एस्ट्राजेनेका वैक्सीन से जमे थक्के की समस्या पर राहत वाली खबर, आ गया इलाज

ऑस्ट्रेलिया में अब तक 21 लाख लोगों को एस्ट्राजेनका वैक्सीन के डोज़ दिए जा चुके हैं, इनमें से महज़ 21 मामलो में टीटीएस की शिकायत पाई गई यानि टीटीएस का खतरा 88 हज़ार में एक को है.  (File pic)

ऑस्ट्रेलिया में अब तक 21 लाख लोगों को एस्ट्राजेनका वैक्सीन के डोज़ दिए जा चुके हैं, इनमें से महज़ 21 मामलो में टीटीएस की शिकायत पाई गई यानि टीटीएस का खतरा 88 हज़ार में एक को है. (File pic)

वैक्सीन लगने के बाद कुछ साइड इफेक्ट नज़र आना सामान्य है. एस्ट्राजेनेका के मामले में, ये वैक्सीन लगने के शुरुआती दो दिन नज़र आते हैं. इनमें, सिरदर्द, बुखार (ठंड लगकर), मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आलस, उल्टी आना शामिल हैं. इसके लिए बस पैरासिटोमोल खानी होती है. कई मामलों में टीटीएस में खून का थक्का जमने की शिकायत असामान्य जगह जैसे पेट की वेन्स में और दिमाग में मिलती है.

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नई दिल्ली. देश में कोरोना से निपटने के लिए वैक्सीनेशन कार्यक्रम जारी है. इस बीच एस्ट्राजेनेका की कोविशील्ड वैक्सीन से खून के थक्के जमने की खबरों के बाद लोगों में वैक्सीन को लेकर एक डर समा गया और वे कम संख्या में वैक्सीनेशन के लिए टीका केंद्रों पर आने लगे. इस बीच, इस समस्या के निदान के लिए उपचार भी आ गया है.

बेकर हार्ट एंड डायबिटीज इंस्टीट्यूट और जेम्स मेक्फेदायन, बेकर हार्ट एंड डायबिटीज इंस्टीट्यूट मेलबर्न में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च 2021 में एस्ट्राजेनेका वैक्सीन से जुड़ा खून में थक्का जमने का पहला मामला सामने आया, उस दौरान रिपोर्ट के लेखकों के अनुसार ‘थक्का जमने की दिक्कत को, वैक्सीन-इंड्यूस्ड थ्रंबोटिक थ्रंबोसायटोपीनिया (वीआईटीटी) या थ्रंबोसिस विथ थ्रंबोसायटोपीनिया सिंड्रोम (टीटीएस) कहा गया.’ हमारी समझ के मुताबिक अब हम अच्छे से जानते हैं कि इसका इलाज कैसे करना है, इस तरह से हम मरीजों के हालात को बेहतर तरीके से सुधार पाएंगे.

ये कितना घातक या सामान्य?

अच्छी बात ये है कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन लगने के बाद खून में थक्का जमने की शिकायत बहुत कम है. ऑस्ट्रेलिया में अब तक 21 लाख लोगों को एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के डोज़ दिए जा चुके हैं, इनमें से महज़ 21 मामलों में टीटीएस की शिकायत पायी गई यानि टीटीएस का खतरा 88 हज़ार में एक को है. खास बात ये है कि यूके, यूरोप, मिडिल ईस्ट, और कनाडा से मिली खबरों में भी यही आंकड़े प्राप्त हुए हैं. हालांकि यूके से आई शुरुआती रिपोर्ट से मालूम चला था कि टीटीएस के मामलों में 20 फीसद जानलेवा हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से अभी तक मिली खबर के मुताबिक 24 टीटीएस में महज़ एक को जान का खतरा हो सकता है यानि ये आंकड़ा करीब 4 फीसद है.
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आखिर थ्रंबोसिस विथ थ्रंबोसायटोपीनिया सिंड्रोम है क्या बला?

हालांकि अभी तक इस पर अभी सटीक जानकारी तो नहीं मिली है, लेकिन ऐसा नज़र आता है कि वैक्सीन प्लेटलेट्स को सक्रिय कर देती है, प्लेटलेट्स हमारे खून में पायी जाने वाली छोटी-छोटी कोशिकाएं होती हैं जो खून बहने पर थक्का जमा कर खून को बहने से रोकती हैं. कुछ लोगों में सक्रिय प्लेटलेट एक प्रोटीन निकालती हैं जिसे प्लेटलेट फैक्टर 4 (पीएफ4) कहते हैं, ये एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के साथ मिल जाता है. ऐसा लगता है कि पीएफ4 के साथ मिलने ये इम्यून सिस्टम को और ज्यादा प्लेटलेट को सक्रिय करने के लिए उकसाता है. इस तरह से ये एक साथ हो जाते हैं और इनकी संख्या कम हो जाती है, जिसकी वजह से खून में थक्का (थ्रंबोसिस) और प्लेटलेट की संख्या में कमी (थ्रंबोसायटोपीनिया) हो जाती है. खून में थक्के जमना और प्लेटलेट्स की कमी टीटीएस की अहम वजह है. दूसरे थक्के जमने की प्रक्रिया से ये बिल्कुल अलग है.



टीटीएस की वजह से असामान्य इम्यून रिस्पांस मिल रहा है, जिससे ऐसे लोग जिन्हें दिल की बीमारी, स्ट्रोक, डीप वेन थ्रंबोसिस, पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में थक्का जमना) या जो पहले से ही खून पतला लेने की दवा ले रहे है उन्हें टीटीएस के बढ़ने का खतरा नहीं है. जांच और उपचार की बदौलत जो सबसे बड़ी सफलता मिली है वो यही है कि दिशानिर्देशों का पालन करके शुरुआती सावधानी से टीटीएस का पहचान कर उसका इलाज किया जा सकता है.

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खास बात ये है कि अब विशेष ब्लड थिनर (खून पतला करने की दवा) और इम्यून सिस्टम को कम करने वाली दवाओं के साथ इसका उपचार तुरंत शुरू किया जा सकता है.

कौन से साइड इफेक्ट को सामान्य समझें और थक्का जमने का कैसे पता चले?

वैक्सीन लगने के बाद कुछ साइड इफेक्ट नज़र आना सामान्य है. एस्ट्राजेनेका के मामले में, ये वैक्सीन लगने के शुरुआती दो दिन नज़र आते हैं. इनमें, सिरदर्द, बुखार (ठंड लगकर), मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आलस, उल्टी आना शामिल हैं. इसके लिए बस पैरासिटोमोल खानी होती है. कई मामलों में टीटीएस में खून का थक्का जमने की शिकायत असामान्य जगह जैसे पेट की वेन्स में और दिमाग में मिलती है. ये आमतौर पर वैक्सीन लगने के 4 से 30 दिनों के अंदर होती है. इसलिए एस्ट्राजेनेका लगने के बाद तेज सिरदर्द, धुंधला या दो दो दिखना, सांस फूलना, पेट, पीठ या छाती में तेज दर्द, सूजन, लाल चकत्ते होना, पैरों में असामान्य दर्द खून का रिसाव जैसे लक्षण अगर 4 से 30 दिनों के भीतर नज़र आएं तो तुरंत आपातकाल चिकित्सा में जाना चाहिए. हालांकि टीटीएस बहुत कम होता है लेकिन फिर भी अगर किसी को चिंता है तो उसे डॉक्टर से परामर्श ले लेना चाहिए.

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