इंजीनियरिंग कर नौकरी ढूंढ रही थीं चंद्राणी, बन गईं सबसे कम उम्र की महिला सांसद

चंद्राणी मुर्मू कुछ महीने पहले तक किसी अन्य लड़की की तरह ही 2017 में भुवनेश्वर स्थित एसओए विश्वविद्यालय से बी. टेक पूरा करने के बाद नौकरी ढूंढ रही थीं और कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रही थीं.

News18Hindi
Updated: May 27, 2019, 1:45 PM IST
इंजीनियरिंग कर नौकरी ढूंढ रही थीं चंद्राणी, बन गईं सबसे कम उम्र की महिला सांसद
चंद्राणी मुर्मू कुछ महीने पहले तक किसी अन्य लड़की की तरह ही 2017 में भुवनेश्वर स्थित एसओए विश्वविद्यालय से बी. टेक पूरा करने के बाद नौकरी ढूंढ रही थीं और कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रही थीं.
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Updated: May 27, 2019, 1:45 PM IST
लोकसभा चुनाव में जीतकर इस बार 78 महिलाएं संसद पहुंची हैं. जो कि अब तक की सबसे ज़्यादा संख्या है. ओडिशा से इस बार सबसे ज़्यादा 33 प्रतिशत महिला उम्मीदवार संसद पहुंची हैं. इतना ही नहीं ओडिशा ने सबसे कम उम्र की महिला सांसद को भी लोकसभा भेजा है.

ओडिशा की ओर से संसद में देश की सबसे कम उम्र की महिला सांसद 25 वर्षीय चंद्राणी मुर्मू पहुंची हैं. मुर्मू ने इंजीनियरिंग की है. वह बीजू जनता दल (बीजद) के टिकट पर क्योंझर लोकसभा सीट (आरक्षित) से चुनाव लड़कर सदन पहुंची हैं.



दो बार से चुनाव जीत रहे नेता को दी मात
25 साल, 11 माह उम्र की चंद्राणी मुर्मू लोकसभा में इतिहास लिखने जा रही हैं. 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में मुर्मू ने 67,822 वोटों के अंतर से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दो बार सांसद रहे अनंत नायक को हराया है.

चंद्राणी मुर्मू कुछ महीने पहले तक किसी अन्य लड़की की तरह ही 2017 में भुवनेश्वर स्थित एसओए विश्वविद्यालय से बी. टेक पूरा करने के बाद नौकरी ढूंढ रही थीं और कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रही थीं. वह चार नौकरियों के लिए अप्लाई कर चुकी हैं और लगभग हर सरकारी नौकरी के एग्जाम दे चुकी हैं.

विश्वास नहीं था कि मिल जाएगा टिकट
उन्होंने बताया कि 31 मार्च को अचानक उनके मामा ने फोन करके पूछा कि क्या वह चुनाव लड़ सकती हैं. इस पर  चंद्राणी मुर्मू ने हां कर दिया. चंद्राणी ने कहा, ''मैं अपनी इंजीनियरिंग पूरा करने के बाद नौकरी ढूंढ रही थी. मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं राजनीति करूंगी और सांसद बनूंगी. मेरा नामांकन अप्रत्याशित था.''
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चंद्राणी की मानें तो इस घटना के अगले दिन उनके पास फोन आया कि सीएम नवीन पटनायक उनसे मिलना चाहते हैं. उस वक्त तक उन्हें टिकट मिलने की कोई संभावना नहीं दिख रही थी. मुलाकात के अगले दिन दो अप्रैल को उनका नाम घोषित हो गया. चंद्राणी की मानें तो वह पहली बार प्रचार करने के लिए ही हेलीकॉप्टर में बैठीं थीं.

जीत के बाद चंद्राणी मुर्मू ने क्योंझर के लोगों और बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक का शुक्रिया अदा किया है. चंद्राणी के नाना हरिहर सोरेन 1980-1989 तक दो बार कांग्रेस से सांसद रहे. हालांकि,  चंद्राणी मुर्मू का परिवार राजनीति में सक्रिय नहीं है.

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