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Ayodhya Verdict: 93 साल के इस वकील ने 40 साल तक लड़ी रामलला की लड़ाई!

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Updated: November 10, 2019, 12:05 AM IST
Ayodhya Verdict: 93 साल के इस वकील ने 40 साल तक लड़ी रामलला की लड़ाई!
अयोध्या मामले में हिंदुओं का पक्ष रखने वाले वकील के पारसरण (बीच में) अपनी टीम के साथ

वरिष्ठ वकील के. पारासरन (K Parasaran) ने हिंदू पक्ष की तरफ से दलीलें रखी थीं. पूर्व अटॉर्नी जनरल रह चुके पारासरन लंबे वक्त से बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि (Babri Masjid-Ram Janmabhoomi dispute) पर हिंदू पक्ष की ओर से दलीलें कोर्ट में रख रहे थे.

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  • Last Updated: November 10, 2019, 12:05 AM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या मामले (Ayodhya Case) पर देश का इंतजार आखिरकार खत्म हो गया. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पांच जजों की संविधान बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल रामलला को दिया है. कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड (मुस्लिम पक्ष) को मस्जिद के लिए केंद्र सरकार 5 एकड़ जमीन मुहैया कराए. वहीं, निर्मोही अखाड़ा के सभी दावे खारिज हो गए. रामलला का 'वनवास' खत्म कराने में 93 साल के एक शख्स का भी योगदान है.

दरअसल, वरिष्ठ वकील के. पारासरन (K Parasaran) ने हिंदू पक्ष की तरफ से दलीलें रखी थीं. पूर्व अटॉर्नी जनरल रह चुके पारासरन लंबे वक्त से पूरी लगन के साथ बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि (Babri Masjid-Ram Janmabhoomi dispute) पर हिंदू पक्ष की ओर से दलीलें कोर्ट में रख रहे थे.

के. पारासरन की टीम में कई युवा वकील हैं. पारासरन बताते हैं कि वह हमेशा से ही भगवान राम के साथ आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस करते हैं. इसलिए उन्होंने ये केस लड़ा. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई से पहले उन्होंने इस केस के हर पहलू पर बारीकी से काम किया. पारासरन रोजाना सुबह 10:30 बजे कानूनी दांवपेचों को समझने में जुट जाते थे. उनका काम देर शाम तक लगातार चलता रहता था.


ये है पारासरन की टीम
पारासरन की टीम भी इस बढ़ती उम्र में उनकी लगन, मेहनत और जुझारूपन को देखकर प्रेरित होती थी. वकील पीवी योगेश्वरन, अनिरुद्ध शर्मा, श्रीधर पोट्टाराजू, अदिति दानी, अश्विन कुमार डीएस और भक्ति वर्धन सिंह पारासरन की टीम के सदस्य थे.

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सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान बेंच ने फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल रामलला को दिया है.

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अदालत में राजीव धवन से था आमना-सामना
टीम के सदस्य बताते हैं कि पारासरन इस केस से इतने जुड़े हुए थे कि उन्हें अयोध्या मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें मुंहजबानी याद हैं. किस तारीख में कौन सी घटना हुई थी, ये सब वह उंगली पर गिनकर बता सकते हैं. पारासरन ने अयोध्या पर इतनी रिसर्च की है और इतना कुछ पढ़ा है कि उस पर एक किताब भी लिख सकते हैं.

अयोध्या पर सुनवाई के दौरान के. पारासरन का सामना मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन से था. धवन को अपने अकाट्य तर्कों के लिए जाना जाता है. लेकिन, पारासरन ने 40 साल तक जिरह करते हुए कभी अपना आपा नहीं खोया. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब राजीव धवन ने हिंदू पक्ष की दलीलों की कथित कॉपी फाड़ दी थी, तब भी पारासरन शांत और सौम्य बने रहे.


16 अक्टूबर को जब सर्वोच्च अदालत में अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी हुई, तब भी के. पारासरन ने 15 मिनट का इंतजार किया और राजीव धवन से मुलाकात की. इस दौरान दोनों वकीलों के बीच केस को लेकर बात हुई और फिर उन्होंने साथ में तस्वीरें भी खिंचवाईं. इसके जरिए पारासरन का संदेश साधारण मगर बिल्कुल साफ था. उन्होंने ये बताने की कोशिश की थी कि वकील कोर्टरूम में भले ही एक-दूसरे के खिलाफ लड़ सकते हैं, लेकिन देश को जानना चाहिए कि वो असल में एक-दूसरे के खिलाफ नहीं हैं.

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First published: November 9, 2019, 3:21 PM IST
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