राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में तीन-भाषाओं के फॉर्मूले पर ऐसी प्रतिक्रियाएं दे रही है पार्टियां

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में तीन-भाषाओं के फॉर्मूले को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के नेताओं खासकर तमिलनाडु से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई हैं.

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Updated: June 3, 2019, 3:15 PM IST
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में तीन-भाषाओं के फॉर्मूले पर ऐसी प्रतिक्रियाएं दे रही है पार्टियां
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में तीन-भाषाओं के फॉर्मूले पर ऐसी प्रतिक्रियाएं दे रही है पार्टियां (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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Updated: June 3, 2019, 3:15 PM IST
नई शिक्षा नीति के मसौदे के तहत स्कूलों में हिन्दी को अनिवार्य करने को लेकर उठे विवाद के बाद नव-निर्वाचित बीजेपी सरकार इस पर सफाई देती दिखी. सरकार ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक मसौदा है और कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी.

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में तीन-भाषाओं के फॉर्मूले को लेकर सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के नेताओं  खासकर तमिलनाडु से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. चलिए बताते हैं कि किसने क्या कहा...

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने स्पष्ट किया है कि सरकार अपनी नीति के तहत सभी भारतीय भाषाओं के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और किसी प्रदेश पर कोई भाषा नहीं थोपी जाएगी. निशंक ने स्पष्ट किया कि नई शिक्षा नीति के मसौदे पर लोगों एवं विभिन्न पक्षकारों की राय ली जाएगी और उसके बाद ही कुछ होगा.

सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर
जावड़ेकर ने स्पष्ट किया कि समिति ने केवल मसौदा तैयार कर अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है. सरकार ने इसे लागू करने पर कोई निर्णय नहीं लिया है. यह सिर्फ एक गलतफहमी है. मसौदे पर सभी की प्रतिक्रिया लेने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
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सीतारमण ने ट्विटर के ज़रिये स्पष्ट किया कि क्रियान्वयन से पहले विवादास्पद मसौदा प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी.

विदेश मंत्री एस जयशंकर
तमिल भाषी जयशंकर ने ट्विटर पर लिखा कि कोई भी भाषा थोपी नहीं जाएगी. उन्होंने कहा कि लोगों की राय जानने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार सभी भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रयास करेगी.

उपराष्ट्रपति वेैंकेया नायडू
सरकार के बचाव में उपराष्ट्रपति एम वेैंकेया नायडू ने रविवार को लोगों से नई शिक्षा नीति के मसौदे का अध्ययन, विश्लेषण और उस पर बहस करने की नसीहत देते हुए जल्दबाजी में निष्कर्ष नहीं निकालने की अपील की.

डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन
इस मसौदे को लेकर डीएमके प्रमुख ने सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनकी पार्टी संसद में इसका कड़ा विरोध करेगी.

कमल हासन
एक्टर और मक्कल निधि मय्यम के नेता कमल हासन ने कहा कि वो कई हिन्दी फिल्मों में काम कर चुके हैं. लेकिन उनके मुताबिक हिन्दी भाषा किसी पर नहीं थोपी जानी चाहिए.

कांग्रेस सांसद शशि थरूर
तिरुवनंतपुरम के सांसद और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने कहा कि तीन भाषा फॉर्मूला का समाधान विचार को त्यागने से नहीं बल्कि इसके बेहतर क्रियान्वयन से है. थरूर ने कहा कि तीन-भाषा फॉर्मूला 1960 के दशक के मध्य में पहली बार उठा, लेकिन इसे कभी भी ठीक तरीके से लागू नहीं किया गया.

यह भी पढ़ें: तीन भाषा नीति पर बोले थरूर, 'उत्तर भारत में तो कोई तमिल नहीं सीखता'

कर्नाटक मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी
जेडीएस नेता और कर्नाटक के मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि तीन भाषाओं के फॉर्मूले के नाम पर एक भाषा दूसरों पर नहीं थोपनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में और अधिक जानकारी हासिल करने के बाद राज्य सरकार केंद्र के सामने अपना पक्ष रखेगी.

कांग्रेस नेता सिद्धारमैया
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने भी केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि हिन्दी थोपने के बजाय सरकार को क्षेत्रीय पहचान को मान्यता देने पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि अपनी पहचान और भाषा के माध्यम से अपने विचारों को व्यक्त करने और प्रकट करने के लिए राज्यों को अधिक पहचान देने और राज्यों को अधिक स्थान देने पर ध्यान देना चाहिए और राज्यों को अपनी संस्कृति और भाषा के माध्यम से अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए ज्यादा मौका दिया जाए.

कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा कि मसौदे का प्रस्ताव ये साबित करता है कि बीजेपी का असली चेहरा सामने आ रहा है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा, 'स्कूलों में तीन भाषा फॉर्मूले का अर्थ क्या है? अर्थ यह है कि वो हिंदी को अनिवार्य विषय बना देंगे.'

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने सरकार को चेतावनी दी कि इस मसौदे के ज़रिये उन्हें उकसाने की कोशिश ना करें. अपने ट्वीट में एमएनएस ने लिखा, 'हिन्दी हमारे मातृ भाषा नहीं है. हम पर ज़बरदस्ती इसे ना थोपें.'

सीपीएम
सीपीएम ने एक बयान जारी कर साफ कर दिया कि वो तीन भाषा फॉर्मूले के प्रस्ताव का विरोध करते हैं. ये देश की एकता के लिए हानिकारक है.

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First published: June 3, 2019, 3:15 PM IST
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