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संसद में आज पेश होगा नागरिकता संशोधन विधेयक, असम में PM मोदी के खिलाफ प्रदर्शन

News18Hindi
Updated: January 8, 2019, 9:06 AM IST

ये विधेयक अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी व ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को भारत में छह साल बिताने के बाद नागरिकता देने के लिए लाया गया है.

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  • Last Updated: January 8, 2019, 9:06 AM IST
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असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) को लेकर एक बार फिर से विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. नागरिकता संशोधन बिल पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अंतिम रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश होनी है. एक अरसे से लटके इस विधेयक के खिलाफ सिर्फ विपक्षी दलों ने ही नहीं, बल्कि एनडीए सरकार के सहयोगी दल शिवसेना ने भी मोर्चा खोल लिया है. जबकि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम और समाजवादी पार्टी पहले ही जेपीसी रिपोर्ट के खिलाफ हैं.

असम के विभिन्न स्थानों पर नागरिकता विधेयक को लेकर शनिवार और रविवार को प्रदर्शन हुए. इससे एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार प्रस्तावित कानून को संसद की मंजूरी दिलाने की दिशा में काम कर रही है. जिसके बाद निचले असम और डिब्रूगढ़ में प्रदर्शनकारियों ने पीएम मोदी और सीएम सर्बानंद सोनोवाल के खिलाफ नारेबाजी भी की.

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नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016, नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करेगा. ये विधेयक अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी व ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को भारत में छह साल बिताने के बाद नागरिकता देने के लिए लाया गया है. राज्य के मूल लोगों के कई संगठन विधेयक का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे उनकी सांस्कृतिक पहचान को नुकसान होगा.

कब लाया गया था ये बिल?
यह बिल लोकसभा में 15 जुलाई 2016 को पेश हुआ था, जबकि 1955 नागरिकता अधिनियम के अनुसार, बिना किसी प्रमाणित पासपोर्ट, वैध दस्तावेज के बिना या फिर वीजा परमिट से ज्यादा दिन तक भारत में रहने वाले लोगों को अवैध प्रवासी माना जाएगा.

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यह भी विवाद है कि बिल को लागू किया जाता है, तो इससे पहले से अपडेटेड नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) प्रभावहीन हो जाएगा. फिलहाल असम में एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया जारी है. एजीपी ने बिल के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की है. पार्टी के सदस्यों ने कहा कि वह राज्य के लोगों से बिल के खिलाफ 50 लाख हस्ताक्षर इकट्ठा करने करेंगे, जिसे जेपीसी के पास भेजा जाएगा. कांग्रेस ने भी बिल को 1985 के असम समझौते की भावना के खिलाफ बताकर इसका विरोध किया है.


पीएम ने क्या कहा था?
पूर्वोत्तर के लिए बीजेपी के लोकसभा चुनाव प्रचार का आगाज करने के बाद प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को कहा था कि यह विधेयक हर किसी को लाभ नहीं पहुंचाएगा, बल्कि यह अतीत के अन्याय और बहुत सारे गलत कामों का प्रायश्चित है. पीएम के इस बयान के बाद कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) की अगुवाई में करीब 70 संगठनों ने राज्य की राजधानी में सुबह में विरोधी रैली निकाली.

इस डर से हो रहा विरोध
केएमएसएस नेता अखिल गोगोई ने बताया कि केएमएसएस के सदस्यों की योजना असम गण परिषद (एजीपी) के मुख्यालय तक जाने और पार्टी से यह मांग करने की थी कि वह भाजपा के साथ अपना गठबंधन खत्म करे, लेकिन पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. उन्होंने कहा, ‘ हमने लोगों से यह अनुरोध करने के लिए रैली निकाली थी कि वे अपने घरों से बाहर आएं और प्रधानमंत्री की घोषणा के खिलाफ प्रदर्शन करें. यह विधेयक मूल लोगों की पहचान को दांव पर लगा देगा.'

गोगोई आगे कहते हैं, 'हम यह सहन नहीं कर सकते हैं कि एक नेता दिल्ली से आए और हमारे अस्तित्व की धमकी दे. और मुख्यमंत्री समेत अन्य बीजेपी नेता उनकी तारीफ करें.’

सीएम ने की शांति की अपील
इस बीच सोनेवाल ने लोगों से शांत रहने और सब्र बनाए रखने की अपील की है, क्योंकि राज्य सरकार कभी भी ऐसा कुछ नहीं करेगी, जिससे उनके हितों को नुकसान पहुंचे. उन्होंने यहां एक कार्यक्रम से इतर मीडिया ब्रिफिंग में कहा,‘मैं असम का मुख्यमंत्री हूं. मुझे ब्रह्मपुत्र और बाराक घाटी, दोनों के ही लोगों के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है. लोगों को सरकार की मंशा पर संदेह नहीं करना चाहिए.’मुख्यमंत्री ने कहा कि वह लोगों की पहचान को सुरक्षित रखने के लिए सब कुछ करेंगे.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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First published: January 7, 2019, 5:21 AM IST
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