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मिजोरम के साथ सीमा विवाद सुलझाने में 6 महीने से जुटा था गृह मंत्रालय, सुप्रीम कोर्ट ही कर सकता है स्थायी समाधान- असम के सीएम

सीमा पर भड़की हिंसा को केंद्र सरकार की असफलता मानने से इनकार करते हुए सरमा ने कहा कि गृहमंत्री के दौरे से इसका कोई लेना देना नहीं है. (फ़ाइल फोटो)

Assam Mizoram Border Issue: मिजोरम के साथ हिंसा के बाद असम की ओर से ट्रैवल एडवायजरी जारी होने पर मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि इसका कोई मतलब नहीं होता है. कोरोना के समय में भी ट्रैवल एडवायजरी जारी की जाती है.

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    गुवाहाटी. मिजोरम के साथ सीमा विवाद (Assam Mizoram Border Issue) के मामले में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि बॉर्डर पर स्थिति अभी तनाव जैसी बनी हुई है, लेकिन शांति बनाने की कोशिशें जारी हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र मामले में सहयोग कर रहा है, लेकिन विवाद का स्थायी समाधान सिर्फ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से ही मिल सकता है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार दोनों राज्यों से बातचीत कर रही है और दोनों राज्यों की सरकारें भी अपने-अपने माध्यमों के जरिए संपर्क में हैं. सरमा ने उम्मीद जताई कि मामले में जल्द ही समाधान निकलेगा.

    मामले में गृह मंत्रालय (Home Ministry) की भूमिका पर सरमा ने कहा कि पहले दिन से ही मंत्रालय तनाव को कम करने में लगा हुआ है. पिछले छह महीने से गृह मंत्रालय यह कोशिश कर रहा था कि राज्यों के बीच सीमा को लेकर सहमति बन जाए, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. 26 जुलाई की घटना के बाद गृह मंत्रालय और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी दोनों पक्षों से बातकर मामले का सुलझाने में जुटे हुए थे. उन्होंने सुनिश्चित किया कि फिर कोई हिंसक घटना ना हो.

    गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दो दिन बाद सीमा पर भड़की हिंसा को केंद्र सरकार की असफलता मानने से इनकार करते हुए सरमा ने कहा कि गृहमंत्री के दौरे से इसका कोई लेना देना नहीं है और यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. उन्होंने कहा कि यह बहुत ही जटिल मुद्दा और रातों रात इसका समाधान नहीं निकल सकता है. उन्होंने कहा कि यह पिछले अक्टूबर से ही चल रहा है. हालांकि दोनों पक्षों की ओर से प्रयास किए जा रहे थे. लेकिन, कुछ क्षेत्रीय और संवैधानिक मुद्दों के चलते हल नहीं निकल पा रहा था.

    ‘…जब असम ने 200 लोगों को खोया’
    विवाद के इतिहास को खोलते हुए सरमा ने कहा कि 1980 के दशक में पड़ोसी राज्यों के साथ विवाद में असम ने अपने 200 लोगों को खोया था. उन्होंने जब राज्यों का गठन किया तो सीमा को स्पष्ट रूप से रेखांकित नहीं किया. कांग्रेस सरकार ने जब मिजोरम, नगालैंड और मेघालय का गठन किया तो उन्हें सीमाओं को भी स्पष्ट तौर पर रेखांकित करना था. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. यह वह समय था जब हर राज्य में कांग्रेस की सरकार थी. अगर उन्होंने ईमानदारी से प्रयास किया होता आज ऐसी स्थिति नहीं होती. इस ऐतिहासिक गलती के लिए कांग्रेस ही जिम्मेदार है.

    मिजोरम के साथ हिंसा के बाद असम की ओर से ट्रैवल एडवायजरी जारी होने पर मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि इसका कोई मतलब नहीं होता है. कोरोना के समय में भी ट्रैवल एडवायजरी जारी की जाती है. यह आपको किसी राज्य का दौरा करने से नहीं रोकती है, बल्कि आपको सतर्क करती है. अगर कहीं तनाव और विवाद है, तो आप अपने लोगों को कैसे जाने दे सकते हैं. यह सिर्फ ऐतिहातन उठाया गया कदम था.

    ‘मैंने अपने लोगों को अकेले नहीं छोड़ा’
    हिंसा की घटना के बाद अपने बयानों पर सरमा ने कहा, “जब हमारे पुलिसकर्मी मारे गए तो असम के लोगों की भावनाएं भी उद्धेलित हुई और लोगों को इसे समझना होगा. लोगों को लगा कि असम को दबाया जा रहा है. मिजो या मिजोरम के किसी भी व्यक्ति का नुकसान नहीं हुआ. अगर लोगों ने देखा होता कि मुख्यमंत्री सिर्फ बैठा और कुछ नहीं कर रहा है, असम में स्थिति और ज्यादा भयावह हो सकती थी. लेकिन मैंने मेघालय के साथ भी बातचीत जारी रखी थी. साथ ही असम के मुख्यमंत्री के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था. लोगों ने महसूस किया कि मैंने उन्हें अकेले नहीं छोड़ा.”

    ‘विवाद का समाधान बहुत ही जटिल’
    इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में सीमा विवाद के समाधान के बारे में सरमा ने कहा कि “लंबे अवधि के लिए विवाद का समाधान बहुत ही जटिल है. असम अपनी संवैधानिक सीमाओं की रक्षा करेगा. दूसरे लोग ऐतिहासिक दावे कर सकते हैं. असम, भारत सरकार द्वारा की गई कई प्रशासनिक व्यवस्थाओं का परिणाम है. हमने कुछ नहीं मांगा है. हमें कुछ इलाके दिए गए थे और कहा गया था कि यह आपकी संवैधानिक जिम्मेदारी है और इसका प्रबंधन कीजिए. असम के लोगों ने सीमाएं नहीं निर्धारित की हैं. आपको समझना होगा कि असम सिर्फ एक समुदाय की मांग पर नहीं बना है. हमारी सीमाएं संसद द्वारा दी गई हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट इतिहास खंगालता है, कई सरकारों की प्रशासनिक फैसलों को देखता है और फिर सीमाओं का निर्धारण करता है, तो असम को कोई परेशानी नहीं है.

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    स्वीकार होगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सरमा
    मामले में न्यूट्रल एजेंसी द्वारा जांच की मांग पर असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश का मामला अपने हाथों में लिया है. सुप्रीम कोर्ट के पास यह अधिकार है कि वह दो राज्यों के बीच आंतरिक सीमा को परिभाषित कर सके. कोर्ट में मामला लंबित है. अगर सुप्रीम कोर्ट कोई फैसला लेता है, तो हमें स्वीकार होगा.

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