अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर, चंपत राय ने बताया कैसा चल रहा काम

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव राय ने राम मंदिर के कई पहलुओं पर चर्चा की. फाइल फोटो

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव राय ने राम मंदिर के कई पहलुओं पर चर्चा की. फाइल फोटो

Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री ने कहा कि स्थान को भरने का कार्य पत्थर की गिट्टी, पत्थरों के पाउडर और कोयले की राख से किया गया, जिसे एनटीपीसी ने तैयार किया.

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नई दिल्ली. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का काम प्रगति पर है. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री चंपत राय का कहना है कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है. उन्होंने कहा कि आईआईटी गुवाहाटी के डायरेक्टर और अनेक संस्थानों के इंजीनियरों की सलाह के साथ-साथ नेशनल जियो रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद की सलाह से विशेषज्ञों के परामर्श के आधार पर काम किया जा रहा है. राय ने कहा कि इन संस्थानों के शोध के आधार पर यह ज्ञात हुआ कि धरती के नीचे बहुत बड़ी मात्रा में मलबा है और उनकी सलाह पर इसे हटाया गया.

इसके लिए 400 फीट लंबा 300 फीट गहरा क्षेत्र मंदिर परिसर के चारों ओर चिह्नित किया गया और वहां से मलबा हटाया गया. उन्होंने बताया कि 45 फीट नीचे जाने के बाद शुद्ध बालू प्राप्त हुई और पूरे मलबे को हटाया गया. इतनी गहराई पर जाने के बाद भी मिट्टी नहीं मिली सिर्फ बालू मिली और जब यह तय हुआ कि बालू के नीचे मिट्टी नहीं है तो वहीं से उसे भरने का काम शुरू किया गया.

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भराव के लिए अपनाई गई ये तकनीक
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री ने कहा कि स्थान को भरने का कार्य पत्थर की गिट्टी, पत्थरों के पाउडर और कोयले की राख से किया गया, जिसे एनटीपीसी ने तैयार किया. इसमें थोड़ा पानी और सीमेंट का मिश्रण भी उपयोग में लाया जा रहा है. यह प्रक्रिया मार्च से प्रारंभ हुई है. जगह को भरने के कार्य में 12 इंच की एक परत बिछाई जाती है और फिर रोलर के माध्यम से इसे दबाकर 2 इंच कम किया जाता है. 12 इंच की परत 10 इंच की हो जाती है, तब उसके ऊपर दूसरी परत बिछाई जाती है.

उन्होंने कहा कि मार्च के दूसरे सप्ताह से प्रारंभ हुए कार्य में अब तक 4 लेयर बिछाई जा चुकी हैं. बीच में बारिश के कारण बाधा आ रही है, लेकिन कार्य को रोका नहीं जा रहा है. कार्य प्रगति पर है और 24 घंटे काम चल रहा है. दो शिफ्ट में लोगों के कार्य करने की व्यवस्था है, ताकि जल्द से जल्द मंदिर निर्माण का कार्य पूर्ण हो सके.

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