बाबरी या रामलला: जानिए कब से चल रहा है ये विवाद, अब तक क्या-क्या हुआ ?

News18Hindi
Updated: January 4, 2019, 11:04 AM IST
बाबरी या रामलला: जानिए कब से चल रहा है ये विवाद, अब तक क्या-क्या हुआ ?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई को 10 जनवरी तक के लिए टाल दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई को 10 जनवरी तक के लिए टाल दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 4, 2019, 11:04 AM IST
  • Share this:
अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के 26 साल पूरे हो गए हैं. 06 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को गिराया गया था, हालांकि विवादित स्थल पर आजतक मंदिर का निर्माण नहीं हो पाया है और कई संगठन अब भी राम मंदिर निर्माण की मांग कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई को 10 जनवरी तक के लिए टाल दिया है.

शुक्रवार को कोर्ट में एक नई जनहित याचिका पर भी सुनवाई होनी थी. यह जनहित याचिका हरीनाथ राम ने दायर की हुई है. याचिका में अयोध्या मामले की सुनवाई एक तय समय में किए जाने की मांग की है और अगर तय समय में सुनवाई नहीं होती है तो कोर्ट अपने आदेश में कारण बताए कि एक तय समय में सुनवाई आखिरकार क्यों नहीं हो सकती. आपको बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जनवरी माह तक टाल दी थी.

इससे पहले तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर मामले को सुन रहे थे. सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था. कोर्ट ने 1994 के इस्माइल फारुकी के फैसले में पुनर्विचार के लिए मामले को संविधान पीठ भेजने से इंकार कर दिया था. राम जन्मभूमि- बाबरी मस्जिद विवाद आज का नहीं, बल्कि सदियों पुराना है. जानें, अयोध्या की इस विवादित भूमि पर कब-कब, क्या-क्या हुआ है.

यह भी पढ़ें:  राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद : अगर रोजाना सुनवाई को भी तैयार हुआ सुप्रीम कोर्ट तब भी लगेंगे 8 महीने!

साल 1528-29 - बाबर ने एक मस्जिद बनवाई, जिसे बाबरी मस्जिद नाम दिया गया. हिंदू मान्यता के अनुसार इसी जगह भगवान राम का जन्म हुआ था और हिंदू संगठनों का आरोप रहा कि राम मंदिर को तुड़वाकर मस्जिद बनाई गई. हालांकि कई शोधकर्ताओं का कहना है कि असल विवाद की शुरुआत 18वीं सदी में हुई.



साल 1853- इस जगह पर मंदिर-मस्जिद को लेकर पहला विवाद, जिसमें हिंदुओं ने आरोप लगाया कि मंदिर को तोड़कर मुस्लिमों ने अपना धार्मिक स्थल बनवाया. इस बात को लेकर पहली बार हिंसा के प्रमाण मिलते हैं.
Loading...

साल 1859- अंग्रेजी हुकूमत ने मध्यस्थता करते हुए विवादित स्थल का बंटवारा कर दिया और तारों की एक बाड़ खड़ी करना दी ताकि अलग-अलग जगहों पर हिंदू-मस्लिम अपनी-अपनी प्रार्थना कर सकें.

साल 1885- विवाद ने इतना गंभीर रूप ले लिया कि पहली बार ये अदालत पहुंचा. हिंदू साधु महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर बनवाने के लिए इजाजत मांगी, हालांकि अदालत ने ये अपील ठुकरा दी. इसके बाद से मामला गहराता गया और सिलसिलेवार तारीखों का जिक्र मिलता है.

यह भी पढ़ें: राममंदिर पर प्रधानमंत्री मोदी का क्लीयर स्टैंड, 2024 तक पीएम पद की वेकेंसी नहीं: रामविलास पासवान

साल 1949- हिंदुओं ने मस्जिद में कथित तौर पर भगवान राम की मूर्ति स्थापित कर दी. तब से हिंदू ही पूजा करने लगे और मुस्लिमों ने मस्जिद में नमाज पढ़नी बंद कर दी.

साल 1950- फैजाबाद अदालत में एक अपील दायर कर गोपाल सिंह विशारद ने भगवान राम की पूजा की इजाजत मांगी.

साल 1950- महंत रामचंद्र दास ने मस्जिद में हिंदुओं द्वारा पूजा जारी रखने के लिए याचिका लगाई. इसी दौरान मस्जिद को ‘ढांचा’ के रूप में संबोधित किया गया.

ayodhya, अयोध्या, Vishwa Hindu Parishad, VHP, Ram janmabhoomi, Ram temple, rss, Ayodhya, vhp Dharam Sabha, Ayodhya land dispute, babri masjid, विश्व हिंदू परिषद, वीएचपी, विहिप, राम जनभूमि, राम मंदिर, आरएसएस, अयोध्या, वीएचपी की धर्म सभा, अयोध्या भूमि विवाद, बाबरी मस्जिद, Supreme court, सुप्रीम कोर्ट, Babari Masjid demolition, बाबरी मस्जिद विध्वंस, yogi adityanath, mahant avaidyanath, digvijay nath, योगी आदित्यनाथ, महंत अवैद्यनाथ, दिग्विजय नाथ, Awadh, babur, अवध, बाबर, history of Ayodhya, अयोध्या का इतिहास

साल 1959- इसी महीने निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल के हस्तांतरण के लिए मुकदमा किया.

साल 1961- इस दौरान तस्वीर थोड़ी बदली और उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद पर मालिकाना हक के लिए मुकदमा कर दिया.

साल 1984- विश्व हिंदू परिषद ने बाबरी मस्जिद का ताला खोलने और इस जगह पर मंदिर बनवाने के लिए अभियान शुरू किया और इसके लिए समिति का गठन हुआ.

फरवरी 1986- एक अहम फैसले के तहत स्थानीय कोर्ट ने विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा की इजाजत दे दी और ताले दोबारा खोले गए. इससे नाराज मुस्लिमों ने फैसले के विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाई.

यह भी पढ़ें: सभी राम भक्तों को मंदिर पर मोदी की टिप्पणी से सहमत होना चाहिए : उमा भारती

जून 1989- भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले में विश्व हिंदू परिषद को औपचारिक समर्थन दिया.

नवंबर 1989- लोकसभा चुनाव के कुछ महीनों पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी.

25 सितंबर 1990- बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली ताकि हिंदुओं को इस महत्वपूर्ण मु्द्दे से अवगत कराया जा सके. हजारों कार सेवक अयोध्या में इकट्ठा हुआ. इस यात्रा के बाद साम्प्रदायिक दंगे हुए.

नवंबर 1990- बिहार से आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया.

6 दिसंबर 1992- ये विवाद में ऐतिहासिक दिन के तौर पर याद रखा जाता है, इस रोज हजारों की संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया और अस्थायी राम मंदिर बना दिया गया. चारों ओर सांप्रदायिक दंगे होने लगे, जिसमें लगभग 2, 000 लोगों के मारे जाने का रिकॉर्ड है.

फाइल फोटो- AFP


16 दिसंबर 1992- तब मस्जिद में हुई तोड़-फोड़ की जांच के लिए लिब्रहान आयोग का बनाया गया. जज एमएस लिब्रहान के नेतृत्व में जांच शुरू की गई.

सितंबर 1997- बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने इस बारे में 49 लोगों को दोषी करार दिया, जिसमें बीजेपी के कुछ प्रमुख नेताओं का नाम भी शामिल रहा.

साल 2001- वीएचपी ने मार्च 2002 को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए डेडलाइन के तौर पर मार्क किया.

अप्रैल 2002- हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ ने अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर सुनवाई आरंभ की.

मार्च-अगस्त 2003- हाई कोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अयोध्या में खुदाई की. पुरातत्वविदों ने कहा कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष के प्रमाण मिले हैं. हालांकि इसे लेकर भी अलग-अलग मत थे.

जुलाई 2009- लिब्रहान आयोग ने गठन के लगभग डेढ़ दशक बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी.

यह भी पढ़ें: राम मंदिर: मोदी के बयान से बैकफुट पर VHP, कहा-धर्म संसद में तय होगी आगे की रणनीति

28 सितंबर 2010- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज कर दी.

30 सितंबर 2010- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटा, इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़े को दिया गया.

9 मई 2011- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी.



21 मार्च 2017- सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की सलाह दी.

19 अप्रैल 2017- सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया.

1 दिसंबर 2017- लगभग 32 नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के साल 2010 के फैसले को चुनौती दी.

8 फरवरी 2018- सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील पर सुनवाई शुरू कर दी.

20 जुलाई 2018- मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला आरक्षित रखा.

29 अक्टूबर 2018- सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जल्द सुनाई पर इनकार करते हुए केस जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया.

24 नवंबर 2018- अयोध्या में शिवसेना की ने कार्यक्रम किया. इस सभा के दौरान उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में बीजेपी को जमकर खरी-खोटी सुनाई. उन्होंने मोदी सरकार की तुलना कुंभकरण से करते हुए कहा, 'आज मैं यहां कोई लड़ाई करने नहीं आया हूं. आज तो मैं सिर्फ सोए हुए कुंभकरण को जगाने आया हूं. कुंभकरण 6 महीने सोते थे, आज के कुंभकरण पिछले 4 सालों से सोए हुए हैं. मैं उनको जगाने आया हूं. जो वादा करते हैं, जो वचन देते हैं, उसे निभाना चाहिए. चलो सब लोग मिलकर मंदिर बनाते हैं.'

यह भी पढ़ें:  राम मंदिर के पक्षकार महंत धर्मदास ने PM मोदी, राहुल गांधी को लिखा पत्र, रखी ये मांग

25 नवंबर 2018- अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की अगुवाई में धर्म सभा हुई. धर्म सभा में एक हिंदू संत रामभद्राचार्य ने कहा कि बहुत जल्द ही भव्य राम मंदिर का निर्माण करना होगा और बीजेपी पर आरोप लगाया कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की वजह से तारीख का ऐलान नहीं किया जा रहा है. इसके साथ ही विश्व हिंदू परिषद का कहना था कि अब करो या मरो का वक्त है, देश का बहुसंख्यक समाज अब इस मामले का हल होते हुए देखना चाहता है.

1 जनवरी 2019- पीएम नरेंद्र मोदी ने 2019 के अपने पहले इंटरव्यू में कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश पर फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जा सकता है. राम मंदिर पर अध्यादेश लाने के बारे पीएम ने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, और संभवत: अपने अंतिम चरण में है. उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने दीजिए, इसके बाद जो भी सरकार की जिम्मेदारी होगी उसे पूरा किया जाएगा.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी WhatsApp अपडेट्स

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लखनऊ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 4, 2019, 1:47 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...