अयोध्या मामला : सातवें दिन दी गई दलील, विवादित स्थल पर है देवताओं की आकृति

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस समय अयोध्या (Ayodhya) में 2.77 एकड़ विवादित भूमि के मालिकाना हक के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही है.

News18Hindi
Updated: August 16, 2019, 2:16 PM IST
अयोध्या मामला : सातवें  दिन दी गई दलील, विवादित स्थल पर है देवताओं की आकृति
सुप्रीम कोर्ट को दी गई दलील, विवादित स्थल पर है देवताओं की आकृति
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Updated: August 16, 2019, 2:16 PM IST
अयोध्या (Ayodhya) में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद (ram janmabhoomi-babri masjid land dispute case) की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में शुक्रवार को सातवें दिन भी सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान रामलला विराजमान की ओर से दलील दी गई कि विवादित स्थल पर देवी-देवताओं की अनेक आकृतियां मिली हैं. अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान कार्बन डेटिंग पर भी बहस हुई.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ से रामलला विराजमान के वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने अपनी दलीलों के समर्थन में विवादित स्थल का निरीक्षण करने के लिए अदालत द्वारा नियुक्त कमिश्नर की रिपोर्ट के अंश पढ़े. संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं.

संविधान पीठ से वैद्यनाथन ने कहा कि अदालत की ओर से नियुक्त किए गए कमिश्नर ने 16 अप्रैल, 1950 को विवादित स्थल का निरीक्षण किया था और उन्होंने वहां भगवान शिव की आकृति वाले स्तंभों की उपस्थिति का वर्णन अपनी रिपोर्ट में किया था. वैद्यनाथन ने कहा कि मस्जिद के खंबों पर नहीं, बल्कि मंदिरों के स्तंभों पर ही देवी देवताओं की आकृतियां मिलती हैं. उन्होंने बताया कि पक्के निर्माण में जहां तीन गुम्बद बनाए गए थे, वहां बाल रूप में राम की मूर्ति थी. उन्होंने 1950 की निरीक्षण रिपोर्ट के साथ स्तंभों पर उकेरी गई आकृतियों के वर्णन के साथ अयोध्या में मिला एक नक्शा भी पीठ को सौंपा.

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अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए मंगाए गए पत्थर


उन्होने कहा कि इन तथ्यों से पता चलता है कि यह हिन्दुओं के लिए धार्मिक रूप से एक पवित्र स्थल था. वैद्यनाथन ने ढांचे के भीतर देवाओं के तस्वीरों का एक एलबम भी पीठ को सौंपा और कहा कि मस्जिदों में इस तरह के चित्र नहीं होते हैं. शीर्ष अदालत इस समय अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि के मालिकाना हक के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई कर रही है.

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कार्बन डेटिंग को लेकर भी हुई बहस
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सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान कार्बन डेटिंग पर भी बहस हुई. रामलला विराजमान की तरफ से दलील दी गई कि मूर्ति को छोड़ दूसरे मेटेरियल का कार्बन डेटिंग की गई थी. इस पर जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हमने दूसरे मेटेरियल नहीं, बल्कि मूर्ति की कार्बन डेटिंग के बारे में पूछा है. इस पर मुस्लिम पक्ष की ओर से बताया गया कि ईटों की कार्बन डेटिंग नहीं की जा सकती है. कार्बन डेटिंग तभी हो सकती है जब उसमें कार्बन की मात्रा हो. रामलला के वकील की तरफ से भी कहा गया कि देवता की कार्बन डेटिंग नहीं हुई है. कार्बन डेटिंग से इस बात का अंदाजा लगाना काफी आसान हो जाता है कि वह कितना पुराना है.
First published: August 16, 2019, 2:16 PM IST
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