) के चुनाव में यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (UPPL) बीजेपी का सहयोगी दल है.

मुस्लिम बनाम बोडो
हालांकि इस क्षेत्र में बोडो और मुसलमानों के बीच हिंसक झड़प होती रही है. दोनों समुदायों के बीच तनाव रहा है. 2012 में ये आरोप लगाया गया था कि बोडो ने गोसाईगांव में मुसलमानों के घरों को जला दिया. ये घटना असम में टर्निंग प्वाइंट साबित हुई. इस घटना के बाद से कई लोग मानते हैं कि एआईयूडीएफ मुसलमानों का समर्थन करते हैं. जबकि बोडो बीपीएफ के साथ है. पिछले दो विधानसभा चुनावों में, बीपीएफ ने सभी 12 सीटें जीतीं. इस बार भी, पार्टी सभी 12 सीटों पर चुनाव लड़ रही है (हालांकि, अंतिम नामांकन के बाद एक उम्मीदवार ने समर्थन किया) महाजोत के सहयोगी के रूप में.
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