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असम: CM सरमा बोले- हिंसा के बाद भी सिपझार में जारी रहेगा अतिक्रमण हटाओ अभियान

सीएम बी सरमा ने कहा कि उस क्षेत्र में शांतिपूर्ण निष्कासन अभियान पर सहमति बनी, लेकिन सवाल ये उठता है लोगों को उकसाया किसने?

सीएम बी सरमा ने कहा कि उस क्षेत्र में शांतिपूर्ण निष्कासन अभियान पर सहमति बनी, लेकिन सवाल ये उठता है लोगों को उकसाया किसने?

Assam News: दरांग जिले में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस की स्थानीय लोगों के साथ भिड़ंत हो गई थी, जिसमें पुलिस फायरिंग में इन लोगों की जान गई. करीब दो दर्जन लोग इस घटना में घायल भी हुए हैं. हिंसा के फुटेज में एक व्यक्ति एक गतिहीन व्यक्ति को मारते हुए कैमरा मार रहा है.

  • News18Hindi
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    गुवाहाटी. असम के सिपझार में गुरुवार को हुए बवाल पर मुख्यमंत्री हिमंत बी सरमा (Assam CM Himanta B Sarma) ने कहा कि आप एक वीडियो से राज्य सरकार को नीचा नहीं दिखा सकते. 1983 से वह इलाका हत्याओं के लिए जाना जाता है. नहीं तो आम तौर पर लोग मंदिर की जमीन पर कब्जा नहीं करते मैंने चारों तरफ अतिक्रमण देखा है. सीएम बी सरमा ने कहा कि उस क्षेत्र में शांतिपूर्ण निष्कासन अभियान पर सहमति बनी, लेकिन सवाल ये उठता है लोगों को उकसाया किसने?

    इस सवाल पर कि क्या सिपाझार में अतिक्रमण हटाने का अभियान अब भी जारी रहेगा, सरमा ने कहा कि हमें इसे जारी रखना होगा. हम बिना आधार के 30-40 एकड़ जमीन आवंटित नहीं कर सकते, बाकी लोग कहां जाएंगे? लेकिन हां, इसे लेकर मैं उनके साथ एक बार फिर बातचीत करूंगा. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि लोगों को एक स्थान से हटाने के काम में पुलिस को शामिल करना महत्वपूर्ण नहीं है, बातचीत से भी मदद मिलती है.

    4 महीने से किया जा रहा है विचार-विमर्श
    न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि इस अभियान के लिए चार महीने से विचार-विमर्श किया जा रहा था. इसे लेकर कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुझसे मुलाकात की थी और ऐसे लोगों को भूमि आवंटित करने को लेकर सहमति जताई थी जिनके पास कोई जमीन नहीं है. 27 हजार एकड़ जमीन का हमें उत्पादक उपयोग करना है. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वहां पर एक मंदिर था लेकिन उस पर भी अतिक्रमण कर लिया गया था.

    दरअसल, गुरुवार को जिले में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस की स्थानीय लोगों के साथ भिड़ंत हो गई थी, जिसमें पुलिस फायरिंग में इन लोगों की जान गई. करीब दो दर्जन लोग इस घटना में घायल भी हुए हैं. हिंसा के फुटेज में एक व्यक्ति एक गतिहीन व्यक्ति को मारते हुए कैमरा मार रहा है. अपराधी की पहचान बिजय शंकर बनिया के रूप में हुई, जो एक पेशेवर फोटोग्राफर था, जिसे जिला प्रशासन ने स्थिति का दस्तावेजीकरण करने के लिए काम पर रखा था.

    बनिया को गिरफ्तार कर लिया गया. राज्य सरकार ने जनता के बढ़ते गुस्से के बीच घटना की परिस्थितियों की न्यायिक जांच की घोषणा की. गृह एवं राजनीतिक विभाग के सचिव देवप्रसाद मिश्रा की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि सरकार ने फैसला किया है कि जांच गुवाहाटी उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जाएगी.

    क्या है पूरा मामला?
    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के मुताबिक, एक ग्रामीण पुलिस की ओर लाठी लेकर भागता दिख रहा है. इसके बाद पुलिस की कई बंदूकें और लाठी उसकी ओर तन जाती हैं. एक गोली लगते ही ग्रामीण नीचे गिर जाता है और फिर कई पुलिसवाले शख्स पर लाठियां बरसाकर उसे अधमरा कर देते हैं. इसके बाद भी कई पुलिसवाले घायल शख्स पर लाठियां बरसाते रहते हैं. कानून के इन पहरेदारों के बीच कैमरामैन आगे बढ़ता है और जमीन पर बेसुध हो चुके शख्स के सीने पर कूद जाता है, उसकी गर्दन को घुटने से दबाता है और उसको मुक्के मारता है.

    इतना सब होने के बावजूद कानून की हिफाजत करने वाली पुलिस उसे बस वहां से चले जाने को कहती है. असम पुलिस की ये करतूत वायरल वीडियो के जरिए बाहर आई तो जवाब देना मुश्किल हो गया. बाद में हमला करने वाले कैमरामैन बिजॉय बोनिया को गिरफ्तार कर लिया गया. इस घटना की सीआईडी जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

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