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जब एक मनमोहन सिंह ने दूसरे मनमोहन सिंह को सौंपी थी बाबरी जांच की रिपोर्ट

जब एक मनमोहन सिंह ने दूसरे मनमोहन सिंह को सौंपी थी बाबरी जांच की रिपोर्ट

बाबरी विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है.

बाबरी विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है.

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए (Babri Mosque Demolition) जाने के ठीक दस दिन बाद पीवी नरसिम्हा राव सरकार (PV Narsimha Rao Government) ने जस्टिस मनमोहन सिंह लिब्रहान (Manmohan Singh Liberhan) को मामले की जांच के लिए कहा था. इसे लिब्रहान कमीशन के नाम से जाना जाता है. कमीशन को महज तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन लग गए 17 साल.

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    नई दिल्ली. बाबरी मस्जिद गिराए (Babri Mosque Demolition) जाने को लेकर सीबीआई की स्पेशल कोर्ट (CBI Special Court) का फैसला आ चुका है. देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) और पूर्व HRD मंत्री मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi) समेत 32 आरोपियों को बरी कर दिया गया है. कोर्ट के फैसले को एक तरफ जहां बीजेपी नेता सत्य की जीत बता रहे हैं वहीं सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी दी जा रही हैं.

    रिपोर्ट सौंपने में लग गए थे 17 साल
    बाबरी मस्जिद के मामले में फैसला भले ही आज आया हो लेकिन इसकी जांच की रिपोर्ट साल 2009 में सौंप दी गई थी. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराए जाने के ठीक दस दिन बाद पीवी नरसिम्हा राव सरकार ने जस्टिस मनमोहन सिंह लिब्रहान को मामले की जांच के लिए कहा था. इसे लिब्रहान कमीशन के तौर पर भी जाना जाता है. कमीशन को महज तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपनी थी लेकिन लग गए 17 साल.



    एकल आयोग ने 48 बार एक्सटेंशन लिया
    उस समय पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस रहे मनमोहन सिंह लिब्रहान को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया था. लेकिन इस एकल आयोग ने 48 बार एक्सटेंशन लिया. और साल 2009 में जाकर रिपोर्ट सौंपी थी. दिलचस्प रूप से उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे. जस्टिस लिब्रहान ने रिपोर्ट भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सौंपी थी. रिपोर्ट सौंपे जाने के वक्त देश के तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम भी मौजूद थे.

    क्यों मानते थे अपने प्रयास की बर्बादी
    हालांकि बाद में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में खुद जस्टिस लिब्रहान ने माना था कि एक तरह से ये उनके प्रयासों की बर्बादी थी. जस्टिस लिब्रहान ने अपनी रिपोर्ट में राज सत्ता हासिल करने के लिए धर्म का इस्तेमाल रोकने को लेकर सजा के प्रावधान की सिफारिश की थी. बीबीसी को दिए इंटरव्यू में जस्टिस लिब्रहान ने यह भी माना था कि बाबरी मस्जिद को गिराया जाना एक सोची-समझी साजिश थी. हालांकि इससे जुड़े आरोपी हमेशा इस बात से इंकार करते रहे.

    Tags: Babri demolition, CBI investigation, Dr. manmohan singh

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