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असम और मिजोरम में सीमा तनाव: 6 असम पुलिस जवानों की गई जान, जानें अब तक क्या क्या हुआ

असम-मिजोरम के बीच सीमा विवाद पुराना है और इससे निपटने के लिए 1995 के बाद से कई वार्ताएं हुई, लेकिन इनका कोई फायदा नहीं हुआ.

असम-मिजोरम के बीच सीमा विवाद पुराना है और इससे निपटने के लिए 1995 के बाद से कई वार्ताएं हुई, लेकिन इनका कोई फायदा नहीं हुआ.

Assam MIzoram Border Tension: विवाद की अहम वजह यह है कि सीमा को लेकर दोनों राज्य अलग-अलग नियम मानते हैं. मिजोरम जहां बंगाल पूर्वी सीमांत नियम, 1873 के तहत 1875 में अधिसूचित 509 वर्ग मील के आरक्षित वन क्षेत्र के अंदरुनी हिस्से को सीमा मानता है, वहीं असम 1933 में तय संवैधानिक नक्शे को मानता है.

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    नई दिल्ली. असम और मिजोरम में सीमा को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने दावा किया है कि इस तनातनी में अब तक 6 असम पुलिस के जवान जान गंवा चुके हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने के निर्देश दिए हैं. सोमवार को मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांगा ने सीमा पर पत्थरबाजी का वीडियो शेयर कर केंद्रीय मंत्री से इस मामले में दखल देने को कहा, तो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पलटवार करते हुए हिंसा के लिए मिजोरम को ही दोषी ठहरा दिया.

    असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कुछ ही देर पहले ट्वीट किया, ‘असम-मिजोरम सीमा पर तनाव में असम पुलिस के छह जवानों की जान गई है.’ दरअसल असम और मिजोरम के अधिकारियों ने एक-दूसरे की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया जिसके बाद दोनों राज्यों के बीच तनाव बढ़ गया है.

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    Himanta Biswa Sarma Tweet

    मिजोरम के तीन जिले – आइजोल, कोलासिब और ममित – असम के कछार, करीमगंज और हैलाकांडी जिलों के साथ लगभग 164.6 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं. दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच सीमा विवाद पुराना है और इससे निपटने के लिए 1995 के बाद से कई वार्ताएं हुई, लेकिन इनका कोई फायदा नहीं हुआ. विवाद की अहम वजह यह है कि सीमा को लेकर दोनों राज्य अलग-अलग नियम मानते हैं. मिजोरम जहां बंगाल पूर्वी सीमांत नियम, 1873 के तहत 1875 में अधिसूचित 509 वर्ग मील के आरक्षित वन क्षेत्र के अंदरुनी हिस्से को सीमा मानता है, वहीं असम 1933 में तय संवैधानिक नक्शे को मानता है.

    असम और मिजोरम सीमा विवाद अब तक क्या-क्या हुआ:

    दोनों राज्यों ने एक-दूसरे पर लगाया अतिक्रमण का आरोप
    मिजोरम ने बीते 30 जून को जहां असम पर सीमा से लगे कोलासिब जिले में उसकी जमीन पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया, तो दूसरी ओर असम के अधिकारियों और विधायकों ने मिजोरम पर असम में हैलाकांडी के अंदर कथित तौर पर दस किलोमीटर की दूरी पर संरचनाओं के निर्माण और सुपारी तथा केले के पौधे लगाने के आरोप लगाए. कोलासिब जिले के पुलिस अधीक्षक वनलालफाका राल्ते ने दावा किया कि असम के हैलाकांडी जिले के उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में सौ से अधिक अधिकारी और पुलिसकर्मी मिजोरम के इलाके में घुस आए हैं और 29 जून से वहां डेरा डाले हुए हैं.

    असम के अधिकारियों पर IED से हमला
    10 जुलाई को असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल को निशाना बनाकर धमाका किया गया जो सीमा के साथ सड़क निर्माण का मुआयना करने आए थे, लेकिन इस धमाके में कोई हताहत नहीं हुआ. इस प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे. सूत्र ने बताया कि शुरुआत में माना गया कि यह हथगोले से किया गया हमला है, लेकिन बाद में पुलिस ने उपद्रवियों द्वारा धमाके में आईईडी (इम्प्रोवाइस्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) का इस्तेमाल करने का संदेह जताया.

    असम-मिजोरम सीमा विवाद : दो और धमाके
    असम के कछार जिले में निष्कासन अभियान के दौरान मिजोरम के कथित शरारती तत्वों द्वारा संदिग्ध ‘आईईडी’ धमाका करने के एक दिन बाद 11 जुलाई को मिजोरम की सीमा में एक के बाद एक दो धमाके हुए. कुछ दिन पहले मिजोरम के कुछ लोग असम की सीमा में साढ़े छह किलोमीटर अंदर आ गए जिसके बाद असम पुलिस और नागरिक प्रशासन ने जिले के खुलीचेरा इलाके में से निष्कासन अभियान शुरू किया था. असम पुलिस के सूत्र ने बताया कि मिजोरम की सीमा से तड़के 2.40 बजे और 2.43 बजे दो धमाकों की आवाज सुनी गई.

    ‘मिजोरम के लोगों ने असम की 1,800 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा किया’
    असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व सरमा ने 12 जुलाई को विधानसभा में कहा कि पड़ोसी राज्य मिजोरम के लोगों ने असम के तीन जिलों में लगभग 1,800 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक सुजामउद्दीन लस्कर के सवाल का जवाब देते हुए सरमा ने कहा कि बराक घाटी क्षेत्र में कुल 1,777.58 हेक्टेयर जमीन पर मिजोरम से आए लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है. सरमा ने कहा कि इसमें से सर्वाधिक क्षेत्रफल वाले हैलाकांदी जिले की एक हजार हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया गया है. उन्होंने कहा कि कछार में 400 हेक्टेयर और करीमगंज में 377.58 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा किया गया.

    असम ने अतिक्रमण को लेकर मिजोरम सरकार के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा किया
    असम ने मिजोरम सरकार के कुछ अधिकारियों पर उसकी वन भूमि का अतिक्रमण करने और वनों को इरादतन नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कछार जिले की एक अदालत में 15 जुलाई को एक मुकदमा दायर किया. पूर्वोत्तर के इन दो राज्यों के बीच कछार जिले में मिजोरम के लोगों द्वारा भूमि के कथित अतिक्रमण के बाद पैदा हुए तनाव की पृष्ठभूमि में यह मुकदमा किया गया है. कछार संभागी वन अधिकारी शनि देव चौघरी ने मिजोरम के कोलासिब जिले के पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक तथा केंद्रीय रिजर्व पुलिस की 22 वीं बटालियन और पड़ोसी राज्य की इंडिया रिजर्व बटालियन के अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा किया है. यह मुकदमा असम वन नियम अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत दायर किया गया है.

    मिजोरम ने असम के अतिक्रमण के आरोपों को किया खारिज
    मिजोरम सरकार ने 16 जुलाई को आरोप लगाया कि पड़ोसी राज्य असम उसकी जमीन पर दावा कर रहा है, तथा इन सीमावर्ती गांवों में 100 साल से ज्यादा समय से मिजो लोग रह रहे हैं. मिजोरम के मुख्य सचिव लालनुनमाविया चुआनगो ने दावा किया कि राज्य ने असम की सीमा में एक इंच का भी अतिक्रमण नहीं किया है, जैसा कि पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा दावा कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विवादित क्षेत्र पर यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश के बावजूद असम पुलिस और राज्य वन विभाग के अधिकारियों की निगरानी में जून-जुलाई में असम के अधिकारियों ने सीमा में अतिक्रमण किया. मिजोरम के गृह मंत्रालय की शीर्ष अधिकारी ने कहा कि मिजोरम जहां बंगाल पूर्वी सीमांत नियम, 1873 के तहत 1875 में अधिसूचित 509 वर्ग मील के आरक्षित वन क्षेत्र के अंदरुनी हिस्से को सीमा मानता है, वहीं असम 1933 में तय संवैधानिक नक्शे को मानता है. उन्होंने कहा कि 1933 के नक्शे की सीमा थोपी गई थी क्योंकि परिसीमन के समय मिजोरम की राय नहीं ली गई थी और दोनों राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से सीमाओं का सत्यापन नहीं हुआ था.

    अस्थायी शेड को लेकर असम-मिजोरम सीमा के गांव गुतगुती में तनाव
    मिजोरम पुलिस कर्मियों द्वारा पुलिस शिविर के लिए अस्थायी शेड के निर्माण के बाद असम-मिजोरम सीमा के गांव गुतगुती में तनाव उत्पन्न हो गया. मिजोरम ने हालांकि दावा किया कि जिस जमीन पर पुलिस शिविर शेड बनाया गया है, वह उसी की है और कहा कि अगर असम की ओर से उसके क्षेत्र में और कोई अतिक्रमण किया जाता है तो उसके बल किसी भी समय प्रहार करने के लिए तैयार हैं. असम के हैलाकांडी जिले के कतलीचेर्रा क्षेत्र के पुलिस और वन अधिकारियों की टीम ने शेड की ओर जाने की कोशिश की, लेकिन सड़कों की खराब स्थिति की वजह से कथित रूप से वहां पहुंच नहीं सकी. असम पुलिस ने कहा कि 10 जुलाई को मुख्य सचिव स्तर की बैठक के बाद मिजोरम पुलिस द्वारा नए सिरे से ढांचे के निर्माण से लोगों में काफी आक्रोश है.

    मिजोरम के मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों से असम का इनकार
    मिजोरम ने असम पर मानवाधिकार उल्लंघनों का आरोप लगाया जिससे इनकार करते हुए असम की ओर से 19 जुलाई को कहा गया कि उसकी भूमि पर अतिक्रमण किया गया जो पूर्वोत्तर के दोनों राज्यों के बीच सीमा विवाद का एक महत्वपूर्ण बिंदू है. आइजोल में एक अधिकारी ने बताया कि मिजोरम के कोलासिब जिले के उपायुक्त एच. लालथांगलियाना ने असम के कछार जिले के प्रशासन को पत्र लिखा है जिसमें असम सरकार के अधिकारियों और पुलिस द्वारा 10 जुलाई को सीमा पर गतिरोध के दौरान आदिवासी लोगों पर अत्याचार करने और मानवाधिकार उल्लंघनों का आरोप लगाया गया है. दूसरी ओर, असम के विशेष पुलिस महानिदेशक जीपी सिंह ने कहा कि एनएचआरसी और एनसीएसटी जब भी इस बारे में राज्य से कुछ पूछेंगे तो उसी के अनुसार जवाब दिया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘मूल मुद्दा यह है कि असम की भूमि पर मिजोरम ने कब्जा किया है. इसके बाद ही अन्य मुद्दे हैं, लेकिन मूल मुद्दा तो अतिक्रमण का है.’

    मिजोरम के साथ सीमा पर स्थिति नाजुक: सरमा
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने 20 जुलाई को कहा कि मिजोरम के साथ अंतरराज्यीय सीमा पर स्थिति फिलहाल ‘नाजुक’ है और पड़ोसी राज्य के साथ विवादों को सुलझाने में कुछ समय लगेगा. असम के कछार और हैलाकांडी जिलों में मिजोरम के साथ लगती अंतर-राज्यीय सीमा पर तनाव पिछले कुछ दिनों से सीमा पार से उपद्रवियों द्वारा कथित रूप से अतिक्रमण की गई भूमि को खाली कराने के असम पुलिस के अभियान को लेकर बढ़ रहा है.

    मिजोरम सीमा से लगे स्थानों पर डेरा डाल रही असम पुलिस
    दोनों पूर्वोत्तर राज्यों के बीच सीमा विवाद को लेकर जारी तनाव के बीच असम सरकार के एक अधिकारी ने 23 जुलाई को बताया कि राज्य पुलिस मिजोरम के साथ लगती अंतरराज्यीय सीमा पर दो स्थानों पर डेरा डाल रही है और पड़ोसी राज्य के लोगों द्वारा हमला किए जाने के डर से किसी निवासी ने अपना घर नहीं छोड़ा है. कछार के पुलिस अधीक्षक निंबालकर वैभव चंद्रकांत ने बताया कि पुलिस की टीम खुलिचेरा और ढोलाखाल में डेरा डाल रही है.

    असम के साथ सीमा विवाद से निपटने के लिए मिजोरम ने सीमा आयोग का गठन किया
    मिजोरम सरकार ने असम के साथ सीमा विवाद से निपटने के लिए एक सीमा आयोग का गठन किया. 22 जुलाई को जारी एक सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि सीमा आयोग की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री तवंलुइया करेंगे और इसके उपाध्यक्ष गृह मंत्री लालचमलियाना होंगे. राज्य के गृह विभाग के सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है. अधिसूचना में कहा गया है कि आयोग मिजोरम-असम सीमा विवाद के विभिन्न पहलुओं पर विचार करेगा. आयोग में तीन मंत्रियों, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के अलावा प्रमुख गैर सरकारी संगठनों, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों, इनर लाइन रिजर्व फॉरेस्ट डिमांड पर संयुक्त कार्रवाई समिति के एक-एक सदस्य होंगे.

    केंद्र ने दिया विवाद सुलझाने का निर्देश
    सूत्रों ने 26 जुलाई को जानकारी दी है कि असम और मिजोरम राज्य के बीच सीमा को लेकर जारी तनाव पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर उनसे मुद्दे को हल करने के निर्देश दिए हैं. जानकारी के मुताबिक दोनों मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय मंत्री से इस बात पर सहमति जताई है कि वे इस मुद्दे को सुलझाएंगे और शांति बनाए रखेंगे. राहत की खबर यह भी है कि विवादित स्थल पर तैनात दोनों राज्यों की पुलिस वहां से लौट गए हैं.

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