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Ayodhya Verdict: कौन हैं रामलला विराजमान, जिन्हें मिली अयोध्या की विवादित जमीन

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Updated: November 9, 2019, 1:48 PM IST
Ayodhya Verdict: कौन हैं रामलला विराजमान, जिन्हें मिली अयोध्या की विवादित जमीन
हिंदू परंपरा के अनुसार, भगवान को वैध व्यक्ति माना गया है, जिनके अधिकार और कर्तव्य होते हैं.

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों वाली संवैधानिक बेंच ने अयोध्या पर ये ऐतिहासिक फैसला दिया. इस बेंच में प्रधान न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई, जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस.ए. नजीर शामिल रहे. सीनियर एडवोकेट के. पारासरन (93) सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान का पक्ष रख रहे थे.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 1:48 PM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या मामले (Ayodhya Case) पर देश की शीर्ष अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने विवादित स्थल रामलला विराजमान (Ram Lalla Virajman) को दिया है. कोर्ट ने केंद्र को आदेश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड (मुस्लिम पक्ष) को मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन दी जाए. मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में कहीं भी 5 एकड़ जमीन आवंटित की जाएगी. वहीं, अदालत ने शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा के दावे खारिज कर दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों वाली संवैधानिक बेंच ने अयोध्या पर ये ऐतिहासिक फैसला दिया. इस बेंच में प्रधान न्यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई, जस्टिस एस.ए. बोबडे, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस.ए. नजीर शामिल रहे. सीनियर एडवोकेट के. पारासरन (93) सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान का पक्ष रख रहे थे.

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आइए जानते हैं कौन हैं रामलला विराजमान और क्या हैं इसकी कहानी:-

>>हिंदू परंपरा के अनुसार, भगवान को वैध व्यक्ति माना गया है, जिनके अधिकार और कर्तव्य होते हैं. भगवान किसी संपत्ति के मालिक भी हो सकते हैं. साथ ही वो किसी पर मुकदमा दर्ज कर सकते हैं या उनके नाम पर मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है. हिंदू कानून में देवताओं की मूर्तियों को वैध व्यक्ति माना गया है. विवादित स्थल पर जहां राम लला की जन्मभूमि मानी जाती है, वहां राम लला एक नाबालिग रूप में थे.

>>इस केस में रामलला को भी नाबालिग और न्यायिक व्यक्ति मानते हुए उनकी तरफ से कोर्ट में ये मुकदमा विश्व हिंदू परिषद के सीनियर नेता त्रिलोकी नाथ पांडे ने रखा था.

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अयोध्या स्टेशन


>>23 दिसंबर 1949 में मस्जिद में मूर्तियां रखने का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके आधार पर 29 दिसंबर 1949 को मस्जिद कुर्क कर उस पर ताला लगा दिया गया था.
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>>कोर्ट ने तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष प्रिय दत्त राम को इमारत का रिसीवर नियुक्त किया था और उन्हें ही मूर्तियों की पूजा आदि की जिम्मेदारी दे दी थी.

>>इसके बाद 1989 में विश्व हिंदू परिषद के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज देवकी नंदन अग्रवाल ने भगवान राम के सखा (मित्र) के रूप में पांचवां दावा फैजाबाद की अदालत में दायर किया.

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अयोध्या में 3 महीने में शुरू होगा मंदिर निर्माण का काम


>>देवकी नंदन अग्रवाल ने दावा किया था कि 23 दिसंबर 1949 को राम चबूतरे की मूर्तियां मस्जिद के अंदर रखी गई थीं. साथ ही जन्म स्थान और भगवान राम दोनों पूज्य हैं. रामलला ही इस संपत्ति के मालिक भी हैं.

>>ऐसे में रामलला और कोई नहीं, बल्कि स्वयं भगवान राम के नाबालिग स्वरूप को माना गया है. कोर्ट ने उन्हें ही विवादित जमीन का मालिक मानते हुए मालिकाना हक दिया है.

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिया फैसला?
अयोध्या पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरा विवादित स्थल राम लला विराजमान को दे दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी. हिंदू विवादित स्थल के अंदरूनी हिस्से को रामलला का जन्मस्थान मानते हैं. अदालत ने सरकार को मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने को कहा है.

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First published: November 9, 2019, 1:04 PM IST
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