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Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट की परंपरा टूटी, फैसला लिखने वाले जज का नाम नहीं

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 11:38 PM IST
Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट की परंपरा टूटी, फैसला लिखने वाले जज का नाम नहीं
पांच जजों की इसी संंवैधानिक पीठ ने अयोध्या के जमीन मसले पर फैसला सुनाया. फोटो. एएनआई

Ayodhya Verdict.....अयोध्या भूमि विवाद (Ayodhya Land despute) मामले में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने फैसला सर्वसम्मति से किया, लेकिन एक न्यायाधीश ने भगवान राम (Lord Ram) के सटीक जन्म स्थान के मुद्दे पर असंतोष व्यक्त किया. हालांकि उनके नाम का उल्लेख नहीं किया गया.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 11:38 PM IST
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नई दिल्ली. अयोध्या में जमीन विवाद के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार 9 नवंबर 2019 को अपना अहम फैसला सुना दिया. फैसले में रामलला विराजमान को पूरी जमीन और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग से जमीन देने का फैसला सुनाया. लेकिन संवैधानिक पीठ द्वारा सुनाया गए इस फैसले में दो बातोंं के जवाब नहीं मिल रहे हैं. पांच जजों में से बैंच की ओर से फैसला किसने लिखा. दूसरा एक न्यायाधीश ने भगवान राम (Lord Ram) के सटीक जन्म स्थान के मुद्दे पर अलग राय दी है.



इस आदेश में इन दोनों तथ्यों को प्रमुख माना जा सकता है. खासकर इस तरह के हाइप्रोफाइल केस में. कोर्ट में ये प्रक्रिया है कि जब कोई बैंच फैसला सुनाती है तो बैंच के अधिकार पर एक जज का नाम फैसला लिखने वाले जज के तौर पर लिखा जाता है. हालांकि इस केस में फैसला लिखने वाले जज का नाम नहीं लिखने का कारण अब तक पता नहीं है. ये भी हो सकता है कि इस केस की संवेदनशीलता के कारण किसी एक जज के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है.


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बता दें कि इस केस की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अध्यक्षता में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने की. इस पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल थे. इस केस में एक और दिलचस्प सवाल है, जिस पर पर्दा है. 1045 पेज के फैसले में 116 पेज ऐसे हैं, इन्हें जिस जज ने लिखा है, उनका नाम भी बताया नहीं गया है.

एक न्यायाधीश ने जन्मस्थान के मुद्दे पर असंतोष जताया था. जमीन विवाद पर इस फैसले के अंत में एक पंक्ति है, जिसमें कहा गया है, “उपरोक्त कारणों और निर्देशों के अनुरूप होने पर, हममें से एक ने अलग-अलग कारणों को दर्ज किया है. इसके अनुसार, 'क्या विवादित ढांचा हिंदू भक्तों की आस्था और विश्वास के अनुसार भगवान राम का जन्म स्थान है.1528 से पहले की अवधि में पर्याप्त धार्मिक ग्रंथ मौजूद थे, जिनकी वजह से हिंदू राम जन्मभूमि के वर्तमान स्थल को भगवान राम का जन्मस्थान मानते थे.' 2010 में अयोध्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में भगवान राम का जन्मस्थान या मस्जिद बनाने के लिए मंदिर को नष्ट करने संबंधी प्रश्नों का उल्लेख स्पष्ट रूप से प्रत्येक न्यायाधीश की राय के साथ किया गया था.

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First published: November 9, 2019, 7:21 PM IST
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