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Ayodhya Verdict: VHP का ये नेता पर्दे के पीछे से राम मंदिर आंदोलन को करता रहा मजबूत

News18Hindi
Updated: November 9, 2019, 3:46 PM IST
Ayodhya Verdict: VHP का ये नेता पर्दे के पीछे से राम मंदिर आंदोलन को करता रहा मजबूत
वीएचपी के नेता शरद शर्मा.

शरद शर्मा (Sharad Sharma) मौजूदा समय विश्‍व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्‍ता हैं. वह युवावस्‍था में ही राम मंदिर आंदोलन (Ram Mandir temple) से जुड़ गए थे. अब उनकी उम्र 50 साल के करीब है. उन्‍होंने पूरे आंदोलन में पिछले पर्दे से अहम भूमिका निभाई.

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  • Last Updated: November 9, 2019, 3:46 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शनिवार को अयोध्‍या केस में (Ayodhya case verdict) फैसला सुनाया. सीजेआई रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने का फैसला सुनाया. साथ ही सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को अयोध्‍या में कहीं भी पांच एकड़ जमीन देने का भी फैसला सुनाया. विश्‍व हिंदू परिषद (VHP) के एक नेता ने राम मंदिर आंदोलन को लगभग अपनी पूरी जवानी ही दे दी. इनका नाम है शरद शर्मा. वह करीब 30 साल से राम मंदिर के लिए चल रहे आंदोलन का पिछले पर्दे से हिस्‍सा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उन्‍होंने कहा कि अभी हमारा मुख्‍य उद्देश्‍य समाज में शांति कायम रखना है.

1980 के दशक के मध्‍य में जब राम मंदिर आंदोलन शुरू हुआ था तो शरद शर्मा ने इसका हिस्‍सा बनने की ठानी थी. वह तक युवा था. अब उनकी उम्र 50 साल के करीब है. एक ओर जहां उनकी उम्र के लोग आंदोलन में आगे की ओर से शामिल थे तो शरद शर्मा पीछे की जिम्‍मेदारी संभालते थे.

प्रमुख सूत्रधार व्‍यक्ति हैं शर्मा
शरद शर्मा कुछ ही समय में ऐसे शख्‍स बन गए जिनके पास विश्‍व हिंदू परिषद (VHP), संतों, अयोध्‍या के लोगों और पत्रकारों के लिए लगभग सभी जानकारी उपलब्‍ध रहती थी. अब शरद शर्मा की उम्र 50 साल के करीब है. वह अपने तीन दशक अयोध्‍या में ही रहते हुए राम मंदिर आंदोलन को दे चुके हैं. वह मौजूदा समय में विहिप के आधिकारिक प्रवक्‍ता हैं और कई सारी जिम्‍मेदारी निभा रहे हैं. कोई भी पत्रकार जो अयोध्‍या और राम जन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को कवर करने के लिए जाता है तो शरद शर्मा ही पहले वह व्‍यक्ति होते हैं जो सारी जानकारी मुहैया कराते हैं.

News18 से की खास बातचीत
NEWS18 से बातचीत में उन्‍होंने बताया, 'वो अयोध्‍या के लिए तूफानी दिन थे. मेरी एसोसिएशन ने हजारों अन्‍य लोगों की तरह ही आंदोलन में हिस्‍सा लिया था. अचानक से यह एसोसिएशन काफी तीव्र हो गई थी. इसके पीछे का कारण था कि मैं अयोध्‍या का स्‍थानीय हूं. साथ ही मैं अयोध्‍या की भौगोलिक स्थिति, वहां के मंदिर और संतों को जानता था. इससे यह लाभ के रूप में उभरा. यह इस तरह से विकसित हुआ कि मैं जल्‍द ही एक ओर विहिप नेताओं और दूसरी ओर संतों के बीच संदेश पहुंचाने वाला व्‍यक्ति बन गया.

1992 में बजरंग दल के साथ भी थे
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1992 में जब विवादित ढांचा गिराया गया तो उस समय शरद शर्मा बजरंग दल के साथ भी काम कर रहे थे. उस वक्‍त वह प्रशासनिक स्‍तर के काम करते थे. खासतौर पर कारसेवकपुरम में. उन्‍होंने बताया, '6 दिसंबर, 1992 को जब विवादित ढांचा गिराया गया तो मैं उस वक्‍त पास में वहां के करीब मौजूद था. मैं उस समय कारसेवकपुरम में चल रही गतिविधियों को मैनेज कर रहा था. विवादित ढांचे को गिराए जाने के काफी देर बाद शाम को मैं विवादित स्‍थल पहुंचा था.

सामान्‍य जीवन न चुनकर आंदोलन को समर्पित किया जीवन
शरद शर्मा ने विवादित ढांचा गिराये जाने के बाद वापस सामान्‍य जीवन में जाकर अपना जीवन इसी आंदोलन को समर्पित करने का फैसला किया. उन्‍होंने वापस जाकर वकालत करने जगह विहिप के साथ रहने का निर्णय लिया और अयोध्‍या में प्रमुख सूत्रधार व्‍यक्ति के रूप में बने रहे. वह एलएलबी कर रहे थे.

1998 में शरद शर्मा को विश्‍व हिंदू परिषद का प्रवक्‍ता बना दिया गया. इसके बाद कारसेवकपुरम ही उनका नया पता बन गया. उन्‍होंने कहा, 'संतों और अन्‍य प्रतिष्ठित लोगों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के कार्य और उनपर नजर रखने का काम मेरे लिए बड़ा अवसर था. जो मुझे मिला था.'

राम जन्‍मभूमि न्‍यास के प्रमुख के साथ रहे
शरद शर्मा ने बताया, 'यह मेरी जिम्‍मेदारी थी कि मैं राम जन्‍मभूमि न्‍यास के प्रमुख महंत रामचंद्र परमहंस दास जी के साथ देशभर में यात्राएं करूं और समन्‍वय करूं. महंत रामचंद्र परमहंस दास जी राम म‍ंदिर आंदोलन के बेहद प्रमुख व्‍यक्ति थे. महंत रामचंद्र मरमहंस दास जी के देहांत के बाद शरद शर्मा यही जिम्‍मेदाराना काम महंत नृत्‍य गोपाल दास के लिए करने लगे.

विहिप की कार्यशाला के भी खास व्‍यक्ति रहे
इन सभी जिम्‍मेदारियों के अलावा शरद शर्मा राम मंदिर कार्यशाला के भी प्रमुख व्‍यक्ति रहे. इसी कार्यशाला में राम मंदिर के लिए पत्‍थर तराशने का काम होता है. उन्‍होंने बताया कि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की ओर से शांतिमय माहौल बनाए रखने के लिए कार्यशाला में पत्‍थर तराशने का काम रोक दिया गया था. प्रस्‍तावित राम मंदिर निर्माण के लिए 70 फीसदी पत्‍थर तराशे जा चुके हैं. इसके अलावा बड़ी संख्‍या में पत्‍थर कार्यशाला में संरक्षित हैं.'

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First published: November 9, 2019, 3:45 PM IST
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