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Ayodhya case Verdict : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी खुले हैं ये 2 कानूनी विकल्प

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Updated: November 9, 2019, 12:23 PM IST
Ayodhya case Verdict : सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी खुले हैं ये 2 कानूनी विकल्प
सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर सुनाया सबसे बड़ा फैसला

सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के फैसले के 9 साल बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आज अयोध्‍या विवाद मामले (Ayodhya Land Dispute) में अपना फैसला (verdict) सुना दिया है.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 12:23 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शनिवार को अयोध्‍या विवाद मामले (Ayodhya Land Dispute) में अपना फैसला (verdict) सुना दिया. सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के फैसले के 9 साल बाद सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने  इस फैसले को भले ही अंतिम निर्णय के तौर पर माना जा रहा है, लेकिन इसके बाद भी दोनों पक्षों के पास कानूनी विकल्प खुले होंगे.

सुप्रीम कोर्ट में आज सुनाए गए फैसले के 30 दिन के भीतर पुनर्विचार याचिका यानी रिव्यू पिटिशन दाखिल की जा सकती है. इसके बाद क्यूरेटिव पिटिशन भी दाखिल की जा सकती है. क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल करने के लिए भी 30 दिन का वक्त मिलता है. फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करने वाली पार्टी को यह साबित करना होता है कि कोर्ट के फैसले में कहां त्रुटि है. पुनर्विचार याचिका के दौरान वकीलों की ओर से किसी भी तरह की जिरह नहीं की जाती. इसमें पहले दिए गए फैसले की फाइलों और रिकॉर्ड्स पर ही विचार किया जाता है.

बता दें कि रिव्यू पिटिशन के दौरान दिए गए फैसले पर भी अगर किसी पक्ष को ऐतराज होता है तो वह क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल कर सकता है. क्यूरेटिव पिटिशन में सुनवाई के दौरान किसी तथ्य पर विचार नहीं किया जाता बल्कि कानूनी पहलुओं पर ही विचार किया जाता है.

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क्यूरेटिव पिटिशन पर कैसे होती है सुनवाई
कानून के जानकारों के मुताबिक क्यूरेटिव पिटिशन का मतलब बड़ी पीठ की सुनवाई से है. क्यूरेटिव पिटिशन के मामले में तीन वरिष्ठ जज मामले की सुनवाई करते हैं, लेकिन उनके साथ फैसला देने वाले जज भी शामिल होते हैं. क्यूरेटिव पिटिशन के दौरान तीन वरिष्ठ जज और तीन मौजूदा जजों को मिलाकर 6 जज मामले की सुनवाई करते हैं.

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First published: November 9, 2019, 11:47 AM IST
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