तेलंगाना में समय पूर्व चुनाव कवायद, केसीआर को होगा फायदा ?

तेलंगाना में समय पूर्व चुनाव कवायद, केसीआर को होगा फायदा ?
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (फाइल)

माना जा रहा है कि इस मामले में मुख्यमंत्री के सी आर बहुत संजीदा हैं और अपने नजदीकी लोगों से इस मामले में राय ले रहे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि समय पूर्व चुनाव से पार्टी को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 28, 2018, 4:47 PM IST
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रमेश गुत्तुला

तेलंगाना प्रदेश में इन दिनों राजनीतिक गतिविधियों में अचानक तेजी आयी है. इसका प्रमुख कारण यहां के मुख्यमंत्री के. चन्द्रशेखर राव द्वारा समय से पहले आगामी विधानसभा चुनाव करवाने के लेकर की जा रही कवायद है. इस मामले में अभी न तो उन्होंने कुछ कहा है और न ही उनकी पार्टी खुलकर कुछ बोल रही है. लेकिन जो गतिविधियां इन दिनों चल रही हैं, उसके अनुसार सभी यही मानकर चल रहे हैं कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री समय से पहले चुनाव चाहते हैं.

चुनाव अगर निर्धारित समय पर हों तो तेलंगाना में आगामी लोकसभा चुनाव के साथ ही सन 2019 में विधान सभा चुनाव भी होने हैं. यहां के राजनीतिक हल्कों में इन दिनों सिर्फ और सिर्फ एक ही चर्चा आम है कि समय से पहले चुनाव का फैसला टीआरएस क्यों ले रही है.



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माना जा रहा है कि इस समय पार्टी की जो मजबूत स्थिति जनता के बीच है उसका फायदा चुनाव में देखने को मिलेगा. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने एक सर्वे भी करवाया है, जिसके मुताबिक समय से पहले चुनाव होने से टीआरएस को 119 सीटों में से 78 सीटें मिल सकेंगी, जो कि मैजिक फिगर से अधिक है.

पार्टी पर नजर रखने वाले पत्रकारों और राजनीतिक विशलेषकों का मानना है कि समय पर चुनाव होने से पार्टी को कुछ नुकसान भी हो सकता है. यही कारण है कि पार्टी समय से पहले चुनाव को लेकर चहल कदमी कर रही है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री केसीआर की पार्टी टीआरएस 2 सितंबर को एक बहुत बड़ी आमसभा करने जा रही है.

पीएम मोदी के साथ केसीआर (फाइल)


हैदराबाद के बाहरी इलाके में होने जा रही इस सभा को लेकर पार्टी स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं. पार्टी के लोगों का कहना है कि इस आमसभा में करीब 25 लाख लोग भाग लेंगे. राजनीतिक विशलेषकों का मानना है कि केसीआर इस आमसभा में अपने दिल की बात जरूर रखेंगे.

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माना जा रहा है कि इस मामले में मुख्यमंत्री के सी आर बहुत संजीदा हैं और अपने नजदीकी लोगों से इस मामले में राय ले रहे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि समय पूर्व चुनाव से पार्टी को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है.
ऐसा मानने वाले लोगों का कहना है कि पूर्व में संयुक्त आन्ध्रप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन टी रामाराव और चन्द्र बाबू नायुडु भी समय पूर्व चुनाव करवा कर मुंह की खा चुके हैं.1989 में एनटी रामाराव समय पूर्व चुनाव में गये थे, उस चुनाव में कांग्रेस ने विजय पताका फहरायी था. उसी तरह सन 2003 में संयुक्त आन्ध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए नारा चन्द्रबाबू नायुडु ने भी समय से पहले विधानसभा चुनाव करवाये थे. लेकिन इस बार भी टीडीपी को मुंह की खानी पड़ी.

इस बार दस सालों के बाद कांग्रेस ने संयुक्त आन्ध्र प्रदेश में सत्ता हासिल की. इन दोनों उदाहरणों को देखते हुए मुख्यमंत्री केसीआर के हितेषी चाहते हैं कि समय पूर्व चुनाव की कोशिश न की जाए.कुछ लोगों का मानना है कि समय पूर्व चुनाव एन टी आर और नारा चन्द्रबाबू नायुडु को भले ही रास नहीं आये,लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए समय पूर्व चुनाव का फायदा मिला था. नरेन्द्र मोदी गोधरा कांड के बाद जुलाई 2002 में विधानसभा भंग कर समय पूर्व चुनाव में गये थे और उसका फायदा उन्हें मिला था.

मोदी 2002 में फिर गुजरात के मुख्यमंत्री बने थे. यही कारण है कि कुछ लोग जहां समय पूर्व चुनाव के पक्ष में हैं वहीं कई लोग पक्ष में नहीं है. यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा कि केसीआर क्या वाकई समय पूर्व चुनाव करवाएंगे. अगर समय पूर्व चुनाव होते हैं तो उसका फायदा या नुकसान तो वोटों की गिनती के बाद ही पता चल सकेगा.

 

 
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