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असम के मंत्री बोले-जिन्हें सिटीजनशिप बिल से आपत्ति, वे डिटेंशन कैंप में जाएं

News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 9:56 PM IST
असम के मंत्री बोले-जिन्हें सिटीजनशिप बिल से आपत्ति, वे डिटेंशन कैंप में जाएं
सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल पर असम में पहले भी बवाल मच चुका है. फोटो: एएनआई

हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा है कि ममता बनर्जी असल में ये कहना चाहती हैं कि वह तब इस बिल (Citizenship Amendment Bill) का विरोध नहीं करेंगी, जब इसमें मुस्लिमों को शामिल कर लिया जाए. हम चाहते हैं कि वह इस बात को खुलकर कहें.

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  • Last Updated: October 23, 2019, 9:56 PM IST
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गुवाहाटी: असम में सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल (CAB) का मुद्दा अब भी पूरी तरह ठंडा नहीं हुआ है. लोकसभा चुनावों से पहले इस मुद्दे पर पूर्वोत्तर भारत और खासकर असम में उग्र प्रदर्शन हुए थे. अब असम के मंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि जिन लोगों को सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल (Citizenship Amendment Bill) से दिक्कत है उन्हें डिटेंशन कैंप में भेज दिया जाएगा.

इस मुद्दे पर बीजेपी का सबसे मुखर विरोध पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने किया था. इसके अलावा दूसरे दलों ने भी इस बिल का विरोध किया था. अब हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा है कि ममता बनर्जी असल में ये कहना चाहती हैं कि वह तब इस बिल का विरोध नहीं करेंगी, जब इसमें मुस्लिमों को शामिल कर लिया जाए. हम चाहते हैं कि वह इस बात को खुलकर कहें.



क्या है सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल (CAB)
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यह विधेयक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी व ईसाइयों को, जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत आए हैं, या जिनके वैध दस्तावेजों की समय सीमा हाल के सालों में खत्म हो गई है, उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है. यह विधेयक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के छह गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के लोगों को भारतीय नागरिकता हासिल करने में आ रही बाधाओं को दूर करने का प्रावधान करता है.

मच चुका है इस बिल पर बवाल
इस विधेयक को लेकर असम और पूर्वोत्तर के दूसरे राज्यों में बड़ा बवाल मचा था. यहां तक कि मेघालय में एनडीए की सहयोगी पार्टी ने तो यहां तक धमकी दे दी है कि अगर दोबारा से सरकार ने इस बिल को आगे बढ़ाने की कोशिश की तो वह एनडीए से गठबंधन तोड़ लेंगे.

बता दें कि पिछली सरकार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की ओर से लोकसभा में रिपोर्ट पेश किए जाने के तुरंत बाद विधेयक को मंजूरी दे दी थी. लोकसभा में भी यह विधेयक पारित हो चुका था. लेकिन राज्यसभा में यह अटक गया.

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First published: October 23, 2019, 9:45 PM IST
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