NRC से हिंदुओं को बाहर रखने को लेकर प्रदर्शन, सीएम सोनोवाल ने विधायी विकल्पों का दिया भरोसा

हिंदू जागरण मंच (Hindu Jagran Manch) ने एनआरसी (NRC) में हिन्दुओं की बड़ी आबादी का नाम शामिल नहीं किए जाने की आशंका के चलते असम (Assam) में विरोध प्रदर्शन तेज कर दिए हैं.

News18Hindi
Updated: August 20, 2019, 2:57 PM IST
NRC से हिंदुओं को बाहर रखने को लेकर प्रदर्शन, सीएम सोनोवाल ने विधायी विकल्पों का दिया भरोसा
31 अगस्त को आएगा NRC, कमियां हुईं तो कदम उठाएगी सरकार: सोनोवाल.
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Updated: August 20, 2019, 2:57 PM IST
असम (Assam) के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल (Sarbananda Sonowal) ने सोमवार को संकेत दिया कि एनआरसी (NRC) के अंतिम प्रकाशन के बाद इसमें डाले गए कुछ नामों को बचाने के लिए सरकार विधायी विकल्पों पर विचार कर सकती है. सोनोवाल ने कहा कि असम सरकार सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के निर्देशानुसार 31 अगस्त को एनआरसी का प्रकाशन शांतिपूर्ण ढंग से किए जाने को सुनिश्चित करेगी.

हिंदुओं को बाहर रखने को लेकर प्रदर्शन
इससे पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने गुवाहाटी में एनआरसी समन्वयक के कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि सूची प्रकाशित होने से पहले रोल्स में शामिल करने के लिए प्रत्येक आवेदन की फिर से जांच हो. उनकी मुख्य मांग हिंदुओं को एनआरसी से बाहर रखने की है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू जागरण मंच ने अंतिम एनआरसी के प्रकाशन को स्थगित करने की मांग को लेकर भी हड़ताल की, ताकि 'कोई भी हिन्दू अवैध प्रवासी न निकले.' भाजपा विधायक शिलादित्य देव ने कहा, 'विभाजन के बाद यहां आए कई हिंदू पीड़ितों और उनके वंशजों को अंतिम सूची में बाहर रखने से असम की पहचान और संस्कृति पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा.'

एनआरसी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है.


सीएम सोनोवाल ने विधायी विकल्पों का दिया भरोसा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) से यहां मुलाकात के बाद उन्होंने संवाददाताओं को बताया, 'लोकतंत्र में हर किसी को सवाल पूछने का अधिकार है. एनआरसी के प्रकाशन के बाद, अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो जो भी जरूरी होगा हम वो कदम उठाएंगे.' सोनोवाल से पत्रकारों ने पूछा था कि क्या सरकार अंतिम एनआरसी में गलत तरीके से शामिल हो गए नामों से निपटने के लिये विधायी विकल्पों पर विचार करेगी.

असम के सीएम सर्बानंद सोनोवाल.

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने केंद्र और असम सरकार की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें गलत तरीके से नामों के शामिल होने की जांच के लिये नमूना पुनर्सत्यापन (Reverification) का अनुरोध किया गया था. सोनोवाल ने कहा कि 2018 में जब मसौदे का हिस्सा और अंतिम मसौदा प्रकाशित हुआ था तो असम में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर आशंकाएं थीं. उन्होंने कहा, 'असम के लोगों के सहयोग से लेकिन सब कुछ शांतिपूर्ण तरीके से हो गया. इस बार भी केंद्र सरकार के सक्रिय सहयोग से और लोगों की उम्मीदों के मुताबिक एनआरसी 31 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा.'

एनआरसी में बांग्लादेश से आए लोगों को बाहर रखने की बात कही गई है.


1951 में ही पहली बार एनआरसी को तैयार किया गया था
पिछले साल जुलाई में, 40 लाख से अधिक लोगों को एनआरसी के पूर्ण मसौदे से बाहर रखा गया था, जिसमें कुल 3,29,91,384 आवेदकों में से 2,89,83,677 पात्र लोग थे. अतिरिक्त व्यक्तियों की सूची में पिछले महीने एक अतिरिक्त 1,02,462 लोगों को शामिल किया गया था. दस्तावेज के पूर्ण मसौदे में कुल अयोग्य व्यक्तियों की संख्यां 41,10,169 तक पहुंची थी. असम को 20 वीं शताब्दी के शुरुआती सालों से बांग्लादेश के लोगों की आमद का सामना करना पड़ा था. वो एकमात्र ऐसा राज्य है जिसमें 1951 में ही पहली बार एनआरसी को तैयार किया गया था. सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की पीठ ने भी आधार डेटा की तरह कहा था, एनआरसी डेटा हासिल करने के लिए एक उचित शासन लागू किया जाना चाहिए.

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First published: August 20, 2019, 12:22 PM IST
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