जज बोले- बाबरी की घटना अचानक हुई थी, फोटो से गुनहगार नहीं ठहरा सकते, पढ़ें फैसले की बड़ी बातें

इस केस में कुल 48 लोगों पर आरोप लगे थे, जिनमें से 17 की मौत हो चुकी है. (News18)
इस केस में कुल 48 लोगों पर आरोप लगे थे, जिनमें से 17 की मौत हो चुकी है. (News18)

Babri Masjid Demolition Verdict: सीबीआई कोर्ट के जज एसके यादव ने लालकृष्ण आडवाणी (LK Advani), मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi), उमा भारती (Uma Bharti) समेत 32 आरोपियों को बरी कर दिया है. इस केस में कुल 48 लोगों पर आरोप लगे थे, जिनमें से 17 की मौत हो चुकी है.

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  • Last Updated: September 30, 2020, 2:52 PM IST
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Babri Masjid Demolition Verdict: अयोध्या में 28 साल पुराने बाबरी (Babri Demolition Verdict by CBI Court) का विवादित ढांचा ढहाए जाने के मामले में लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया. सीबीआई कोर्ट के जज एसके यादव ने लालकृष्ण आडवाणी (LK Advani), मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi), उमा भारती (Uma Bharti) समेत 32 आरोपियों को बरी कर दिया है. इस केस में कुल 48 लोगों पर आरोप लगे थे, जिनमें से 17 की मौत हो चुकी है. फैसला सुनाते हुए जज एके यादव ने कहा कि बाबरी की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी. ये घटना अचानक हुई थी. सिर्फ तस्वीरों के आधार पर किसी को गुनहगार नहीं ठहरा सकते.



पढ़ें बाबरी मस्जिद विध्ंवस केस में सीबीआई स्पेशल कोर्ट के फैसले की खास बातें:-
6 दिसंबर 1992 को मस्जिद को गिराए जाने के मामले में कुल 49 आरोपी थे, जिसमें से 17 आरोपियों की मौत हो चुकी है. ऐसे में बाकी बचे सभी 32 मुख्य आरोपियों पर फ़ैसला आया. सभी आरोपी बरी कर दिए गए.
इस मामले में मुख्य आरोपियों में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह, विनय कटियार, राम विलास वेदांती, ब्रज भूषण शरण सिंह आदि शामिल हैं. इनके अलावा महंत नृत्य गोपाल दास, चम्पत राय, साध्वी ऋतम्भरा, महंत धरमदास भी मुख्य आरोपियों में थे.
फैसले में जज एसके यादव ने कहा कि बाबरी मस्जिद को लेकर कुछ भी पहले से तय प्लान के तहत नहीं हुआ था. फोटो, वीडियो, फोटोकॉपी में जिस तरह से सबूत दिए गए हैं, उनसे कुछ साबित नहीं होता है. तस्वीरों के निगेटिव पेश नहीं किए गए.
अदालत ने कहा कि बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में टेम्पर्ड सबूत पेश किए गए. गुंबद पर कुछ असामाजिक तत्व चढ़े. आरोपियों ने भीड़ को रोकने की कोशिश की थी.
फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि अशोक सिंघल ढांचा सुरक्षित रखना चाहते थे, क्योंकि वहां मूर्तियां थीं. कारसेवकों के दोनों हाथ व्यस्त रखने के लिए जल और फूल लाने को कहा गया था. अखबारों में लिखी बातों को सबूत नहीं मान सकते.
अदालत से बरी होने के बाद लाल कृष्ण आडवाणी ने ANI से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा- 'सीबीआई कोर्ट के फैसले का तहेदिल से स्वागत करता हूं. इस फैसले ने राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रति मेरे निजी विश्वास और बीजेपी की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है.'
मुस्लिम पक्ष की तरफ से जफरयाब जीलानी ने कहा कि ये फैसला कानून और हाईकोर्ट दोनों के खिलाफ है. विध्वंस मामले में जो मुस्लिम पक्ष के लोग रहे हैं उनकी तरफ से हाईकोर्ट में अपील की जाएगी.
फैसला आने पर मुरली मनोहर जोशी ने कहा, 'आज अदालत ने ऐतिहासिक फैसला दिया है. इससे साबित हो गया कि 6 दिसंबर को अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने को लेकर कोई साजिश नहीं हुई थी. हमारे कार्यक्रम और रैलियां इस साजिश का हिस्सा नहीं थीं. हम खुश हैं. पूरा देश आज प्रसन्न है. अब हर कोई रामजन्मभूमि मंदिर के निर्माण को लेकर उत्साहित है.'
लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, शिवसेना के पूर्व सांसद सतीश प्रधान, महंत नृत्य गोपाल दास और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्टरूम से जुड़े. इनके अलावा अन्य सभी 26 आरोपी कोर्टरूम में मौजूद थे.
बाबरी केस विशेष जज एसके यादव के कार्यकाल का अंतिम फैसला रहा. वे 30 सितंबर 2019 को रिटायर होने वाले थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 30 सितंबर 2020 तक (फैसला सुनाने तक) सेवा विस्तार दिया.
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