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Assam-Mizoram Border Dispute: अंग्रेजों ने 5 बार बनाई सीमाएं, जानें कहां से शुरू हुआ असम-मिजोरम का विवाद

असम-मिजोरम के बीच सीमा विवाद पुराना है और इससे निपटने के लिए 1995 के बाद से कई वार्ताएं हुई, लेकिन इनका कोई फायदा नहीं हुआ.

असम-मिजोरम के बीच सीमा विवाद पुराना है और इससे निपटने के लिए 1995 के बाद से कई वार्ताएं हुई, लेकिन इनका कोई फायदा नहीं हुआ.

Assam Mizoram Dispute: आजादी के बाद उत्तर पूर्वी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को असम से अलग किया गया था. जिसके बाद साल 1963 में नगालैंड, साल 1972 में अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मिजोरम बने.

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    नई दिल्ली. असम और मिजोरम के बीच  165 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर विवाद  (Assam Mizoram Border Dispute) के केंद्र में दो सीमाएं हैं. यह दोनों ब्रिटिश काल से जुड़े हुए हैं. दोनों राज्यों में इस बात पर सहमति नहीं बना पा रहे हैं कि किस सीमा का पालन किया जाए. 19वीं शताब्दी के मध्य में ब्रिटिश चाय बागान कछार के मैदानों – बराक घाटी में आए. इसमें अब कछार, हैलाकांडी और करीमगंज जिले शामिल हैं. उनके विस्तार के कारण मिज़ो लोगों के साथ समस्याएं पैदा हुईं. मिजो लोगों का रिहायशी इलाका लुशाई हिल्स था. अगस्त 1875 में, कछार जिले की दक्षिणी सीमा को असम गजट में दिखाया गया. मिज़ो का कहना है कि 1875 में पांचवीं बार अंग्रेजों ने लुशाई पहाड़ियों और कछार मैदानों के बीच की सीमा खींची थी. इसी बार मिज़ो नेताओं से राय मशविरा किया गया था. दो साल बाद गजट में इनर लाइन रिजर्व फॉरेस्ट सीमा का आधार भी यही बना.

    साल 1933 में फिर बनी नई सीमा
    हालांकि साल 1933 में लुशाई हिल्स और मणिपुर की तत्कालीन रियासत के बीच की नई सीमा बनाई गई. इसमें कहा गया था कि मणिपुर की सीमा लुशाई हिल्स, असम के कछार जिले और मणिपुर राज्य के ट्राइजंक्शन से शुरू हुई थी. मिज़ो लोग इस सीमा को स्वीकार नहीं करते हैं. वह साल 1875 की सीमा की बात करते हैं जो उनके नेताओं के परामर्श से खींची गई थी.

    आजादी के बाद उत्तर पूर्वी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को असम से अलग किया गया था, जिसके बाद साल 1963 में नागालैंड,  साल 1972 में अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मिजोरम बने. अधिकारियों ने कहा कि मिजोरम और असम के बीच हुए एक समझौते के तहत सीमावर्ती इलाके में नो मेन्स लैंड में यथास्थिति बरकरार रखी जानी थी.

    हालांकि फरवरी 2018 में उस समय हिंसा हुई जब छात्र संघ एमजेडपी (मिज़ो ज़िरलाई पावल) ने असम द्वारा दावा की गई भूमि पर किसानों के लिए विश्राम गृह बनाया और जिसे असम पुलिस ने तोड़ दिया. पिछले अक्टूबर में मिजोरम द्वारा दावा की गई भूमि पर लैलापुर (असम) में निर्माण को लेकर सप्ताह में दो बार झड़पें हुईं.

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