अयोध्या केस: मुस्लिम पक्षकार बोले- राम हिंदोस्तां के इमाम, जन्मस्थान नहीं हो सकता न्यायिक व्यक्ति

अयोध्या केस: मुस्लिम पक्षकार बोले- राम हिंदोस्तां के इमाम, जन्मस्थान नहीं हो सकता न्यायिक व्यक्ति
सुप्रीम कोर्ट अयोध्या केस की रोजाना सुनवाई कर रही है,

चीफ जस्टिस (CJI) रंजन गोगोई के नेतृत्व में 5 सदस्यीय बेंच अयोध्या केस (Ayodhya Land Dispute Case) की रोजाना (सोमवार से शुक्रवार) सुनवाई हो रही है. आज की सुनवाई में मुस्लिम पक्षकारों के लिए वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में उर्दू कवि अल्लामा इकबाल का मशहूर शेर पढ़ा. उन्होंने कहा, 'है राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज़ अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 17, 2019, 1:56 PM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या केस (Ayodhya case) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का आज 25वां दिन है. अब तक इस मामले की सुनवाई में हिंदू पक्ष की ओर से दलीलें दी जा चुकी हैं. अब मुस्लिम पक्ष अपनी दलीलें रख रहा है. मंगलवार को मुस्लिम पक्षकारों के वकील ने शीर्ष अदालत में भगवान राम (Lord Rama) को हिंदुस्तान का इमाम करार दिया. वकील राजीव धवन मे रामजन्म भूमि को एक न्यायिक व्यक्ति माने जाने का भी विरोध किया. उनके मुताबिक, 'जन्मस्थान' एक न्यायिक व्यक्ति (Juridical Person) नहीं हो सकता. बता दें कि चीफ जस्टिस (CJI) रंजन गोगोई के नेतृत्व में 5 सदस्यीय बेंच अयोध्या केस की रोजाना (सोमवार से शुक्रवार) सुनवाई हो रही है

मुस्लिम पक्षकारों के लिए वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में उर्दू कवि अल्लामा इकबाल का मशहूर शेर पढ़ा. उन्होंने कहा, 'है राम के वजूद पे हिन्दोस्तां को नाज़ अहल-ए-नज़र समझते हैं उस को इमाम-ए-हिंद.' यही नहीं, मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने दलील दी कि जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है, लेकिन कृष्ण न्यायिक व्यक्ति नहीं हैं.

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इस पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने राजीव धवन से पूछा, तो क्या आप कह रहे हैं कि कुछ शारीरिक अभिव्यक्ति होनी चाहिए? क्या जगह को व्यक्ति बनाने के लिए मापदंडों को निर्धारित करना बहुत मुश्किल नहीं होगा? राजीव धवन ने इस पर जवाब दिया, कोई भी ग्रंथ ये बताने में सक्षम नहीं है कि अयोध्या में किस सटीक स्थान पर भगवान राम का जन्म हुआ था.
कोर्ट ने राजीव धवन से पूछा कि भगवान का स्वयंभू होना क्या सामान्य प्रक्रिया है? ये कैसे साबित करेंगे कि राम का जन्म वहीं हुआ या नहीं? इस पर राजीव धवन ने कहा कि यही तो मुश्किल है. राम जन्मस्थान का शिगूफा तो ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1855 में छोड़ा था. हिंदुओं को वहां रामचबूतरा पर पूजा पाठ करने की इजाज़त दी गई थी.

अयोध्या मामला: सुप्रीम कोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार से पूछा, क्या रामजन्म भूमि केस का सीधा प्रसारण संभव है?
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