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Exclusive: 'प्‍यार और जंग में सब जायज़': बाबुल सुप्रियो ने बताए BJP छोड़कर TMC से जुड़ने के कारण

बाबुल सुप्रियो ने न्‍यूज18 से की बातचीत. (File pic)

बाबुल सुप्रियो ने न्‍यूज18 से की बातचीत. (File pic)

गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo) ने केंद्रीय पर्यावरण राज्‍यमंत्री के पद से हटाए जाने के बाद कहा था कि वह राजनीति छोड़ रहे हैं. हालांकि अब वह बीजेपी (BJP) छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हो गए हैं. News18 से बातचीत में उन्होंने अपने इस कदम के कारण बताए और भविष्य की रणनीति पर खुलकर चर्चा की...

  • News18Hindi
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    कोलकाता. बाबुल सुप्रियो (Babul Supriyo) के हाल ही में बीजेपी (BJP) छोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आने को लेकर कई लोग आश्‍चर्यचकित हुए होंगे. उन्होंने शनिवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी तथा राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ’ब्रायन की मौजूदगी में आधिकारिक रूप से टीएमसी की सदस्यता ले ली.

    गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो ने केंद्रीय पर्यावरण राज्‍यमंत्री के पद से हटाए जाने के बाद कहा था कि वह राजनीति छोड़ रहे हैं. अब उनका कहना है कि 2024 के आम चुनाव में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी. उन्‍होंने बीजेपी छोड़ने के कारणों और भविष्‍य की योजनाओं को लेकर न्‍यूज18 से खास बातचीत की है…

  • पिछले 3 दिनों में क्‍या हुआ? बदलाव का कारण क्‍या था?

    इसका एक आसान सा जवाब है. मैंने दीदी (ममता बनर्जी), अभिषेक बनर्जी और टीएमसी द्वारा दिए गए अवसर पर प्रतिक्रिया दी है. यह सब तीन दिन में हुआ. उन्‍होंने मेरे लिए कुछ खास योजना बनाई है इसलिए मैंने अपना निर्णय बदल दिया.

    कई लोगों ने कहा कि मैंने कुछ अच्छा काम किया है. मैं दो बार जीता. दूसरी बार तो बड़े अंतर से जीता इसलिए मुझे राजनीति छोड़कर ऐसा लगा कि मैं रिटायर्ड हर्ट हो गया हूं. मैं इस नए अवसर से उत्साहित हूं जिसने मुझे अपना निर्णय बदलने और अपनी क्षमता के अनुसार लोगों की सेवा करने के लिए प्रेरित किया. मैंने पूरे मन से राजनीति छोड़ दी थी और अब पूरे मन से वापस आऊंगा. मैं बहुत खुश हूं कि मैं अपनी नई पारी की शुरुआत काफी प्रेरणा के साथ करूंगा.

  • आपको दल बदलने के समय ‘झालमुरी’ का किस्‍सा याद आया? आपके विपक्ष का कहना है उसी दिन से आपने पक्ष बदलने की शुरुआत की थी?
  • मुझे किसी को भी कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है. आज जो लोग यह सब कह रहे हैं, वे अनाप-शनाप बोल रहे हैं. वे 2014 में नहीं थे. वे अब मेरे विरोधी हैं और यह ठीक है कि वे आलोचना करेंगे. कुछ लोग सज्जनता से आलोचना कर रहे हैं, कुछ अन्य दिलीप घोष दा की तरह हैं, जो ‘अपशाबो’ (बुरी भाषा) के विशेषज्ञ हैं. मैंने उसे ‘बर्नो परिचय’ देने के बारे में सोचा है, उन्‍हें वहां से सीखने की जरूरत है.

    बंगाली एक प्रतिष्ठित भाषा है जिस पर रवींद्रनाथ टैगोर ने काम किया है. घोष को यह जानने की जरूरत है कि यह रवींद्रनाथ, नजरूल और नेताजी की भूमि है. उन्‍हें यह सब सीखना है और फिर मैं उनके साथ बहस में बैठूंगा.

  • पिछले 3 दिनों में असल में क्या हुआ?

    इन दिनों प्रेरक और लुभावनी चीजें थीं. मैं दीदी और अभिषेक से प्रेरित हूं. इस मामले को हमने गंभीर रखा. यह कोई नहीं जानता था. मैं रूल बुक के अनुसार जाऊंगा. मैं मंगलवार को दिल्ली जाऊंगा और जब अध्यक्ष मुझे इस्‍तीफा देने का समय देंगे तो मैं तैयार हूं.
  • मैं आसनसोल को भी आश्वस्त करना चाहता हूं कि मैं उनके लिए काम करूंगा क्योंकि आसनसोल ने मेरी नींव रखी है. मुझे ईमानदार रहने दो, मैं प्लेइंग इलेवन में रहना चाहता हूं. अगर कोच को लगता है कि मैं प्‍लेइंग इलेवन के लिए फिट नहीं हूं लेकिन मुझे लगता है कि मुझे वहां होना चाहिए, तो मैं बैठकर बेंच गर्म नहीं करूंगा और जनता के पैसे से भत्तों को नहीं लूंगा. मैं उस कोच और टीम के लिए खेलूंगा जो मुझमें विश्वास रखता है कि मैं क्या कर सकता हूं.

  • सूत्रों का कहना है कि आपको राज्यसभा की सीट मिलने वाली है. आपका क्या कहना है?

    देखिए, यह सीएम दीदी का विशेषाधिकार है. मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता. हमें इंतजार करना होगा. कुछ दिनों के लिए अटकलों का आनंद लें और फिर आपको पता चल जाएगा कि वास्तव में क्या होता है.
  • बीती रात से ही ट्विटर पर जंग शुरू हो गई है. आप इसे कैसे संभाल रहे हैं?

    मेरे फोन में फेसबुक, ट्विटर ऐप भी नहीं है और मैं लंबे समय से सोशल मीडिया से दूर हूं. आलोचना करना विपक्ष का काम है. स्वप्न दा (स्वप्न दासगुप्ता) ने एक सज्जन की तरह मेरी आलोचना की है. मुझे विश्वास था कि मैं तथागत रॉय के करीब था. ऐसा नहीं है कि मैं पक्ष बदलकर इतिहास रच रहा हूं. इसमें नया कुछ भी नहीं है. बीजेपी तब क्या कर रही थी जब उन्होंने सभी के आने और अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए दरवाजे खोल दिए, जिससे सभी स्थानीय कार्यकर्ताओं की भावना आहत हुई?
  • उन्हें अपना काम करने दीजिए. शुभेंदु अधिकारी मेरे मित्र हैं. हम प्रतिद्वंद्वी हो सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको दुश्मन बनना है. जब वे बीजेपी में शामिल हुए थे, तो उन्हें भी इसी बात का सामना करना पड़ा था. अब वह मेरे साथ ऐसा ही कर रहे हैं. प्‍यार और जंग में सब जायज होता है. मैं इसे बहुत गंभीरता से नहीं ले रहा हूं, मैं इसकी उम्मीद कर रहा था.

  • प्रियंका टिबरेवाल ने कहा है कि वह आपकी बहन हैं इसलिए आप उनके खिलाफ अभियान नहीं चलाएंगे. क्‍या आप भवानीपुर में प्रचार नहीं करेंगे?

    क्या आपको सच में लगता है कि ममता बनर्जी को भवानीपुर में प्रचार करने के लिए बाबुल की जरूरत है? मुझे ऐसा नहीं लगता. आइए इंतजार करें और देखें, मुझे अटकलों की परवाह नहीं है. ममता बनर्जी एक प्रतिष्ठित नेता हैं और उन्होंने देश को दिखाया है कि निश्चित रूप से 2024 में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है.
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