लाइव टीवी

असम NRC शुरू करवाने वाले NGO ने SC से पूरी प्रक्रिया की फिर से जांच कराए जाने की मांग की

News18Hindi
Updated: February 19, 2020, 11:39 PM IST
असम NRC शुरू करवाने वाले NGO ने SC से पूरी प्रक्रिया की फिर से जांच कराए जाने की मांग की
APW नाम के इसी NGO की पहल पर असम में NRC की प्रक्रिया शुरू की गई थी (न्यूज18 क्रिएटिव)

असम पब्लिक वर्क्स (Assam Public Works) के मुताबिक 80 लाख गैर-कानूनी शरणार्थियों के राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (NRC) में शामिल हो जाने से पुन: सत्यापन की प्रक्रिया बहुत जरूरी हो गई है. NGO का दावा है कि इन लोगों में जिहादी (Jihadi) भी शामिल हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 19, 2020, 11:39 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. असम पब्लिक वर्क्स (Assam Public Works) नाम के जिस NGO की पहल पर असम में NRC की प्रक्रिया शुरू की गई थी, वह अब सुप्रीम कोर्ट चला गया है. इस NGO ने पूरी प्रक्रिया और जांच की न्यायिक कमेटी द्वारा पुन: सत्यापित किए जाने की मांग की थी ताकि राष्ट्रीय नागरिकता नागरिकता पंजी को अपडेट करने में हुई गलतियों का पता लगाया जा सके.

असम पब्लिक वर्क्स (APW) के मुताबिक 80 लाख गैर-कानूनी शरणार्थियों (Illegal refugees) के राष्ट्रीय नागरिकता पंजी में शामिल हो जाने से पुन: सत्यापन की प्रक्रिया बहुत जरूरी हो गई है. NGO का दावा है कि इन लोगों में जिहादी भी शामिल हैं. बता दें कि इसी NGO की 2009 में सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिका ने 1952 की राष्ट्रीय नागरिकता पंजी को अपडेट किए जाने की प्रक्रिया को शुरू किया था.



'कई स्थानीय लोगों के नाम NRC में शामिल नहीं, कई अवैध प्रवासियों के नाम शामिल'
सोमवार को शीर्ष अदालत में दायर एक नए हलफनामे में, एपीडब्ल्यू ने आरोप लगाया कि 31 अगस्त, 2019 को प्रकाशित एनआरसी की सूची में कई स्थानीय लोगों का नाम शामिल नहीं हैं, जबकि कई अवैध प्रवासियों (Illegal Migrants) के नाम सूची में शामिल हैं.

हलफनामे में कहा गया है कि अंतिम एनआरसी सूची में जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (Bangladesh) के चार ‘‘जिहादियों’’ के नाम थे, जिन्हें बारपेटा जिले से गिरफ्तार किया गया था.

NGO ने धन की कथित हेराफेरी और अनियमितताओं की जांच की भी मांगी अनुमति
इसमें कहा गया कि एनआरसी की सूची में जिन गिरफ्तार ‘‘जिहादियों’’ के नाम शामिल हैं, उनमें अजहरुद्दीन, रंजीत अली, लुइट जमीउल जमाल और मुकद्दिर इस्लाम हैं. इससे पहले, उच्चतम न्यायालय में एनजीओ (NGO) द्वारा दायर एक याचिका की वजह से पूर्वोत्तर राज्य में एनआरसी को अद्यतन करने का फैसला किया गया था.

ताजा हलफनामे में, एपीडब्ल्यू ने यह भी आग्रह किया है कि सीबीआई, एनआईए (NIA) और ईडी जैसी एजेंसियों को एनआरसी के पूर्व राज्य समन्वयक प्रतीक हजेला द्वारा एनआरसी को अद्यतन करने की प्रक्रिया में की गई धन की कथित हेराफेरी और अनियमितताओं की जांच करने की अनुमति दी जाए.

फिलहाल रोक दी जानी चाहिए NRC की प्रक्रिया और किया जाना चाहिए इसका पुन: सत्यापन
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने हजेला को असम से उनके गृह राज्य मध्य प्रदेश में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था और उन्हें पिछले साल 11 नवंबर को एनआरसी राज्य समन्वयक के पद से मुक्त कर दिया गया था.

एपीडब्ल्यू के अध्यक्ष अभिजीत सरमा ने कहा, ‘‘नवीनतम हलफनामे में, हमने अनुरोध किया है कि एनआरसी की वैधता को उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के समक्ष लंबित दो मामलों के अंतिम निपटान तक नहीं माना जाए.’’ उन्होंने कहा, ‘‘एनआरसी प्रक्रिया (NRC Process) को फिलहाल रोक दिया जाना चाहिए और पूरी प्रक्रिया का 100 प्रतिशत पुन: सत्यापन किया जाना चाहिए.’’ (भाषा के इनपुट सहित)

यह भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर के बाद अब CAA-NRC के मुद्दे पर भी पाकिस्तान में बोले यूएन प्रमुख

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 19, 2020, 11:39 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर