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मां के साथ सड़क किनारे बेचता था चाय, 1st अटेम्प्ट में क्वालिफाई किया NEET, AIIMS में हुआ एडमिशन

मां के साथ सड़क किनारे बेचता था चाय, 1st अटेम्प्ट में क्वालिफाई किया NEET, AIIMS में हुआ एडमिशन

चाय बेचते हुए नीट क्वालिफाई कर लिए (Nenow)

चाय बेचते हुए नीट क्वालिफाई कर लिए (Nenow)

वो दिन में चाय बेचता और पूरी रात जाग कर पढ़ाई करता. उसकी आंखें बस एक ही सपना देखा करती. आज वह ख्वाब हकीकत का रूप अख्तियार कर रही है. अब वो डॉक्टर बनेगा. वो भी देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्था से. असम के रहने वाले और चाय बेचने वाले बेटे को लोग अब कहेंगे... डॉ. राहुल दास.  

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किसी ने सच ही कहा है अगर कोई भी काम सही लगन और ईमानदारी से की जाए, तो मंजिल मिल ही जाती है. इसे सही साबित कर दिखाया है असम के बाजली जिले (Assam’s Bajali Disttrict) के रहने वाले 24 साल के राहुल दास (Rahul Das) ने. राहुल ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर पहले ही प्रयास में नीट की परीक्षा (NEET Exam 2022) पास की है. अब वो अपने सपने को पूरा करने के लिए दिल्ली के एम्स (AIIMS Delhi) में दाखिला लेने वाले हैं. उन्हें दिल्ली एम्स में सीट अलॉट हुई है.

इंजीनियरिंग में कर चुके हैं डिप्लोमा

राहुल के पिता एक दशक पहले गुजर गए थे. लिहाजा, उनकी मां को घर चलाने के लिए चाय बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा. मां ने ही उनकी पढ़ाई-लिखाई का पूरा खर्चा उठाया है. राहुल शुरू से ही पढ़ाई में होशियार रहे हैं. उच्च माध्यमिक परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (CIPET) में प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के लिए प्रवेश लिया. यहां तीन साल बाद उन्होंने डिस्टिंक्शन के साथ सफलता प्राप्त की और साल 2020 में गुवाहाटी की ही एक एमएनसी में ‘क्वालिटी इंजीनियर’ के रूप में काम शुरू किया.

नौकरी से नहीं मिली खुशी  

मगर राहुल अपने नौकरी से खुश नहीं थे. वह हमेशा से ही डॉक्टर बनना चाहते थे. इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर नीट की तैयारी शुरू की. तैयारी के दौरान वो पूरी रात पढ़ाई करते थे. इस कठिन मेहनत का नतीजा रहा है कि उन्होंने पहली बार में नीट की परीक्षा में सफलता पाई.

चाय बेचने के साथ-साथ की पढ़ाई

राहुल ने कहा कि वह जिले के पटाचरकुची चौक इलाके में अपनी मां की दुकान पर बैठते थे और काम के बीच भी पढ़ाई के लिए समय निकाल लेते थे. उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी मां को हमारे लिए कड़ी मेहनत करते देखा है. हम दुकान पर एक हेल्पर भी नहीं रख सकते थे. स्कूल के बाद  मैंने किसी न किसी तरह से उनकी मदद करने के लिए का फैसला किया. मैं चाय बनाता और उसे बेचता था और जब भी संभव होता,  मैं दुकान पर पढ़ने के लिए बैठ जाता’.

राहुल की मेहनत देख लोगों ने की मदद

राहुल कहते हैं कि उनकी मां की दुकान जिस जमीन पर है उसके मालिक मंटू कुमार शर्मा हैं. उनकी पटाचरकुची चौक पर एक बड़ी हार्डवेयर की दुकान है. लेकिन, उन्होंने हमसे कभी किराया नहीं लिया. यहां तक कि उन्होंने दिल्ली जाने के लिए टिकट भी बुक करवाया’. सिर्फ मंटू कुमार शर्मा ही नहीं, राहुल की मेहनत देखकर पास ही में रहने वाले डीसी भारत भूषण देव चौधरी ने भी उनकी मदद की है. राहुल की कामयाबी को देखते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घोषणा की है कि उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी.

Tags: AIIMS-New Delhi, Neet exam

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