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Ayodhya Verdict : जस्टिस बोबडे ने कहा- अयोध्या विवाद सबसे कठिन मामलों में से एक था

News18Hindi
Updated: November 15, 2019, 7:25 PM IST
Ayodhya Verdict : जस्टिस बोबडे ने कहा- अयोध्या विवाद सबसे कठिन मामलों में से एक था
जस्टिस बोबडे

सीजेआई रंजन गोगोई (Ranjan gogoi) की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच ने अयोध्या (Ayodhya) की विवादित जमीन रामलला विराजमान (ram lalla virajman) को देने का फैसला किया है.

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  • Last Updated: November 15, 2019, 7:25 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) अयोध्या मामले (Ayodhya case) में अब तक का सबसे बड़ा फैसला सुना चुका है. सीजेआई रंजन गोगोई (Ranjan gogoi) की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच ने विवादित जमीन रामलला विराजमान (ram lalla virajman) को देने का फैसला किया. अयोध्या विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से लिए गए फैसले को जस्टिस शरद अरविंद बोबडे (sharad arvind bobde) ने ऐतिहासिक बताया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक अगले चीफ जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने कहा कि जब अयोध्या पर फैसला देने का समय आया तो हम सभी जजों की सहमति थी कि यह एक फैसला होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम सभी अयोध्या के फैसले को लेकर एकमत थे. जस्टिस बोबडे ने माना कि यह केस सबसे कठिन मामलों में से एक था.

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उन्होंने बताया कि अयोध्या पर फैसला देने से पहले हम कानून व्यवस्था को लेकर थोड़ा चिंतित थे. फैसला सुनाने से पहले मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने यूपी के मुख्य सचिव और डीजीपी से मुलाकात की. हम संतुष्ट हैं कि हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. जस्टिस बोबडे ने कहा कि इस फैसले के बाद मैं एक ही संदेश देना चाहता हूं कि कई सालों से चला आ रहा यह विवाद अब खत्म हो गया है.

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गौरतलब है कि सीजेआई रंजन गोगोई ने अयोध्या मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए. इसके लिए केंद्र सरकार को तीन महीने का समय दिया गया है. वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ जमीन देने का भी फैसला किया गया है. सीजेआई ने कहा कि ये पांच एकड़ जमीन या तो अधिग्रहित जमीन से दी जाए या फिर अयोध्या में कहीं भी दी जाए. वहीं 2.77 एकड़ विवादित जमीन पर सरकार का अधिकार रहेगा.

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First published: November 14, 2019, 2:33 PM IST
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