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assam police suspended after man custodial death dgp said there is much more to it

पुलिस हिरासत में मौत, आगजनी और थाना इंचार्ज सस्पेंड: असम डीजीपी ने बताई सिलसिलेवार स्टोरी...

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने थाने में आग लगा दी. (ANI)

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने थाने में आग लगा दी. (ANI)

Assam police suspended but DGP says story is much more: असम के डीजीपी ने बटाद्रवा पुलिस थाने में उपद्रवियों द्वारा आग के हवाले किए जाने की घटना में कई बातें कही है. उन्होंने कहा कि यह घटना महज हिरासत में मौत की सहज प्रतिक्रिया में नहीं थी बल्कि इसके आगे भी बहुत कुछ था.

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गुवाहाटी. हिरासत में मौत के आरोप के बाद असम के नागांव जिले के बटाद्रवा पुलिस थाने के प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है. लेकिन असम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भास्कर ज्योति महंत ने कहा कि मौत दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन इसके बाद जिस तरह से थाने में आग लगाई गई उस कहानी के आगे बहुत कुछ है. उन्होंने कहा कि थाने में आग की घटना साधारण कार्रवाई की प्रतिक्रिया में की गई घटना नहीं थी बल्कि इसमें आगे भी बहुत कुछ है.दरअसल, पुलिस ने एक शराबी को पकड़कर लाया. आरोप है कि पुलिस की प्रताड़ना के कारण उसकी मौत हो गई. इसके बाद उपद्रवियों ने थाने में आग लगा दी. घटना के वीडियो में एक महिला को थाने के सामने खड़े दोपहिया वाहनों पर कुछ ज्वलनशील तरल पदार्थ छिड़कते और आग लगाते हुए देखा गया. कुछ ही देर में थाना आग की चपेट में आ गया और दमकल की गाड़ियों ने बाद में आग पर काबू पाया.

थाने में आगे लगाने वाले हिस्ट्रीशीटर बदमाश
असम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) भास्कर ज्योति महंत ने दावा किया कि उस पुलिस थाने में आगजनी करने वालों में आपराधिक पृष्ठभूमिक के लोग शामिल थे जहां आपराधिक रिकॉर्ड रखे थे. उन्होंने दावा किया कि उनमें मृतक के शोक संतप्त रिश्तेदार नहीं थे, बल्कि हिस्ट्रीशीटर बदमाश थे. उन्होंने कहा, हमने इस दुर्भाग्यपूर्ण मौत को बहुत गंभीरता से लिया है और नागांव जिले के बटाद्रवा पुलिस थाने के प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है. अगर हमारी ओर से कोई गड़बड़ी हुई है, तो हम उसका पता लगाएंगे और कानून के मुताबिक दोषियों को दंडित करेंगे. इसके कोई दो तरीके नहीं हैं. डीजीपी महंत ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर विस्तार से बताया कि 39 वर्षीय सफीकुल इस्लाम को शराब के नशे में होने की शिकायत मिलने के बाद 20 मई को रात 9.30 बजे पुलिस थाने लाया गया था. उन्होंने बताया, वह वास्तव में थाने लाए जाने से पहले एक सड़क पर पड़ा हुआ था. चिकित्सकीय जांच के बाद उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया. अगले दिन उसे रिहा कर दिया गया और उसकी पत्नी को सौंप दिया गया. उसकी पत्नी ने उसे कुछ पानी/भोजन भी दिया. बाद में उसने तबीयत बिगड़ने की शिकायत की और इसके बाद उसे एक के बाद एक दो अस्पतालों में ले जाया गया. दुर्भाग्य से, उसे मृत घोषित कर दिया गया.

आग में आपराधिक रिकॉर्ड जलकर खाक हुए
डीजीपी ने कहा कि इसके बाद भीड़ ने यह आरोप लगाते हुए शनिवार दोपहर को थाने और कई दोपहिया वाहनों में आग लगा दी कि मछली व्यापारी की मौत पुलिस की प्रताड़ना के कारण हुई. महंत ने हिंसक घटना का जिक्र करते हुए बताया, उस दिन बाद में क्या हुआ, हम सभी जानते हैं. कुछ स्थानीय शरारती तत्वों ने कानून को अपने हाथ में ले लिया और थाने में आग लगा दी. इनमें महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल थे. लेकिन जिस तैयारी के साथ वे आए थे और पुलिस पर उन्होंने जिस क्रूर और संगठित तरीके से हमला किया, उसने हमें गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया है. डीजीपी ने इस बात पर जोर दिया कि असम पुलिस को नहीं लगता कि हमलावर मृतक के शोक संतप्त परिजन थे, बल्कि यह पहचान कर ली गई है वे सभी खराब चरित्र के थे और उन लोगों के रिश्तेदार थे जिनका आपराधिक रिकॉर्ड थाने के भीतर सबूत के तौर पर था जो आग में जलकर नष्ट हो गए. इसलिए यह मत सोचिए कि यह एक साधारण क्रिया के बदले की गई प्रतिक्रिया की घटना है. इसमें और भी बहुत कुछ है. महंत ने असम के लोगों को आश्वासन दिया कि उनका विभाग दोषी पाए गए किसी भी पुलिस कर्मी को नहीं बख्शेगा, लेकिन यह उन तत्वों के खिलाफ और भी सख्त कार्रवाई करेगा जो सोचते हैं कि वे पुलिस थानों को जलाकर भारतीय न्याय प्रणाली से बच सकते हैं.

परिवार ने कहा पुलिस ने 10 हजार रुपये मांगे
डीजीपी ने कहा, हम इसकी अनुमति नहीं देंगे. इसे सभी असामाजिक/आपराधिक तत्वों के लोग पहली और आखिरी चेतावनी समझें. नगांव की पुलिस अधीक्षक लीना डोले ने शनिवार को कहा था कि आगजनी में शामिल तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य की तलाश शुरू कर दी गई है. सलोनाबोरी गांव के मछली व्यापारी के परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि पुलिस ने उसकी रिहाई के लिए 10,000 रुपये और एक बत्तख रिश्वत के रूप में मांगी थी और उसकी पत्नी शनिवार की सुबह एक बत्तख के साथ पुलिस थाने गई थी. उन्होंने दावा किया कि बाद में जब वह पैसे लेकर लौटी तो उसे पता चला कि उसके पति को नगांव सिविल अस्पताल ले जाया गया है. उन्होंने दावा किया कि वहां पहुंचने के बाद उसने अपने पति को मृत पाया. ग्रामीणों ने यातना के कारण व्यक्ति की मौत का आरोप लगाते हुए थाने का घेराव किया, कथित तौर पर ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों के साथ मारपीट की और फिर इमारत को आग लगा दी.

Tags: Assam, Police

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