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असम के राभा जनजातियों का मशहूर 'बैखो' उत्सव, जिसमें आग से खेलते हैं लोग, जानें वजह

असम के राभा जनजाति बैखो उत्सव मनाते हैं. (फोटो-वीडियो ग्रैब)

असम के राभा जनजाति बैखो उत्सव मनाते हैं. (फोटो-वीडियो ग्रैब)

असम में 'राभा जनजाति' के लोग बैखो उत्सव मनाते हैं. इस उत्सव में आग से खेलना प्रमुखता से शामिल है. इस दौरान राभा जनजाति ...अधिक पढ़ें

गुवाहाटी. असम में ‘राभा जनजाति’ के लोग बैखो उत्सव मनाते हैं. वर्षों से मनाई जा रही ये उत्सव खेती-बाड़ी से जुड़ी है. इस त्योहार को अनूठे तरीके से मनाया जाता है, जिसमें आग से खेलना प्रमुखता से शामिल है. इस दौरान राभा जनजाति के कुछ लोग आग से खेलते हैं, कुछ आग पर नाचते हैं, कुछ नंगे पैर आग पर चलते हैं. वे प्राचीन काल से बैखो देवी की पूजा करते हैं. राभा लोग विभिन्न अनुष्ठानों के बाद प्रार्थना करके देवी बैको को खुश करने के लिए आग पर नाचते हैं.

राभाओं का मानना है कि देवी के आशीर्वाद से ‘बायब्रस’ (इस नृत्य को करने वाले सभी युवा) को आग पर प्रदर्शन करते समय कोई नुकसान नहीं होता है. जानकारी के मुताबिक, लोगों के आग पर नाचने को राभा भाषा में “बार नक्कई” कहा जाता है. ये त्योहार असम के गोपालपरा जिले के पश्चिम डारंग में मनाया जाता है. बैखो त्योहार मूल रूप से किसानों द्वारा खेती में सुधार और फसलों को बीमारियों से बचने के लिए मनाया जाता है. इन जनजातियों का मानना है कि देवी बैको की पूजा करने से उनकी इच्छा पूरी करता है.

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इस बीच, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने असम के मोरीगांव जिले में तिवा के जनता से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और पहचान से जुड़ें रहें और धर्म परिवर्तन की प्रवृत्ति से सुरक्षित दूरी बनाए रखें. सूत्रों से मिले जानकारी के अनुसार, सोमवार को 24 से अधिक परिवार गोवा (तिवा) राजा के दरबार में आयोजित समारोह में अपने जड़ें हिंदू धर्म में लौट आए हैं. यह समारोह असम में नेल्ली से कार्बी आंगलोंग के रास्ते में मोर्टन गांव में आयोजित किया गया था.

Tags: Assam, Assam CM, Assam news, Himanta biswa sarma

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