अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष ने रखी ये 10 दमदार दलीलें

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में राम मंदिर बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) मामले पर हर रोज सुनवाई चल रही है. हिंदू पक्ष कोर्ट के सामने अपनी दलील रख चुका है अब बारी मुस्लिम पक्ष की है.

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Updated: August 31, 2019, 7:47 PM IST
अयोध्या केस: सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष ने रखी ये 10 दमदार दलीलें
सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर मामले पर हर रोज सुनवाई कर रहा है. (फाइल फोटो)
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Updated: August 31, 2019, 7:47 PM IST
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में राम मंदिर (Ram Mandir) मामले में हर रोज सुनवाई हो रही है. इस मामले में 6 अगस्त से हर रोज सुनवाई शुरू हुई थी और अब हिन्दू पक्ष की दलीलें पूरी हो चुकी हैं. 16 दिन की सुनवाई के दौरान रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा (Nirmohi Akhara) के वकीलों ने कोर्ट के सामने अपने तर्क रखे और विवादित जमीन पर अपना अधिकार बताया. सुनवाई के दौरान कई दिलचस्प दलीलें सुनने को मिलीं तो कोर्ट ने भी कुछ ऐसे सवाल पूछे जिन्होंने खूब सुर्खियां बंटोरी.

चलिए जानते हैं कि देश के सबसे बड़े मुकदमे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद की अब तक हुई सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष के वकीलों ने कैसी-कैसी दलीलें सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी.

1. 1949 से अदा नहीं हुई नमाज
सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि विवादित भूमि पर 1949 के बाद नमाज नहीं हुई, इसलिए इस पर मुस्लिम पक्ष का दावा नहीं बनता है. उन्होंने कहा कि जहां नमाज अदा नहीं की जाती है, वह स्थान मस्जिद नहीं माना जा सकता.

2. डकैती में गायब हो गया रिकॉर्ड
कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े से जानना चाहा कि विवादित स्थल पर अपना कब्जा साबित करने के लिए क्या उसके पास कोई राजस्व रिकॉर्ड और मौखिक साक्ष्य हैं. संविधान पीठ ने कहा कि अब हम कब्जे के मुद्दे पर हैं. आपको अपना कब्जा साबित करना है. यदि आपके पास अपने पक्ष में कोई राजस्व रिकॉर्ड है तो यह आपके पक्ष में बहुत अच्छा साक्ष्य है. इसके जवाब में निर्मोही अखाड़े की ओर से कहा गया कि 1982 में एक डकैती हुई थी, जिसमें सारे रिकॉर्ड चोरी हो गए हैं.

3. जन्मस्थान को माना जाए इंसान
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सुप्रीम कोर्ट ने तीसरे दिन राम लला विराजमान के वकील से पूछा कि देवता के जन्मस्थान को मामले में कानूनी व्यक्ति के तौर पर कैसे माना जा सकता है? क्या जन्मस्थान वादी हो सकता है? इस पर वकील परासरन ने कहा कि जन्मस्थली भी कानूनी व्यक्ति की तरह है, वह वादी हो सकता है.

4. कोर्ट ने राम के वंशजों के बारे में पूछा
सुप्रीम कोर्ट ने 9 अगस्त को रामलला के वकीलों से सवाल किया कि क्या भगवान राम का कोई वशंज अयोध्या या इस दुनिया में है? इस पर वकील ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है. हालांकि बाद में कुछ लोगों ने खुद के भगवान राम का वंशज होने का दावा भी किया.



5. अंग्रेजों ने भी अयोध्या में बताया था राम मंदिर
राम लला के वकील वैद्यनाथ ने कोर्ट में दलील दी कि अलग-अलग समय के ब्रिटिश रिकॉर्ड अयोध्या और राम के संबंधों की पुष्टि करते हैं और बताते हैं कि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी. उन्होंने ब्रिटिश सर्वेयर एम मार्टिन और जोसेफ टिफेंथलर का हवाला दिया, जिन्होंने कहा कि लोगों का विश्वास है कि अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था. यहां से ये सवाल भी उठा कि मंदिर कब तोड़ा गया? जिसके बाद बाबर और औरंगजेब दोनों का नाम आया.

6. सड़क पर नमाज पढ़ने से वह मस्जिद नहीं हो जाती
जब हिंदू पक्ष के वकील ने कोर्ट में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के एक सर्वे का जिक्र करते हुए बताया कि नीचे विशाल मंदिर का ढांचा था, तो कोर्ट ने सवाल किया कि ढांचा धार्मिक स्ट्रक्चर था, इसे साबित करें. इस पर वकील ने बताया कि खुदाई में जो खंभे मिले थे उसमें राम के बाल स्वरूप की तस्वीर दिखती थी. उन्होंने कई अन्य तस्वीरों का भी जिक्र किया और कहा कि मस्जिदों में तस्वीरें नहीं होती. वकील ने कहा कि जो भी स्ट्रक्चर था वह कभी मस्जिद नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह मंदिर पर था. उन्होंने कहा कि नमाज सड़कों पर भी पढ़ी जाती है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि उनको मालिकाना हक मिल जाएगा.

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7. मस्जिद बनने के बावजूद पूजा करते रहे लोग
रामलला विराजमान की ओर से कोर्ट में आठवे दिन दलील दी गई कि मस्जिद बनाए जाने के बाद भी हिंदू वहां पूजा करते थे.



8. नाबालिग हैं रामलला
रामलला विराजमान के वकील एसएन वैद्यनाथन ने कोर्ट में बताया कि अगर वहां पर कोई मंदिर नहीं था, कोई देवता नहीं है तो भी लोगों की जन्मभूमि के प्रति आस्था काफी है. वहां पर मूर्ति रखना उस स्थान को पवित्रता प्रदान करता है. उन्होंने आगे कहा कि अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं. नाबालिग की संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही छीना जा सकता है.

9. निर्मोही अखाड़े ने मांगा पूजा का अधिकार
निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील कुमार ने कोर्ट में दलील दी कि हम देव स्थान का मैनेजमेंट करते हैं और पूजा का अधिकार केवल जन्मस्थान का मैनेजमेंट करने वाले को दिया जा सकता है, इसलिए हम पूजा का अधिकार चाहते हैं.

10. बेटे कुश ने बनवाया था राम का मंदिर
सुनवाई के 14वें दिन हिंदू पक्षकार के वकील ने कहा कि बाबरनामा में कहीं भी जिक्र नहीं है कि मीर बकी ने मस्जिद बनवाई थी. उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई थी.

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First published: August 31, 2019, 6:13 PM IST
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