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Assam Elections: असम चुनाव की धुरी बने हुए हैं बदरुद्दीन अजमल, कांग्रेस या बीजेपी किसे होगा इसका फायदा?

अजमल से गठबंधन कर कांग्रेस ने खुद ही बीजेपी को एक बड़ा मौका दे दिया कि वो अपने वोटर को लामबंद कर सके.

अजमल से गठबंधन कर कांग्रेस ने खुद ही बीजेपी को एक बड़ा मौका दे दिया कि वो अपने वोटर को लामबंद कर सके.

Assam Assembly Elections 2021: अजमल पर हो रहे इस तीखे हमले के अपने कारण है. बीजेपी और उसके साथी दलों का आरोप है कि 2005 में गठन के बाद से एआईयूडीएफ बांग्लादेश से अवैध मुस्लिम घुसपैठियों को बढ़ावा देती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 3:54 PM IST
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गुवाहाटी. असम का चुनाव (Assam Assembly Elections 2021) एक नाम के इर्द गिर्द घूम रहा है, वो हैं ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट यानी एआईयूडीएफ के मुखिया 71 साल के बदरुद्दीन अजमल. इस चुनाव में अजमल ने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है और बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए चुनावी अखाड़े में हैं. पिछले चुनाव में बीजेपी को पहली बार राज्य में चुनाव जीतकर सरकार बनाने का मौका मिला था. इस बार बीजेपी अपने काम तो गिनवा रही है, लेकिन उसके तमाम नेताओं के निशाने पर अजमल ही हैं.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने न्यूज़18इंडिया से खास बातचीत करते हुए कहा कि क्या बदरुद्दीन अजमल के साथ कांग्रेस से राज्य में अवैध घुसपैठ रोकने की आप उम्मीद कर सकते है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस असम मे अजमल के साथ, बंगाल में फुरफ़ुरा शरीफ के साथ और केरल में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन करती है. जनता सब समझ रही है, असम में उसकी हार का एक बड़ा कारण भी अजमल ही बनेंगे.

सर्बानंद सोनोवाल ने अजमल पर किया तीखा हमला
राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Sarbananda Sonowal) ने न्यूज़18इंडिया से खास बातचीत में अजमल पर बेहद तीखा हमला किया. उन्होंने कहा कि अवैध घुसपैठियों की मदद करने वाले अजमल देश के दुश्मन हैं. कांग्रेस उनका साथ दे रही है. ये लोग राज्य में अवैध घुसपैठ को बढ़ावा देते हैं, तो देश के दुश्मन ही कहा जाएंगे. यही नहीं बीजेपी के तमाम केंद्रीय और राज्य के नेताओं की चुनावी रैलियों में भी अजमल पर खूब निशाना साधा जाता है.
दरअसल, अजमल पर हो रहे इस तीखे हमले के अपने कारण हैं. बीजेपी और उनके साथी दलों का आरोप है कि 2005 में गठन के बाद से एआईयूडीएफ बांग्लादेश से अवैध मुस्लिम घुसपैठियों को बढ़ावा देती है. अजमल के साथ गठबंधन कर कांग्रेस ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. बीजेपी पहले भी कांग्रेस और अजमल पर छिपकर खेल खेलने का आरोप लगाती थी, लेकिन इस बार खुलकर साझेदारी की है.



भाषा और संस्कृति को लेकर संवेदनशील हैं असम की जनता
असम में मुस्लिम वोटर की संख्या करीब 35 फीसदी है और तीस से ज्यादा सीटों पर वो बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हालांकि अजमल से गठबंधन कर कांग्रेस ने खुद ही बीजेपी को एक बड़ा मौका दे दिया कि वो अपने वोटर को लामबंद कर सके. असमिया लोग अपनी संस्कृति और भाषा को लेकर बेहद संवेदनशील हैं. यही कारण है CAA को लेकर राज्य में बहुत बड़ा आंदोलन भी हुआ. दशकों से अपनी भाषा और संस्कृति के लिए असमिया लोग सीमावर्ती इलाकों के बंगाली बोलने वाले मुस्लिमों और हिंदुओं के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इनसे उनकी संस्कृति और भाषा को खतरा है.

क्या था पिछले चुनावों में जीत का आंकड़ा
पिछले चुनाव में कांग्रेस को करीब 31 फीसदी वोट के साथ 26 सीट मिली थीं. जबकि अजमल को 13 फीसदी वोट के साथ 13 सीट मिली थीं. जाहिर है कि गठबंधन को उम्मीद है दोनों के वोट शेयर को मिलाकर वो बीजेपी को मात दे सकते हैं. इसी कारण राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भले ही अब तक बंगाल में प्रचार के लिए नहीं गए हैं लेकिन असम में नियमित आ रहे हैं.

ये भी पढ़ेंः- प्रियंका ने असम में भाजपा की तुलना 'धृतराष्ट्र' और 'शकुनी' से की, माफिया की तरह काम करने का लगाया आरोप

हालांकि दोनों पार्टियों के वोट शेयर को लेकर किए जा रहे दावों को बीजेपी गंभीरता से नहीं लेती. पार्टी का कहना है कि राजनीति में हमेशा एक जमा एक दो नहीं होता, कई बार उसका भारी नुकसान भी हो जाता है. बहरहाल नतीजा तो 2 मई को आएगा और तभी अजमल को लेकर सारे पत्ते साफ होंगे.
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