लाहौर में ऐतिहासिक गुरुद्वारे को मस्जिद में बदलने का प्रयास, भारत ने दी तीखी प्रतिक्रिया

लाहौर में ऐतिहासिक गुरुद्वारे को मस्जिद में बदलने का प्रयास, भारत ने दी तीखी प्रतिक्रिया
लाहौर में एक गुरुद्वारे को मस्जिद में बदलने का प्रयास किया गया (सांकेतिक तस्वीर)

इस धर्मस्थल की भूमि को मस्जिद में बदलने के कथित प्रयासों पर पंजाब के CM अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने भारत सरकार से इस मामले को पाकिस्तान (Pakistan) के सामने उठाने का आग्रह किया था.

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(अनुराधा शुक्ला)

नई दिल्ली. सहिष्णुता के मुद्दे पर भारत को पाठ पढ़ाने वाले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अपने ही देश के कट्टपंथियों के सामने हथियार डाल चुके हैं. कुछ दिनों पहले पाकिस्तान में भगवान बुद्ध की एक प्राचीन मूर्ति को तोड़ दिया गया. अब वहां पर एक ऐतिहासिक गुरुद्वारे को मस्जिद में बदलने का प्रयास किया जा रहा है. इसे लाहौर (Lahore) के व्यस्त नौलखा बाजार में शहीदी स्थान गुरुद्वारा तारू सिंह (Kartarpur Sahib Gurdwara) के नाम से जाना जाता है.

इस धर्मस्थल की भूमि को मस्जिद में बदलने के कथित प्रयासों की रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Punjab Chief Minister Amarinder Singh) ने पहले भारत सरकार से इस मामले को पाकिस्तान (Pakistan) के साथ उठाने और ऐसे स्थानों को किसी भी तरह के प्रयासों के खिलाफ संरक्षित करने के लिए सुनिश्चित करने का आग्रह किया था. एक ट्वीट में, उन्होंने इस मामले में विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) से हस्तक्षेप करने के लिए कहा था जिसके बाद पाकिस्तान उच्चायोग (Pakistan High Commission) में एक मजबूत विरोध दर्ज कराया गया था.



भारतीय विदेश मंत्रालय दर्ज करा चुका है जोरदार विरोध
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने सोमवार को कहा, “लाहौर के नौलखा बाज़ार में भाई तारू सिंह जी की शहादत की जगह गुरुद्वारा शहीदी स्थान’ की कथित घटना पर पाकिस्तान उच्चायोग के साथ जोरदार विरोध दर्ज कराया गया था. इसे मस्जिद शाहिद गंज की जगह बताया जा रहा था और इसे मस्जिद में बदलने के लिए प्रयास किये जा रहे थे."

पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को इमरान सरकार से उम्मीदें
हालांकि, पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इमरान खान सरकार से कुछ लोगों के इस तरह के प्रयासों को रोकने और सिख-मुस्लिम भाईचारे को खराब न करने के लिए कदम उठाने की उम्मीदें लगाए हुए है.

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भाई तारू सिंह का जन्म अमृतसर में 1720 में एक संधू जाट परिवार में हुआ था. वे तत्कालीन मुगल शासकों द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयासों के खिलाफ खड़े हुए और इस्लाम में धर्मांतरण से इनकार करने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया. सिख धर्म के मूल्यों की रक्षा के लिए अडिग रहने के चलते इसी जगह मुगलों ने उनके बाल काटने की जगह उनका सिर काट दिया गया था.
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