रघुराम राजन के आरोपों पर कांग्रेस का जवाब- मोदी सरकार में 9.17 लाख करोड़ का NPA

पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 2014 में जब यूपीए सत्ता से बाहर हुई, तब कुल एनपीए 2.83 लाख करोड़ था. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार में इसमें 12 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हो गई.

News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 7:11 PM IST
रघुराम राजन के आरोपों पर कांग्रेस का जवाब- मोदी सरकार में 9.17 लाख करोड़ का NPA
राहुल गांधी के साथ रणदीप सुरजेवाला
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Updated: September 11, 2018, 7:11 PM IST
बैंकों के डूबे कर्ज यानी नॉन परफॉर्मिंग असेट (NPA) को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच बयानबाजी जारी है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने एनपीए के लिए यूपीए सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जिसके बाद कांग्रेस ने सफाई देते हुए मोदी सरकार पर आरोप लगाए हैं. कांग्रेस का कहना है कि एनपीए के लिए बीजेपी सरकार भी जिम्मेदार है.

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पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 2014 में जब यूपीए सत्ता से बाहर हुई, तब कुल एनपीए 2.83 लाख करोड़ था. राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार में इसमें 12 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हो गई.

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सुरजेवाला ने कहा, 'इस सरकार ने संसद में बताया था कि मार्च 2018 तक बैड लोन (एनपीए) 10.3 लाख करोड़ बढ़ा है. मौजूदा समय में यह 12 लाख करोड़ है. आसान गणित कहती है कि 56 हफ्तों की मोदी सरकार में एनपीए 9.17 लाख करोड़ बढ़ा है.'


कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा- '2.83 लाख करोड़ एनपीए के लिए बेशक आप यूपीए के जिम्मेदार ठहराएं, लेकिन क्या 9.17 लाख करोड़ एनपीए के लिए मोदी सरकार की कोई जवाबदेही होगी?'

बता दें कि सुरजेवाला ने मई में भी एनपीए को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला था. उन्होंने एनपीए को लेकर ट्वीट में कहा था, 'मोदी सरकार में बैंकों का डूबा कर्ज (बैड लोन) फीसदी बढ़ गया. 2014-15 में यह 26,112 करोड़ रुपये था और यह 2017-18 में 1,09,076 करोड़ रुपये हो गया.’ (ये भी पढ़ें-Post Office Vs SBI: जानें कहां FD कराने पर आपको मिलेगा ज्यादा रिटर्न)
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कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा था, 'सभी बैंकों में एनपीए 230 फीसदी बढ़ गया. यह मार्च, 2014 में 2,51,054 करोड़ रुपये था, जो दिसंबर, 2017 में बढ़कर 8,31,141 करोड़ रुपये हो गया.' उन्होंने कहा, ‘एनडीए का नाम अब एनपीए कर दिया जाना चाहिए.’

बता दें कि आबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने सोमवार को मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति को भेजे जवाब में एनपीए को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने घोटालों की जांच में लेटलतीफी और फैसले लेने में देरी की वजह से बैंकों का डूबा कर्ज (एनपीए) बढ़ता चला गया.

राजन ने बताया है कि बैंकों ने जोंबी लोन को एनपीए में बदलने से बचाने के लिए ज्यादा लोन दिए. 2006 से पहले बुनियादी क्षेत्र में पैसा लगाना फायदेमंद था. इस दौरान SBI कैप्स और IDBI बैंकों ने खुले हाथ से कर्ज दिए. बैंकों का अति आशावादी होना घातक साबित हुआ. लोन देने में सावधानी नहीं रखी गई. इसके साथ ही जितने लाभ की उम्मीद की गई थी, उतना लाभ नहीं हुआ.


बता दें कि इस समय देश के सभी बैंक एनपीए की समस्या से जूझ रहे हैं. दिसंबर 2017 तक बैंकों का एनपीए 8.99 ट्रिलियन रुपये हो गया था जो कि बैंकों में जमा कुल धन का 10.11 फीसदी है. कुल एनपीए में से सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का एनपीए 7.77 ट्रिलियन है.
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