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Assam Assembly Elections: पहले चरण के मतदान से होगा असम सरकार का रास्ता साफ

पहले चरण के मतदान से होगा असम सरकार का रास्ता साफ

पहले चरण के मतदान से होगा असम सरकार का रास्ता साफ

Assam Assembly Elections 2021: पिछले चुनाव (Election) के दौरान बीजेपी (BJP) इस पहले चरण में अपने तत्कालीन सहयोगी असम गण परिषद के साथ मिलकर 35 सीटें जीतने में कामयाब हो गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 8:22 PM IST
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गुवाहाटी. असम (Assam) में दोबारा सरकार बनाने की जंग में जुटी बीजेपी (BJP) के लिए शनिवार को होने वाले पहले चरण के मतदान (Voting) में बड़ी सफलता पाना जरूरी है. बीजेपी ने पहले चरण की ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने के लिए पूरा जोर लगा दिया है. वहीं, अगर विपक्ष का महाजोत (महागठबंधन) बीजेपी को इस चरण में कुछ हद तक रोक पाने में सफल हो पाया, तभी वो चुनाव में बना रह सकता है. पहले चरण में राज्य की कुल 126 सीटों में से 47 पर मतदान होता है.

कहा जाता है कि राज्य में पहले चरण की सीटें ही सूबे की सरकार का रास्ता साफ करती है. पिछले चुनाव के दौरान बीजेपी इस पहले चरण में अपने तत्कालीन सहयोगी असम गण परिषद के साथ मिलकर 35 सीटें जीतने में कामयाब हो गई थी. जिसने राज्य में पंद्रह साल से काबिज कांग्रेस की तरुण गोगोई सरकार को बाहर का रास्ता दिखा दिया था. 2019 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी को इन सीटों पर बड़ी सफलता मिली थी. अगर विधानसभा सीटों के हिसाब से देखा जाए तो बीजेपी और उसके सहयोगी लोकसभा चुनाव के दौरान करीब 40 विधानसभा सीटों पर विपक्षियों से आगे थे.

बीजेपी के लिए पहला चरण कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीजेपी के स्टार प्रचारक और देश के गृहमंत्री अमित शाह मतदान के एक दिन पहले असम में ही प्रचार पर हैं. हालांकि पहले चरण की सीटों का प्रचार समाप्त हो चुका है, लेकिन उनके असम में होने का कुछ असर तो आखिरी दौर में वहां भी पहुंचेगा.
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असम में 62 फीसदी आबादी हिंदू मतदाता हैं
असम में 2011 की जनसंख्या के मुताबिक करीब 62 फीसदी आबादी हिंदू मतदाताओं की और 34 फीसदी से कुछ ज्यादा आबादी मुसलिम मतदाताओं की है. लेकिन इस आबादी को सिर्फ हिंदू और मुसलिम मतदाताओं के नजरिए से देखना भूल होगा. असमिया लोग अपनी भाषा, संस्कृति, जातीयता को लेकर बेहद संवेदनशील हैं. इसी कारण राज्य में सीएए और एनआरसी को लेकर काफी बवाल भी हुआ था. कांग्रेस ने पूरे चुनाव के दौरान जोर-शोर से सीएए के मुद्दे को हवा दी और यहां तक दावा किया कि सत्ता में आने पर वो राज्य में सीएए को लागू नहीं होने देगी. कांग्रेस के इस दांव की काट करते हुए बीजेपी ने संकल्प पत्र में एनआरसी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि दोबारा से सत्ता में आने पर वो सही तरीके से एनआरसी लेकर आएगी.

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पहले चरण में ऊपरी आसाम, उत्तरी आसाम के इलाकों में चुनाव होना
राज्य की सर्बानंद सोनोवाल सरकार पुरजोर तरीके से 2019 में आई एनआरसी लिस्ट का विरोध कर रही है, जिसमें 19 लाख लोग शामिल थे. इनमें बड़ी संख्या में हिंदू आबादी भी थी. पार्टी का कहना है कि सत्ता में आने पर वो NRC का CORRECTED VERSION लेकर आएगी. पहले चरण में ऊपरी आसाम, उत्तरी आसाम के इलाकों में चुनाव होना है. राज्य में भले ही देश में सर्वाधिक मुसलिम आबादी है, लेकिन इन इलाकों में हिंदु मतदाताओं की संख्या बहुतायात में है. बीजेपी को लग रहा है कि वो इस बार पिछले चुनाव से भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे. असम बीजेपी प्रवक्ता प्रमोद स्वामी का कहना है कि बीजेपी इस बार पहले चरण में अधिकांश सीटे जीतेगी और विपक्ष का यहां खाता भी नहीं खुलेगा. कांग्रेस ने बदरुद्दीन अजमल के साथ गठबंधन कर सांप्रदायिक राजनीति का खेल खेला है. राज्य की जनता अच्छी तरह से समझ रही है और उसे इसका सही जवाब दो मई को मिलेगा, जब इनका सूपड़ा साफ हो जाएगा.
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