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सियासत में सीता' और 'रावण' के बाद अब 'राम' भी हुए भाजपाई

अभिनेता अरुण गोविल बीजेपी में शामिल हो गए.

अभिनेता अरुण गोविल बीजेपी में शामिल हो गए.

Assembly Elections 2021: महाभारत में द्रौपदी का किरदार निभाने वाली रूपा गांगुली वर्ष 2015 में बीजेपी में शामिल हुई थीं. इसके बाद अगले साल बीजेपी ने उन्‍हें राज्‍यसभा भेज दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 19, 2021, 2:08 AM IST
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नई दिल्ली. रामानंद सागर के मशहूर धारावाहिक 'रामायण' में 'राम' की भूमिका निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल गुरुवार को बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी का दामन थामने के तुरंत बाद अरुण गोविल ने कहा, 'यह फैसला 'जय श्रीराम' के नारे से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की 'चिढ़' के कारण लिया. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब इस तरह के धार्मिक सीरियल के किसी चर्चित पात्र ने बीजेपी का दामन थामा हो. इससे पहले कृष्‍ण और द्रौपदी जैसे कई फेसम किरदार भी बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं.

बता दें कि महाभारत में द्रौपदी का किरदार निभाने वाली रूपा गांगुली वर्ष 2015 में बीजेपी में शामिल हुई थीं. इसके बाद अगले साल बीजेपी ने उन्‍हें राज्‍यसभा भेज दिया था. पिछले विधानसभा चुनाव में हावड़ा नॉर्थ से उन्‍होंने चुनाव भी लड़ा था, लेकिन हार गई थी.

माता 'सीता' ने भी दर्ज की थी जीत
जबकि रामायण में ही माता सीता का रोल निभाने वालीं दीपिका चिखलिया ने लगभग दो दशक पहले बीजेपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था. दीपिका ने वर्ष 1991 में गुजरात के वडोदरा से कांग्रेस के रंजीत प्रताप सिंह को 30 हजार से ज्‍यादा वोट से शिकस्‍त दी थी.
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रामायण के 'रावण' अरविंद त्रिवेदी ने भी राजनीति में अपनी किस्‍मत आजमाई थी. 1991 के लोकसभा चुनाव में उन्‍होंने बीजेपी के टिकट पर गुजरात के साबरकांठा सीट से चुनाव लड़ा था. उन्‍होंने ने भी अपने प्रतिद्वंदी पर भारी मतों से हराया था.

बीजेपी के प्रवक्‍ता पद पर रहे हैं महाभारत के 'कृष्‍ण'
महाभारत में भगवान कृष्‍ण की भूमिका निभाने वाले नीतीश भारद्वाज भी बीजेपी के टिकट पर संसद पहुंच चुके हैं. उन्‍होंने वर्ष 1996 में बीजेपी के टिकट पर झारखंड के जमशेदपुर सीट से अपनी किस्‍मत आजमाई थी. ऐसा कहा जाता है कि जब वह चुनाव प्रचार के लिए जाते थे तो उन्‍हें देखने के लिए लोगों का भारी हुजूम उमड़ता था, लोग पैर छूकर उनसे आर्शीवाद लेते थे. इस चुनाव में उन्‍होंने भी आसान जीत दर्ज की थी. हालांकि अगले चुनाव में उन्‍हें हार का सामना करना पड़ा था. वह बीजेपी के प्रवक्‍ता पद पर भी रहे.
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