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Assembly Election 2022: 5 राज्यों के चुनाव में दांव पर कांग्रेस की किस्मत! 2024 के आम चुनाव से पहले विपक्ष की भी अग्नि परीक्षा

Assembly Election 2022: 5 राज्यों के चुनाव में दांव पर कांग्रेस की किस्मत! 2024 के आम चुनाव से पहले विपक्ष की भी अग्नि परीक्षा

5 राज्यों का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के साथ विपक्ष के लिए अग्निपरीक्षा की तरह है. फाइल फोटो

5 राज्यों का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के साथ विपक्ष के लिए अग्निपरीक्षा की तरह है. फाइल फोटो

Assembly Election 2022: पिछले करीब दो साल से कोविड संकट, महंगाई, बेरोजगारी और कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष बीजेपी सरकार पर लगातार हमले कर रही है. ऐसे में ये देखना दिलचप्स होगा कि उनके इस अभियान का असर वोटरों पर पड़ा है या फिर नहीं. चुनाव के नतीजों का असर साल 2024 में होने वाले आम चुनाव पर भी दिख सकता है. चुनाव के परिणामों से ये भी तय होगा कि बीजेपी को चुनौती देने के लिए क्या कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष खड़ा होगा या फिर कोई और पार्टी इस खेमे को लेकर आगे बढ़ेगी.

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नई दिल्ली. पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव (Assembly election 2022 ) की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हो गई है. ये चुनाव बीजेपी और विपक्ष दोनों के लिए बेहद अहम है. इसे कई राजनीतिक पंडित प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के लिए एक मध्यावधि मूल्यांकन भी कह रहे हैं. लेकिन बीजेपी के मुकाबले ये चुनाव विपक्ष के लिए ज्यादा अहम है. एक ऐसा चुनाव जो कांग्रेस का भविष्य तय कर सकती है. साथ ही ये चुनाव क्षेत्रीय दलों के लिए भी अग्नि परीक्षा साबित हो सकती है. चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि क्या समाजवादी पार्टी और बसपा में अब भी वो करिश्माई ताकत है जो उत्तर प्रदेश में वोटरों का दिल जीत सके. या फिर क्या आम आदमी पार्टी अब बीजेपी को चुनौती देगी?

चुनाव के नतीजों का असर साल 2024 में होने वाले आम चुनाव पर भी दिख सकता है. चुनाव के परिणामों से ये भी तय होगा कि बीजेपी को चुनौती देने के लिए क्या कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष खड़ा होगा या फिर कोई और पार्टी इस खेमे का नेतृत्व करेगी. बता दें कि कांग्रेस इस साल अपने नए अध्यक्ष को चुनने को लेकर तैयारियां भी कर रही है. एक ऐसा चुनाव जिसको लेकर पिछले कुछ समय से कांग्रेस के अंदर घमासान मचा है.

विपक्ष का टेस्ट!
पिछले करीब दो साल से कोविड संकट, महंगाई, बेरोजगारी और कृषि कानूनों को लेकर विपक्ष बीजेपी सरकार पर लगातार हमले कर रही है. ऐसे में ये देखना दिलचप्स होगा कि उनके इस अभियान का असर वोटरों पर पड़ा है या फिर पीएम मोदी की लोकप्रियता को कोई नुकसान हुआ है. फिलहाल पंजाब में कांग्रेस सत्ता में है. जबकि पिछले चुनाव में वो उत्तराखंड और गोवा में जीत से दूर रह गई थी. ऐसे में कांग्रेस को खुद को साबित करने का ये आखिरी मौका हो सकता है. मोदी के पीएम बनने के बाद से पिछले सात वर्षों में, पार्टी केवल पांच राज्यों में सरकारें बना पाई है – 2016 में केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, 2017 में पंजाब और 2018 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़.

मुश्किल में कांग्रेस
बाद में मध्य प्रदेश में भी पार्टी सत्ता से बदखल हो गई. गोवा में इस वक्त आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस को पीछे धकेल दिया है. मणिपुर में सरकार की दौड़ में हारने के बाद से कांग्रेस लगातार पिछड़ रही है. पार्टी को इस बार उत्तराखंड में जीत की उम्मीद लगी है. यहां टक्कर बीजेपी से है.

करो या मरो की लड़ाई
उधर क्षेत्रीय पार्टियां बीजेपी को लगातार टक्कर दे रही है. खास कर इस साल पश्चिम बंगाल के चुनाव में बीजेपी को तृणमूल कांग्रेस ने करारी शिकस्त दी थी. इस जीत के बाद से ममता बनर्जी दिल्ली में सरकार बनाने के सपने देखने लगी है. उधर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बीएसपी के लिए इस बार ये करो या मरो की लड़ाई है. जबकि कांग्रेस के लिए और भी बड़ी परीक्षा है.

दांव पर कांग्रेस की किस्मत!
उत्तर प्रदेश में साल 2017 में कांग्रेस के अभियान का नेतृत्व राहुल गांधी ने किया था. उन्होंने ’27 साल यूपी बेहाल’ का नारा दिया था. उन्होंने मतदाताओं को 27 साल बाद कांग्रेस को मौका देने की अपील की थी. कांग्रेस ने समाजवादी से गठबंधन किया था. लेकिन कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा. सिर्फ 7 सीटों पर उन्हें जीत मिली थी. इस बार ये चुनाव नेहरू-गांधी परिवार की एक और सदस्य प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है.

क्या होगा अखिलेश और मायावती का?
पिता मुलायम सिंह यादव के बीमार होने के कारण अखिलेश इस बार लगभग अकेले ही सपा को लेकर आगे चल रहे है. उन्होंने जयंत चौधरी की रालोद और कई छोटी लेकिन प्रभावशाली जाति-आधारित पार्टियों सहित, आक्रामक रूप से प्रचार कर रहे हैं और गठबंधन बना रहे हैं. 2017 में यूपी में सिर्फ 19 सीटें जीतने के बाद, मायावती अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण चुनाव का सामना कर रही हैं. पंजाब में उन्होंने अकाली दल के साथ गठबंधन किया है. 33% दलित वोट बैंक के साथ राज्य में बसपा की हमेशा उपस्थिति रही है, और 2022 के परिणाम बताएंगे कि क्या मायावती अभी भी अपने आधार पर हैं.

Tags: Akhilesh yadav, Assembly Election 2022, Rahul gandhi, Uttar Pradesh Assembly Election 2022

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