Assam NRC: फाइनल लिस्ट पर असम BJP को भरोसा नहीं, कांग्रेस ने कहा- हर वर्ग है नाराज

भाषा
Updated: August 31, 2019, 9:39 PM IST
Assam NRC: फाइनल लिस्ट पर असम BJP को भरोसा नहीं, कांग्रेस ने कहा- हर वर्ग है नाराज
शनिवार को अंतिम एनआरसी की लिस्ट को ऑनलाइन जारी किया गया. 19,06,657 आवेदकों के नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं हैं.

असम (Assam) में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कहा कि वह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Citizenship Register) की फाइनल लिस्ट पर भरोसा नहीं करती है.

  • Share this:
असम (Assam) में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कहा कि वह राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (National Citizenship Register) की फाइनल लिस्ट पर भरोसा नहीं करती है. पार्टी ने केन्द्र और राज्य सरकारों से राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी तैयार किये जाने का अनुरोध किया.

भाजपा असम (Assam BJP) के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एनआरसी की अंतिम सूची में आधिकारिक तौर पर पहले बताये गये आंकड़ों की तुलना में बाहर किये गये लोगों की बहुत छोटी संख्या बताई गई है.

'हमें एनआरसी पर भरोसा नहीं'
उन्होंने कहा, ‘‘हम इस एनआरसी पर भरोसा नहीं करते हैं. हम बहुत नाखुश हैं....हम केंद्र और राज्य सरकारों से राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी (NRC) तैयार किये जाने की अपील करेंगे.’’ दास ने कहा कि पार्टी बाहर किये गये लोगों द्वारा फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (एफटी) में अपील किये जाने की प्रक्रिया और मामलों के फैसलों पर करीबी नजर रखेगी.



उन्होंने कहा, ‘‘यदि एफटी वास्तविक भारतीयों के खिलाफ प्रतिकूल आदेश देते हैं तो हम पूरे 19 लाख मामलों के निस्तारण की प्रतीक्षा नहीं करेंगे. हम कानून लायेंगे और उन्हें सुरक्षित बनाने के लिए काम करेंगे.’’

कांग्रेस बोली हर वर्ग नाराज़
Loading...

वहीं कांग्रेस (Congress) ने कहा कि एनआरसी की मौजूदा स्थिति से राज्य का हर वर्ग नाराज है और देश के वास्तविक नागरिकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. एनआरसी की अंतिम सूची आने के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर इस मुद्दे को लेकर बैठक हुई जिसमें पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ नेता शामिल हुए.

एनआरसी के बाद से ही असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में तनाव


बैठक के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) ने कहा कि देश के वास्तविक नागरिकों के हितों की रक्षा होनी चाहिए. लोकसभा में पार्टी के नेता चौधरी ने कहा, 'देश के वास्तविक नागरिकों के हितों की सुरक्षा होनी चाहिए और उन्हें एनआरसी में शामिल किया जाना चाहिए.

कांग्रेस ने लगाया लापरवाही का आरोप
असम से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई ने कहा, " असम का हर वर्ग एनआरसी की स्थिति से नाराज है. भाजपा के मंत्री शिकायत कर रहे हैं. लापरवाही से क्रियान्वयन के कारण भारत के बहुत सारे वास्तविक नागरिकों को भी अदालतों का सामना करना होगा. कांग्रेस सबकी मदद करेगी. राजनीति से ऊपर देश हमारा लक्ष्य है.'



पूर्वोत्तर से ताल्लुक रखने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता मुकुल संगमा (Mukul Sangma) ने कहा, 'जैसा कि आप सभी जानते हैं कि एनआरसी असम करार के तहत किया जा रहा काम है. हमारी पार्टी का रुख एकदम स्पष्ट है कि वास्तविक भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा होनी चाहिए.'

आसू करेगी सुप्रीम कोर्ट का रुख
वहीं ऑल असम स्टुडेंट्स यूनियन (Assam Students Union) ने कहा है कि वह अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से बाहर रखे गये नामों के आंकड़े से खुश नहीं है. आसू (Asu) ने इसमें सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का निर्णय किया है. वर्ष में 1985 में हुए असम समझौते में आसू एक पक्षकार है जिसमें असम में रह रहे अवैध विदेशियों को पहचानने, हटाने और निकालने का प्रावधान है.

असम में एनआरसी को अपडेट करने का काम सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में किया जा रहा है ताकि केवल वास्तविक भारतीयों को ही शामिल किया जाए.

एक ही परिवार में कुछ लोगों का नाम तो इस लिस्ट में है जबकि कई सदस्यों का नाम लिस्ट में नहीं है


आसू के महासचिव ल्यूरिनज्योति गोगोई ने कहा, ‘‘हम इससे बिल्कुल खुश नहीं हैं. ऐसा लगता है कि अद्यतन प्रक्रिया में कुछ खामियां हैं. हम मानते हैं कि एनआरसी अपूर्ण है. हम एनआरसी की खामियों को दूर करने के लिए उच्चतम न्यायालय से अपील करेंगे.’’

गोगोई ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अंतिम आंकड़े कई मौकों पर प्रशासन की ओर से घोषित आंकड़ों से मेल नहीं खाते. आसू के अध्यक्ष दीपांकर कुमार नाथ ने दावा किया कि केंद्र और राज्य सरकार के पास अवैध अप्रवासियों का पता लगाने की पर्याप्त गुंजाइश थी लेकिन वह अपनी निष्क्रियता की वजह से असफल रही.

'अवैध बांग्लादेशी अप्रवासियों को बाहर नहीं किया गया'
नाथ ने दावा करते हुए कहा,‘‘ हमने एनआरसी में नाम दर्ज कराने के लिए केवल 10 दस्तावेजों को ही वैध मानने की मांग की थी लेकिन सरकार ने 15 दस्तावेजों की अनुमति दी. सरकार ने एनआरसी प्रक्रिया में शामिल संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी अप्रवासियों को लेकर भी आपत्ति नहीं जताई जिससे उन्हें प्रक्रिया से बाहर किया जा सकता था.’’

आसू अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और उसकी सीमा पुलिस ने संदिग्ध अवैध प्रवासियों के मामलों को विदेशी अधिकरण को नहीं भेजा और प्रशासन एनआरसी की प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों का तबादला करता रहा. उन्होंने कहा, ‘‘असम और केंद्र सरकार त्रृटिमुक्त एनआरसी बनाने में असफल रही और इस तरह उसने एक ऐतिहासिक मौका खो दिया.’’



आसू के प्रमुख सलाहकार समुज्जल कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि संगठन उपचारी उपाय के लिए उच्चतम न्यायलय का रुख करेगा और वह इस एनआरसी की खामियों को दूर करने पर फैसला करेगा. उन्होंने कहा कि एनआरसी पर भविष्य का काम भी शीर्ष अदालत की निगरानी में होनी चाहिए.

शनिवार को अंतिम एनआरसी को ऑनलाइन जारी किया गया. इससे 19,06,657 आवेदकों के नाम बाहर हैं. पिछले साल 30 जून को जारी एनआरसी के पूर्ण मसौदे में 40 लाख लोगों के नाम बाहर थे. इस साल जून में और 1,02,462 लोगों के नाम बाहर कर दिए गए थे.

ये भी पढ़ें-
NRC: बाहर हुए 19 लाख लोगों के पास बचे 120 दिन, करना होगा ये

NRC: SC में याचिका दाखिल करने वाले NGO ने उठाए लिस्ट पर सवाल

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 31, 2019, 9:05 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...