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Ayodhya Case: 4 से 17 नवंबर के बीच आ सकता है सुप्रीम कोर्ट का दूसरा सबसे बड़ा फैसला

Ayodhya Case: 4 से 17 नवंबर के बीच आ सकता है सुप्रीम कोर्ट का दूसरा सबसे बड़ा फैसला

4 से 17 नवंबर के बीच आने की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट सुना सकती है फैसला.

4 से 17 नवंबर के बीच आने की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट सुना सकती है फैसला.

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad) की लखनऊ पीठ (Lucknow Bench) ने अयोध्या (Ayodhya) की विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन हिस्‍सों में बांटने का फैसला दिया था. अब हर किसी को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले का इंतजार है.

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ (Constitution Bench) ने दशकों पुराने अयोध्या जमीन विवाद (Ayodhya Land Dispute) पर बुधवार को सुनवाई पूरी कर ली. 40 दिन तक चली दूसरी सबसे लंबी सुनवाई के बाद संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया. उम्मीद की जा रही है कि इस मामले में 4 नवंबर से 17 नवंबर के बीच फैसला आ सकता है, क्योंकि 17 नवंबर को सीजेआई गोगोई नवंबर को रिटायर हो रहे हैं.

    अयोध्या मामले पर सुनवाई पूरी होने के बाद गुरुवार को पांच जजों की ये बेंच चेंबर में बैठेगी. बंद दरवाजे के पीछे होने वाली इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता पैनल की रिपोर्ट को लेकर आगे के रास्ते पर विचार करेंगे. वहीं कोर्ट सुन्नी वक्फ बोर्ड के दावा वापस लेने पर भी सुप्रीम कोर्ट चर्चा कर सकता है.

    अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद हिंदू महासभा के वकील वरुण सिन्हा ने मीडिया से बात की. उन्होंने बताया कि अयोध्या मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनी जा चुकी हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस ऐतिहासिक मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है और स्पष्ट किया है कि इस मामले में 23 दिनों के भीतर फैसला सुना दिया जाएगा. बता दें कि केश्वानंद भारती केस के बाद अयोध्या जमीन विवाद का मामला सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में सबसे ज्यादा दिनों तक चलने वाला बन गया है. केश्वानंद भारती मामला सुप्रीम कोर्ट में 68 दिनों तक चला था, जबकि अयोध्या मामले की सुनवाई 40 दिनों तक चली थी.

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    हिंदू पक्ष ने भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि खुदाई में मंदिर के सबूत मिले हैं.


    बता दें कि मामला तब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जब इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 30 सितंबर 2010 को दिए फैसले में विवादित 2.77 एकड़ भूमि को तीन हिस्‍सों में बांट दिया. सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक चली सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की ओर से दर्जनों दलीलें पेश की गईं. उनमें हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों की 10 दलीलें अहम हैं.

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    अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए लाए गए पत्थर


    हिंदू पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में दी दलील
    हिंदू पक्षकारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा गया कि सदियों पहले अयोध्‍या में एक मंदिर बनाया गया था. माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाराजा विक्रमादित्‍य ने कराया था, जिसका पुनर्निर्माण 11वीं सदी में किया गया. बाबर ने 1526 में इस ऐतिहासिक मंदिर को ध्‍वस्‍त कर दिया. संभव है कि मंदिर को 17वीं सदी में औरंगजेब ने ध्‍वस्‍त किया हो. दूसरी मुख्‍य दलील में हिंदू पक्ष ने कहा था कि स्‍कंदपुराण, कई यात्रा वृतांतों और ऐतिहासिक अभिलेखों से स्‍पष्‍ट होता है कि लोगों के विश्‍वास के मुताबिक अयोध्‍या भगवान राम की जन्‍मभूमि है.

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    सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन तक चली ये दूसरी सबसे लंबी सुनवाई है.


    मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में कही ये बात
    मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के सामने दी दलील में कहा कि विवादित जमीन पर 1528 से मस्जिद है. रिकॉर्ड से भी मस्जिद के अस्तित्‍व की बात पुख्‍ता हो चुकी है. मस्जिद पर 1855, 1934 में हमले किए गए. साल 1949 में विवादित जमीन पर जबरन कब्जे का मामला दर्ज किया गया था. ब्रिटिश हुकूमत ने भी मस्जिद को बाबर की ओर से दी जाने वाली आर्थिक मदद का सत्‍यापन किया था, जिसे नवाबों ने भी जारी रखा था. मस्जिद के अस्तित्‍व को 1855 के मुकदमे से जुड़े दस्‍तावेजों में भी सत्‍यापित किया गया है. इस जगह का मालिकाना हक मुस्लिमों के पास था.

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    Tags: Allahabad high court, Ayodhya Land Dispute, Ayodhya Mandir, CJI Ranjan Gogoi, Justice Ranjan Gogoi, Supreme Court, Supreme court of india

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