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असम के मंत्री ने कहा, NRC का काम अभी अधूरा; हिंदुओं के लिए न्याय की जरूरत

बहुमुखी राजनीतिज्ञ के तौर पर हेमंत बिश्व सरमा उत्तर पूर्व में बीजेपी के प्रमुख संकटमोचक हैं.
बहुमुखी राजनीतिज्ञ के तौर पर हेमंत बिश्व सरमा उत्तर पूर्व में बीजेपी के प्रमुख संकटमोचक हैं.

असम (Assam) सरकार के मंत्री हेमंत बिस्ब सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने आरोप लगाते हुए कहा कि एनआरसी का काम काफी पहले हो जाता लेकिन पूर्व समन्वयक प्रतीक हजेला की वजह से ये काम अभी भी अधूरा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 25, 2020, 11:34 AM IST
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गुवाहाटी. असम (Assam) में अगले कुछ महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों (Assembly Election) से पहले राष्ट्रीय नागरिक पंजी (National Civil Register) को लेकर बहस फिर तेज हो गई है. पश्चिम बंगाल में बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बाद अब असम सरकार के मंत्री हेमंत बिस्ब सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा है कि जल्द ही एनआरसी लाया जा सकता है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि राज्य में राष्ट्रीय नागरिक पंजी का काम अभी अधूरा है. उन्होंने कहा कि बराक घाटी क्षेत्र में रहने वाले हिंदुओं के साथ न्याय किए जाने की जरूरत है. बता दें कि सरमा को पूर्वाेत्तर में बीजेपी का संकटमोचक माना जाता है. सरमा ने आरोप लगाते हुए कहा कि एनआरसी का काम काफी पहले हो जाता लेकिन पूर्व समन्वयक प्रतीक हजेला की वजह से ये काम अभी भी अधूरा है.

​करीमगंज जिले की बराक वैली में एक बैठक के दौरान हेमंत बिस्ब सरमा ने कहा, 'हमने बराक वैली के हिंदुओं को न्याय का वादा किया है. प्रतीक हजेला की वजह से एनआरसी का काम अभी भी लटका पड़ा है.' उन्होंने कहा, 'एनआरसी पर हमारी तरफ से लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. हमें हिंदुओं को न्याय दिलाने के लिए कुछ और काम करने की जरूरत है.' उन्होंने कहा, 'मां भारती को मानने वाले हजारों लोग अब भी डिटेंशन कैंप में हैं.'

असम एनआरसी की अंतिम सूची पिछले साल अगस्त में जारी की गई थी. इस दौरान असम के करीब 3.3 करोड़ आवेदनकर्ताओं में से 19.22 लाख लोगों को सूची से बाहर कर दिया गया था. अंतिम एनआरसी के प्रकाशन के बाद अनेक पक्षों और राजनीतिक दलों ने इसे दोषपूर्ण दस्तावेज बताते हुए इसकी आलोचना की थी. उन्होंने इसमें से मूल निवासियों को हटाये जाने तथा अवैध प्रवासियों को शामिल करने का आरोप लगाया था.
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असम के संसदीय कार्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने इस साल 31 अगस्त को विधानसभा में कहा था कि राज्य सरकार ने बांग्लादेश की सीमा से सटे जिलों में 20 प्रतिशत नाम और बाकी हिस्से में 10 प्रतिशत नामों के पुन: सत्यापन के लिए उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल किया है.
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