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बाबा आमटे ने 14 रुपये से शुरू किया था आनंदवन आश्रम, आज 20 करोड़ का है टर्नओवर

बाबा आमटे ने 14 रुपये से शुरू किया था आनंदवन आश्रम, आज 20 करोड़ का है टर्नओवर

बाबा आमटे (फाइल फोटो)

बाबा आमटे (फाइल फोटो)

बाबा आमटे ने आनंदवन आश्रम का निर्माण शुरू किया, उस वक्‍त कुष्‍ठ रोगियों को समाज का हिस्‍सा नहीं माना जाता था.

    कुष्‍ठ रोगियों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर देने वाले बाबा आमटे का बचपन काफी ऐशो आराम के साथ बीत रहा था. उनके पिता के पास काफी जमीन-जायदाद थी. इसके बवाजूद उन्‍होंने अपनी राह चुनी. बाबा आमटे ने उन लोगों के बीच अपना पूरा जीवन बिताने का संकल्‍प लिया, जिन्‍हें समाज हिकारत भरी नज़रों से देखता था. साल 1948 में 14 रुपये से शुरू हुआ कुष्‍ठ रोगियों का ये मिशन आज 20 करोड़ के टर्नओवर वाली समाजसेवी संस्‍था में तब्‍दील हो चुका है.

    जिस समय बाबा आमटे ने आनंदवन आश्रम का निर्माण शुरू किया, उस वक्‍त कुष्‍ठ रोगियों को समाज का हिस्‍सा नहीं माना जाता था. कई बार सही उपचार न होने के कारण उनकी मौत तक हो जाती थी. समाज में फैली इस कुप्रथा को दूर करने का संकल्‍प लेकर बाबा आमटे ने साल 1948 में आनंदवन आश्रम की नींव रखी थी. अपनी पत्‍नी, दो बेटे और छह कुष्‍ठ रोगियों के साथ बाबा आमटे ने आश्रम में प्रवेश किया था.

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    इसके बाद उन्‍होंने 11 साप्ताहिक क्लिनिक खोले और तीन आश्रमों की स्थापना की. इन सभी आश्रमों और क्‍लिनिक पर कुष्‍ठ रोगियों का इलाज किया जाता था. 1949 में एक पेड़ के नीचे शुरू हुआ आनंदवन आश्रम अब 250 एकड़ में फैला एक कैंपस बन गया है. आनंदवन आश्रम में दो अस्पताल, एक यूनिवर्सिटी, एक अनाथालय और दृष्टिबाधित छात्रों के लिए एक स्कूल भी है.

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    आज आनंदवन आश्रम केवल कुष्‍ठ रोगियों तक ही सीमित नहीं रह गया है. इस आश्रम में हर तरह के दिव्यांगों का इलाज होता है. इस आश्रम में एक ओर जहां कुष्‍ठ रोगियों का इलाज किया जाता है वहीं दूसरी ओर उनके पुनर्वास पर भी काम किया जाता है. आश्रम में मरीजों को दर्द से निजात दिलाने के लिए हर मुमकिन प्रयास किए जाते हैं.

    Tags: Google, Nobel Prize

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