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आज़म-शिवपाल की जोड़ी सपा के लिए बनेगी सिरदर्द! पिता मुलायम ने संभाला मोर्चा

माना जा रहा है कि आजम परिवार, सपा हाईकमान से नाराज है. (File photo)

माना जा रहा है कि आजम परिवार, सपा हाईकमान से नाराज है. (File photo)

UP Politics: अखिलेश के करीबी नेताओं के अनुसार आजम खान ने अखिलेश यादव से फोन पर बातचीत भी नहीं की. हालांकि डैमेज कंट्रोल के लिए अब मुलायम सिंह यादव ने कमान संभाल ली है और वो आजम खान से मिलकर उनके गिले शिकवे दूर करेंगे.

(ममता त्रिपाठी)

लखनऊ. शिवपाल यादव और आजम खान की नाराजगी समाजवादी पार्टी के लिए आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में सिरदर्द बन सकती है. पार्टी के कई नाराज विधायक शिवपाल सिंह यादव के लगातार सम्पर्क में हैं. सहयोगी दल के नेता भी शिवपाल से मुलाकात कर चुके हैं. ओम प्रकाश राजभर ने भी अपनी नाराजगी को खुले मंचों से जाहिर करना शुरू कर दिया है. इन सबके बाद राज्यसभा के चुनावों में अप्रत्याशित नतीजे देखने को मिल सकते हैं.

गौरतलब है कि 24 मई से प्रदेश की 11 राज्यसभा की सीटों के लिए भी नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. आजम खान की रिहाई के बाद से यूपी का बजट सत्र भी काफी दिलचस्प होने वाला है. आजम खान अपनी खास भाषा शैली के लिए खासे मशहूर भी हैं. उन्होंने जेल से निकल कर किसी पर भी सीधे आरोप नहीं लगाया है लेकिन उनका ये कहना कि सबसे ज्यादा जुल्म मेरे अपनों ने किया है. इसमें कई सियासी संदेश छिपे हुए हैं.

अखिलेश के करीबी नेताओं के अनुसार आजम खान ने अखिलेश यादव से फोन पर बातचीत भी नहीं की. हालांकि डैमेज कंट्रोल के लिए अब मुलायम सिंह यादव ने कमान संभाल ली है और वो आजम खान से मिलकर उनके गिले शिकवे दूर करेंगे. गौरतलब है कि आजम खान कई मौकों पर ये बोल भी चुके हैं कि मुलायम सिंह यादव ही उनके नेता हैं.

सपा विधायक दल की बैठक से आजम खान, उनके बेटे अबदुल्ला और शिवपाल यादव तीनों ने ही दूरी बनाए रखी.आपको बता दें कि आजम खान 10वीं बार चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं. गौरतलब है कि आजम खान समाजवादी पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं. विधानसभा में आजम हमेशा से ही सपा के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाते रहे हैं चाहे वो मुलायम सिंह यादव की सरकार रही हो या अखिलेश की. संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते आजम खान ही विधानसभा की कार्यवाही में सपा का पक्ष रखते रहे थे. चूंकि अब संबंधों में जिस तरह की दूरी देखने को मिल रही है तो ये देखना भी काफी दिलचस्प होगा कि आजम खान खुद को इस विधानसभा सत्र में किस भूमिका में रखते हैं.

समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार को विधानसभा में मंहगाई और कानून व्यवस्था पर घेरने की रणनीति बनाई है. योगी आदित्यनाथ के दूसरी बार शपथ लेने के बाद से प्रदेश में अपराध की जितनी भी घटनाएं हुई हैं उन सब मामलों को लेकर राज्यपाल के अभिभाषण के साथ ही विपक्ष विरोध करेगा. ऐसे में सपा के सिंबल पर चुनाव जीत कर विधायक बने आजम खान का क्या रूख रहेगा ये देखना दिलचस्प होगा. हालांकि जिस तरह से आजम खान का सीतापुर जेल के बाहर शिवपाल यादव ने अपने समर्थकों के साथ स्वागत किया उससे यूपी की सियासत में नए समीकरण बनने के आसार दिखने लगे हैं. सपा के मुस्लिम विधायक पार्टी के स्टैंड को लेकर बहुत खुश नहीं है. उनका मानना है कि एकतरफा वोट देने के बाद भी पार्टी उनकी तकलीफों में साथ नहीं है. ऐसे में सभी की नजरें अब आजम खान के अगले कदम पर टिकी हैं.

Tags: Akhilesh yadav, Azam Khan, Samajwadi party

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