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नागरिकता कानून का विरोध: असम के सरकारी कर्मचारी 18 दिसंबर को करेंगे काम का बहिष्‍कार

News18Hindi
Updated: December 15, 2019, 12:01 AM IST
नागरिकता कानून का विरोध: असम के सरकारी कर्मचारी 18 दिसंबर को करेंगे काम का बहिष्‍कार
असम में नागरिकता कानून का भारी विरोध हो रहा है (फाइल फोटो, PTI)

सदोउ असम कर्मचारी परिषद् (SAKP) के अध्यक्ष बसब कलिता (Basab Kalita) ने बताया कि पूरे राज्य में राज्य सरकार के सभी कर्मचारी (Employees) 18 दिसंबर को अपने कार्यालयों में नहीं जाएंगे.

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गुवाहाटी. असम सरकार (Assam Government) के कर्मचारियों (Employees) ने शनिवार को घोषणा की है कि वे 18 दिसंबर को नागरिकता कानून (Citizenship Act) का विरोध करते हुए काम नहीं करेंगे.

सदोउ असम कर्मचारी परिषद् (SAKP) के अध्यक्ष बसब कलिता (Basab Kalita) ने बताया कि पूरे राज्य में राज्य सरकार के सभी कर्मचारी 18 दिसंबर को अपने कार्यालयों में नहीं जाएंगे.

सदोउ असम कर्मचारी परिषद के प्रमुख बोले, 'कानून को वापस लिए जाने तक करेंगे विरोध'
बसब कलिता ने कहा, 'शुरुआत से ही हमने बिल का विरोध किया था और जब तक इस कानून को वापस नहीं ले लिया जाता, तब तक इसका विरोध करेंगे.' कलिता ने कहा, 'जब संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सदस्य पिछले साल मई में राज्य में इस बिल के बारे में लोगों की राय जानने के लिए आए थे, SAKP ने उन्हें इस बिल के बारे में आपत्तियां उठाते हुए एक ज्ञापन सौंपा था.'

SAKP ने AASU को 16 दिसंबर से होने वाले तीन दिनों के सत्याग्रह के लिए दिया समर्थन
बसब कलिता ने यह भी कहा, 'हमने AASU (ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन) को 16 दिसंबर से होने वाले उनके तीन दिनों के सत्याग्रह के लिए अपना समर्थन दिया है.'

11 दिसंबर को हुए स्टूडेंट्स के विरोध प्रदर्शन का भी सदोउ असम कर्मचारी परिषद ने समर्थन किया था. इस दौरान संगठन के कर्मचारी राज्य सचिवालय से 'NO CAB' (नागरिकता संशोधन विधेयक नहीं) की तख्तियां लिए हुए बाहर आ गए थे.उत्तर-पूर्व के राज्यों सहित देश के तमाम हिस्सों में नागरिकता कानून को लेकर हो रहे प्रदर्शन
बता दें कि नए नागरिकता कानून (Citizenship act 2019) के खिलाफ उत्तर-पूर्व के राज्यों, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित देश के तमाम हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी है. नए कानून के तहत, पाकिस्तान (Pakistan), बांग्लादेश (Bangladesh) और अफगानिस्तान (Afghanistan) से हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के जो सदस्य धार्मिक उत्पीड़न के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आ गए हैं, उन्हें अवैध प्रवासी नहीं समझा जाएगा और भारत की नागरिकता दी जाएगी.

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First published: December 14, 2019, 7:30 PM IST
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