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असम: आधार कार्ड लेने गया था 12 साल का फरीद, अतिक्रमण हटाने के दौरान झड़प में मौत

इस घटना की चौतरफा निंदा की जा रही है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई को राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित गोलीबारी करार दिया. (सांकेतिक तस्वीर)

इस घटना की चौतरफा निंदा की जा रही है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई को राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित गोलीबारी करार दिया. (सांकेतिक तस्वीर)

Assam Eviction Drive: राज्य सरकार ने इस घटना को लेकर जनता के बढ़ते गुस्से के मद्देनजर घटना की न्यायिक जांच की घोषणा की है. इस हिंसक झड़प के दौरान 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि कुल 20 लोग घायल भी हुए, जिसमें 11 पुलिसकर्मी शामिल हैं.

  • News18Hindi
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    गुवाहाटी. 12 साल का फरीद गुरुवार को बेहद खुश था. पहली बार उन्हें कोई पहचान पत्र मिला था. आधार कार्ड लेने के बाद वह पोस्ट ऑफिस से घर वापस लौट रहा था, लेकिन परिवार वाले उनका इंतज़ार करते रह गए. शाम को दिन ढलते ही उसकी डेड बॉडी घर के बाहर पड़ी थी. और उनकी जेब में वो आधार कार्ड भी लटक रहा था जिसका उन्हें बेसब्री से इंतज़ार था. सुबह की खुशी शाम को मातम में बदल गई. परिवार वालों को ये समझ नहीं आ रहा कि आखिर ये कैसे हो गया. बता दें कि असम (Assam Eviction Drive) के दरांग जिले के सिपाझार में पुलिस ने अतिक्रमणकारियों को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान गोलियां चलाईं, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. फरीद इनमें से एक था. पुलिस के साथ हुई झड़पों में अब तक करीब 20 लोग घायल हो गए है.

    फरीद चार भाई बहनों में सबसे छोटा था. उनका परिवार अतिक्रमण वाले इलाके से 2 किलोमीटर दूर रहता है. परिवार वालों का कहना है कि उन्हें अतिक्रमण को लेकर सरकार की तरफ से कोई नोटिस नहीं मिला था. अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत करते हुए फरीद के पिता खालेक अली ने कहा, ‘मेरा बेटा अपना आधार कार्ड पाने के लिए उत्साहित था. मुझे नहीं पता कि उसकी हत्या कैसे हुई.’

    छाती पर लगी गोली
    कहा जा रहा है कि पुलिस ने अतिक्रमणकारियों को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान गोलियां चलाईं. इसी हिंसा के दौरान फरीद फंस गया और उसे गोली लग गई. फरीद के पिता खालेक अली ने कहा कि जब उसकी डेड बॉडी घर लाई गई तो वो सब हैरान थे. फरीद की छाती के दाईं तरफ गोलियों के निशान थे. बता दें कि इस हिंसक झड़प के दौरान कुल 20 लोग घायल भी हुए, जिसमें 11 पुलिसकर्मी भी हैं.

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    घटना का वीडियो वायरल
    इस घटना में फरीद के अलावा 35 साल के मैनुल हक़ की भी मौत हो गई. इस बीच इस घटना का एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें छाती पर गोली के घाव के निशान वाले एक व्यक्ति को कैमरा लिए व्यक्ति पीटता हुआ दिखाई दे रहा है.

    न्यायिक जांच के आदेश
    राज्य सरकार ने इस घटना को लेकर जनता के बढ़ते गुस्से के मद्देनजर घटना की न्यायिक जांच की घोषणा की है. गृह और राजनीतिक विभाग के सचिव देबप्रसाद मिश्रा की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि सरकार ने फैसला किया है कि इस घटना की जांच गुवाहाटी उच्च न्यायालय के एक रिटायर्ड जज द्वारा की जाएगी.

    क्या है पूरा मामला?
    इस घटना की चौतरफा निंदा की जा रही है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई को राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित गोलीबारी करार दिया. लगभग 800 परिवारों के पुनर्वास की मांग को लेकर जनता का विरोध शुरू हो गया था, इन लोगों का दावा है कि जिस जमीन पर वे दशकों से रह रहे थे उससे उन्हें बेदखल कर दिया गया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के छोटे भाई और दरांग के पुलिस अधीक्षक सुशांत बिस्वा सरमा ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने धारदार हथियारों से पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों पर हमला कर पथराव भी किया.

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